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Showing posts from November, 2022

अनुभव

 आज एक ऐसा अनुभव हुआ जिसे मैं शायद ही कभी भूल सकूं.  मेरे मोबाइल का स्क्रीन गार्ड दरक गया था. उसे बदलवाने के लिए एक छोटी-सी थड़ी नुमा दुकान पर रुका. एक छोटी उम्र का लड़का वह दुकान चला रहा था. उसे मोबाइल दिखाया तो उसने कहा कि ऑरिजिनल, कम्पनी का स्क्रीन गार्ड एक सौ रुपये का होगा. मैंने उसे लगाने की स्वीकृति दे दी. वह किसी और के मोबाइल पर स्क्रीन गार्ड लगा रहा था. बहुत तसल्ली और सफाई से वह अपना काम कर रहा था. जैसे ग्राहक को निबटा कर पैसे जेब के हवाले करने की उसे कोई जल्दी ही न हो. मुझे समझ में आया कि उसके हाथ में जो मोबाइल था वह स्विगी के एक डिलीवरी बॉय का था. बॉय जल्दी कर रहा था, कि उसकी डिलीवरी लेट हो रही है, लेकिन मोबाइल वाला लड़का पूरे परफेक्शन के साथ अपना काम कर रहा था. काम पूरा हुआ, डिलीवरी बॉय ने उसे सौ का नोट दिया, मैंने चोर निगाहों से देखा कि मोबाइल वाले ने उसे बीस रुपये लौटाए हैं. डिलीवरी बॉय वहां से हट ही रहा था कि मैंने मोबाइल वाले लड़के से कहा कि तुमने इससे तो अस्सी रुपये लिए हैं, मुझसे सौ क्यों लोगे? यह बात जाते हुए डिलीवरी बॉय ने सुन ली. वह पलटा और मोबाइल वाले लड़के के ...

मनुष्य को अभी पशुओं से बहुत कुछ सीखने की आवश्यकता है।

गिद्ध की प्रजाति का एक पक्षी है, वह अंडे देने के लिए किसी ऊंचे पर्वत की चोटी पर चला जाता है। जोड़ा वहीं अंडे देता है, मादा अंडों को सेती है, और एक दिन बच्चे अंडा तोड़ कर बाहर निकलते हैं। उसके अगले दिन सारे बच्चे घोंसले से निकलते हैं और नीचे गिर पड़ते हैं। एक दिन के बच्चे हजारों फीट की ऊंचाई से गिरते हैं। नर-मादा इस समय सिवाय चुपचाप देखते रहने के और कुछ नहीं कर सकते, वे बस देखते रहते हैं। बच्चे पत्थरों से टकराते हुए गिरते हैं। कुछ ऊपर ही टकरा कर मर जाते हैं, कुछ नीचे गिर कर मर जाते हैं। उन्ही में से कुछ होते हैं जो एक दो बार टकराने के बाद पंखों पर जोर लगाते हैं और नीचे पहुँचने के पहले पंख फड़फड़ा कर स्वयं को रोक लेते हैं। बस वे ही बच जाते हैं। बचने वालों की संख्या दस में से अधिकतम दो ही होती है। अब आप उस पक्षी के जीवन का संघर्ष देखिये! जन्म लेने के बाद उनके दस में से आठ बच्चे उनके सामने दुर्घटना का शिकार हो कर मर जाते हैं, पर उनकी प्रजाति बीस प्रतिशत जीवन दर के बावजूद करोड़ों वर्षों से जी रही है। संघर्ष इसको कहते हैं। एक और मजेदार उदाहरण है। जंगल का राजा कहे जाने वाला शेर शिकार के लिए क...

