मजदूर बिरादरी मन ही मन खुद को मालिक से ज्यादा बुद्धिमान समझती है .
इस देश का गरीब 70 % से ज्यादा चालबाज, धूर्त,झूठा बहानेखोर और मुफ्तखोर और दारूबाज है।जो 30 % सही है वो मेहनत करते है,ईमानदारी से धीरे धीरे बढ़ते है और एक आध पीढ़ी के बाद गरीबी से निकलकर मिडल क्लास में प्रेवश कर देते है।आपने देखा भी होगा अपने आसपास कैसे ना कैसे बच्चे पढ़ाये और फिर सब जॉब लगे और आज जो गरीब था वो खुश है लेकिन जो किसी के पैसे मारते थे,झूठ बोलते थे।मक्कारी करते थे वो वही है आज भी 100 ,200 रुपये मांगते है।
मैंने मेरी सोसायटी में कचरे वाले को 500 रुपये अलग से दिये कि भाई तेरी वाइफ पीछे कचरा बीनती है उसके हाथ मे कुछ लग जायेगा।
उसके लिए कुछ गलाउज ले लेना और कुछ मास्क ।
खत्म हो जाये तो बोलना मैं फिर दे दूंगा।
कुछ दिन बाद उसकी वाइफ को बिना गलाउज के देखा और पूछा तो बोली साहब ये दारू पी गया।
15 से 20 हजार की नोकरी वाले अपने मालिक से एक सॅलरी एडवांस में हमेशा उधार मांग के रखेंगे और मांगते ही रहेंगे और अगला जैसे ही मांगेगा जॉब चेंज कर देंगे।
ट्रांसपोर्ट वाले के ट्रक को बीच मे छोड़कर चले जायेंगे या पीकर ठोक देंगे।
उसमे गन्दा डीजल भरके ,अपने 200 रुपये के लिये उसके 40 लाख की ऐसी तैसी कर देंगे।
उनकी तरफ से बस ट्रक का मालिक सेठ है उसे लूट लो।नमक की वफादारी नाम की चीज निब्बी है उनमें।
आप घर मे आये मजदूर को एडवांस दे दो,वो आएगा ही नही।
इसलिए मजदूर से काम करवा के ही हिसाब करें,कोई पेंडिंग काम बचे तो पैसे तब ही दे जब काम पूरा करे वरना वो फिर फोन ही नही उठाएगा।
आप गाँव मे किसी गरीब को उधार दे दो।
फिर देखो ऐसे गायब हो जाएगा जैसे उस गाँव मे ही नही रहता हो।
आप सोचेंगे कि सड़क के किनारे खड़े लोगो की मदद करें,
इनसे सब्जी और फल ले।
तो वो आपको सुतिया समझते है।
वो आपकी गाड़ी देखकर भाव बताएंगे।
बाइक वाले को अलग कार वाले को अलग।
कार वाले को कतई सुतिया समझते है कि इसे क्या पता कुछ भी रेट बोल दे।
वो गया था मदद करने गरीब उसे ही सुतिया समझता है।
वो भरोसा नही जीतेगा एक उचित कमीशन कमा के उसे हमेशा अपना नही बनाएगा बल्कि अपनी ऐसी तैसी करवाएगा की वो कभी उसके पास नही आएगा।
जो गरीब है उसे जिंदगी में शार्ट कट से अमीर बनना है इसलिए वो हमेशा गरीब ही रहता है।
ईमानदारी,विश्वास, रिलेशनशिप जिंदगी में बदलाव लाती है।
छोटे छोटे लालच,या पैसे मारने की आदत आपका न केवल सम्मान खत्म करते है बल्कि आप हमेशा वैसे ही रह जाते ह।
इसलिए खुद्दार बने।
ईमानदारी से जीवन जिये,लोगो की उधारी जरूर दे।
सुसरे फसबूक के गरीब तो 2000 हजार अचानक मांग कर ही गायब हो जाते है।
मांगने वाले को शर्म आ जाये इन्हें कभी नही आती।
बहुतों ने तो ये धंधा बना रखा है।
और उनकी पोस्ट पढ़ लो तो सब लम्बरदार बने घुमते है इधर।स्टेटस देखो इनकी स्टोरी के लेकिन किसी के पैसे देते समय इन्हें मौत आती है।
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