ब्रह्मास्त्र
अभी हाल ही में एक केस के सिलसिले में पत्नी जी को मुंबई हाईकोर्ट जाना था और मेरा भी चर्चगेट (दक्षिण मुंबई) में कुछ काम था तो हम साथ ही हो लिये।
हमेशा की तरह हमने AC Local से सफर तय करने का फैसला किया। कार के बनिस्बत मुंबई की AC Local ने सफर को आसान और आराम दायक बना दिया है। कार ले जाओ तो ट्राफिक की कीचकीच बहुत रहती है। समय और ईंधन दोनो जाया होते है।
हमारी सामने वाली सीट पर एक शख्स बैठा था, उसकी पीठ हमारी तरफ थी। वह किसी युवती से विडियो कॉल पर बात कर रहा था। उस युवक की पीठ हमारी तरफ होने से उसके फोन की स्क्रीन पर उभर रहा चेहरा हम साफ देख पा रहे थे। युवती खूबसूरत थी,वे दोनो आपस में बडा हंस-हंस कर बातें कर रहे थे।
यह दृश्य देख कर मेरी पत्नी रेनू से मैने कहा,..." देखो ये पति-पत्नी एक दूसरे से कितना प्यार करते है! कब से कितनी सारी बातें कर रहे है।"
रेनू ने मेरी तरफ देखा और बोली," ...ये उसकी पत्नी नही है,गर्ल फ्रेंड है। तभी ये दोनो इतना दांत दिखा रहे है।"
मैने पूछा तुम कैसे कह सकती हो कि.. "वह युवती उसकी पत्नी नही,प्रेमिका है?"
रेनू ने कहा, .." अभी सुबह का समय है,ये आदमी काम पर जाने के लिए अपने घर से ही आ रहा होगा यानि अपनी पत्नी से मिल कर आ रहा होगा तो इतनी जल्दी प्यार नही उबलने लगता है।"
फिर मैने अपनी बात रखी,..." हो सकता है,यह शख्स अपनी पत्नी से बहुत प्यार करता हो!"
रेनू ने कहा,.." यह शख्स पुरुष है,कुछ भी हो जाये,एक शादी शुदा आदमी अपनी पत्नी से इतनी देर बात नही कर सकता है और अपनी पत्नी से हंस-हंस के इतनी देर कौन बात करता है भला ?...आप करते हैं? और हाँ पत्नी से प्यार तभी उमड़ता है, जब वह अपनी ना हो...समझे!
अब पत्नी जी ने ब्रह्मास्त्र चला दिया था,मै समझ गया था कि मेरी टांग खिचाई हो रही है। ....ऐसे में "हाँ" बोलता तो भी मरता,"ना" बोलता तो भी मरता,... मैने मौन रहना ही श्रेष्ठ समझा!
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