संदेश देती कहानी

  पवन काफी देर से नोएडा, गौर सिटी चौक पर खड़ा हुआ किसी ऑटो के इंतजार में था, जो भी ऑटो आ रहे थे वह पहले से भरे होने के कारण ड्राइवर के साथ आगे बैठने को कह रहे थे, वह सोच रहा था ऐसा ऑटो दिखे जो खाली हो, ताकि पीछे की सीट पर आराम से बैठ सके व उसका सफर एक हाथ से ऑटो पकड़कर व दूसरा हाथ लटकाकर बैठने में न गुजरे, कुछ देर बाद एक ऑटो दिखाई दिया, ऑटो के धीमे होते ही पवन ने पूछा  "मेट्रो सेक्टर 52 चलोगे क्या ?" "बाबन सेक्टर? जी साहब चलिए," ऑटो वाले ने रिप्लाई किया "कितना रुपया ?" पवन ने यह सोच कर पूछा कि पूरा खाली है तो ज्यादा न मांग ले  30/ -, यह सुनकर वह बैठ गया,और जेब से मोबाइल हाथ में निकालकर चलाने लगा, जैसे ही ऑटो थोड़ा आगे बढ़ा, तो एक बुजुर्ग महिला ने, जो दो बच्चों के साथ थी, रुकने का इशारा किया और पूछा "सिटी सेंटर चलोगे क्या?" ऑटो वाले ने पीछे सीट की तरफ इशारा किया और कहा " जल्दी बैठो" "कितने रुपए लोगे?" बच्चों को पहले बिठालते हुए उस महिला ने पूछा  "30 रुपए सवारी" ऑटो वाले ने जल्दी से जवाब दिया  "अरे नहीं! पागल ...

एक तिलस्मी सपना महिला का

 . . धनपत राय 'प्रेमचन्द', जयशंकर प्रसाद, पन्त, महादेवी वर्मा,निराला, अमृतलाल नागर,बाबा नागार्जुन, निर्मल वर्मा, कृष्णा सोबती, मन्नू भंडारी, प्रभाकर श्रोत्रिय, कल इन‌ साहित्य-रत्नों से सपने में रोचक आत्मीय संवाद हुआ । मैंने विनम्रता से कहा : एक जिज्ञासा भरा प्रश्न आप सबसे मुख़ातिब है__ "आप सब में से किसी ने कभी   कोई साहित्योत्सव आयोजित किए, उनमें भागीदारी की ?अपने ऑडियो- वीडियो बनवाए ?" यह सुनते ही, कुछ ने व्यंग्य से तिर्यक मुस्कान के साथ, बाबू जी अमृतलाल नागर एवं बाबा नागार्जुन ने ज़ोरदार ठहाके के साथ ‌और निराला जी ने बड़ी-बड़ी ऑंखों से तरेरते हुए  कहा___    "नहीं, पगली, नहीं" मैंने अचरज भरे सुर में कहा___ " फिर भी आप का साहित्य, आपकी शोहरत, आपके चर्चो की आज तक धूम कैसे है । देश में ही नहीं, सीमा पार भी, अनेक देशों में आप पर साहित्यिक अध्ययन, कार्यशालाऍं, संगोष्ठियाॅं, भाषण प्रतियोगिता, निबन्ध प्रतियोगिता, छोटे-बड़े संस्थानों, स्कूलों और विश्वविद्यालयों आदि में बड़े सम्मान और उत्साह से आयोजित होती हैं । ऐसा ...

बहुमूल्य रत्न

बीस दिन के पश्चात अस्पताल से घर लौटी शैलजा, पर.. घर लौट कर भी तो वह बिस्तर पर ही है। अचानक पैर फिसल जाने के कारण पांव की हड्डी टूट गई है। जब से वह बिस्तर पर है तब से उसकी 18 वर्षीय बेटी लेखा ने अपने कंधों पर सारी जिम्मेदारी ले रखी है। घर में खाना बनाना, फिर मां के लिए टिफिन भर के अस्पताल ले जाना, उन्हें खिलाना, बेड पैन देना, उनके शरीर को स्पंज करना, कपड़े बदलना सारी जिम्मेदारी लेखा ने बखूबी संभाल ली। एक नन्ही सी जान और काम हजार फिर भी चेहरे पर शिकन नहीं। इतने सब कामों के बीच भी अपनी पढ़ाई जारी रखना कोई मामूली बात नहीं है परंतु लेखा ने उसे भी बखूबी संभाल लिया है क्योंकि इस साल उसे इंजीनियरिंग एंट्रेंस एग्जाम देना है।  शैलजा को चाहे कितनी ही तकलीफ हो वह अपने चेहरे पर मुस्कान बिखेर कर अपनी बेटी से कहती "अब थोड़ा सा आराम कर लो बेटा! इतना काम करने के पश्चात फिर पढ़ाई के लिए बैठ गई हो। शरीर को भी थोड़ा सा आराम देना जरूरी है।" मां की तकलीफ को देखकर लेखा की आंखों में कई बार आंसू आ जाते परंतु मां के सामने वह अपने चेहरे पर दुख का भाव आने नहीं देती। वह जानती है कि "अगर मेरे चेहरे प...

स्वप्न

   विभीषण को लंका का राजपाठ सँभाले दो दिन हो गए थे , और वह लंका के बहुत से मानचित्र लेकर समुद्र के इस पार राम, सीता, लक्ष्मण से मिलने आए थे । राम , रावण की समृद्धि, तकनीकी प्रगति, विज्ञान, मनोरंजन के साधन, विचार आदि को समझना चाहते थे ।विभीषण उन्हें एक के बाद एक मानचित्र समझाते चले जा रहे थे । “ यह देखिये , यहाँ पूरी शोध की सुविधाएँ हैं, यहाँ दूर तलक मनोरंजन ग्रह है , यहाँ विभिन्न विचारों को पोषित करने वाले गुरूकुल है, सूचनाएँ विस्तृत थी, और प्रभावी थी । राम, सीता और लक्ष्मण इस नए ज्ञान से स्तब्ध थे । विभीषण के जाने के बाद,लक्ष्मण ने अपने विचारों से उभरते हुए कहा,  “ भईया, मुझे आश्चर्य है कि इतने शक्तिशाली साम्राज्य को हमने निर्धन , अशिक्षित, वानर सेना की सहायता से पराजित कैसे कर दिया?  यदि विभीषण ने हमें उसके भेद बता भी दिये थे , तो भी , यह कारण तो पर्याप्त नहीं हो सकता ।” “ मैं भी यही सोच रहा हूँ , “ राम ने कहा, “ उनके पास तो वायुयान थे और हमारे पास रथ भी नहीं थे , वे नित नए हथियार बना रहे थे, और हमारे पास वहीं प्राचीन हथियार थे , उनके पास प्रशिक्षित सेना थी , हमारे...

चीन

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चीन पर वे हथकंडे नहीं अपनाए जा सकते थे, जो भारत में काम आए। भारत में रह कर ईस्ट इंडिया कंपनी ने यहाँ के भेद समझ लिए थे। जबकि चीन उनके लिए अनसुलझी पहेली थी।  भारत में उन्हें अलग-अलग रंगों के, आस्थाओं के, सामाजिक वर्गों, भाषाओं के, और अलग रियासतों के लोग मिले। उनमें फूट डालने के तरीके तो उन्हें मिल गए थे। उन्हें अपनी सहूलियत से जोड़ना कुछ पेचीदा काम था। दूसरी तरफ़, चीन की सरहदों को उन्होंने सिर्फ़ एक बंदरगाह पर आवा-जाही और कुछ संस्मरणों से जाना था। वहाँ के लोग उन्हें एक जैसे दिखते, एक जैसी भाषा बोलने-लिखने वाले और एक ही राजा के अधीन नज़र आते। उन्हें कैसे तोड़ा जाए? हालाँकि ब्रिटिशों को यह मालूम हुआ कि मंचू साम्राज्य में मंगोलों की भागेदारी घट रही है, और उत्तरी हान वंशजों की बढ़ रही है। तिब्बत भी चीन में शामिल तो था, मगर वे चीनी नहीं। कुछ ऐसा ही शिनजियांग प्रांत में भी था।  मकार्टनी ने चीन से लौटते हुए अपनी रिपोर्ट में लिखा-  “चीन का साम्राज्य किसी दक़ियानूसी लेकिन एक ऊँचे दर्जे के जहाज की तरह है, जिसे उसके काबिल अधिकारियों ने डेढ़ सौ वर्षों से समंदर में टिकाए रखा है। वह जहा...

ब्रह्मास्त्र

  अभी हाल ही में एक केस के सिलसिले में पत्नी जी को मुंबई हाईकोर्ट जाना था और मेरा भी चर्चगेट (दक्षिण मुंबई) में कुछ काम था तो हम साथ ही हो लिये।    हमेशा की तरह हमने AC Local से सफर तय करने का फैसला किया। कार के बनिस्बत मुंबई की AC Local ने सफर को आसान और आराम दायक बना दिया है। कार ले जाओ तो ट्राफिक की कीचकीच बहुत रहती है। समय और ईंधन दोनो जाया होते है।         हमारी सामने वाली सीट पर एक शख्स बैठा था, उसकी पीठ हमारी तरफ थी। वह किसी युवती से विडियो कॉल पर बात कर रहा था। उस युवक की पीठ हमारी तरफ होने से उसके फोन की स्क्रीन पर उभर रहा चेहरा हम साफ देख पा रहे थे। युवती खूबसूरत थी,वे दोनो आपस में बडा हंस-हंस कर बातें कर रहे थे।  यह दृश्य देख कर मेरी पत्नी रेनू से मैने कहा,..." देखो ये पति-पत्नी एक दूसरे से कितना प्यार करते है! कब से कितनी सारी बातें कर रहे है।" रेनू ने मेरी तरफ देखा और बोली," ...ये उसकी पत्नी नही है,गर्ल फ्रेंड है। तभी ये दोनो इतना दांत दिखा रहे है।"  मैने पूछा तुम कैसे कह सकती हो कि.. "वह युवती उसकी पत्नी नही,प्रेमिका है?" र...

जनरेशन गैप

  कर्नाटक संपर्क क्रांति, लगभग अपने समय पर भोपाल स्टेशन पर पहुंची थी,रुकने का अनाउंसमेंट अंदर तक सुना जा सकता था, 3rd AC कोच B2 में 38 नंबर बर्थ सर्च करती हुई, लाइट जलाकर अपने सीट का नंबर खोजते हुए,एक युवती पहुंची,पहले मोबाइल के किसी एप से कन्फर्म किया फिर वहां लिखे हुए सीट पर कन्फर्म कर, युवती ने अपना बैग सीट के नीचे रखा और अपर बर्थ पर जा बैठी, रात के 10:30 का समय हुआ था तो अधिकतर लोग सो चुके थे या सोने की तैयारी में थे। स्टेशन पर यात्रियों के आने के कारण नींद खुलना स्वाभाविक ही है,लेकिन इसको लेकर आपत्ति दर्ज करा भी नहीं सकते क्योंकि यह एक सिस्टम का हिस्सा है और दूसरों को भी ट्रेन में आना ही है और किसी किसी को यात्रा पूरी कर उतरना ही है । आखिर उसने सीट पर बैठने के बाद कर्मचारी से प्राप्त कवर में से चादर निकाला उसे बिछा कर लेटने से पहले किसी को काल किया और धीमी आवाज में बात करने लगी, बीच बीच में मौसी- मौसी कर के संबोधित कर रही थी इससे यह अंदाजा लगाया जा सकता था कि शायद वह अपनी मौसी से बात कर रही थी उसने बात आगे बढ़ाते हुए कहा,"मौसी क्या हम अपनी जिन्दगी भी नहीं जी सकते?, मैं किसी ...