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Showing posts from August, 2026

दर्द

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 देश में एक नया राष्ट्रीय प्रोग्राम शुरू हुआ है, बिभाजन विभीषिका स्मृति दिवस । दर्द समय के साथ भर जाते हैं। हर घाव को बार-बार कुरेदते रहना ज़रूरी नहीं होता। कई बार भूल जाना ही आगे बढ़ने का सबसे मानवीय तरीका होता है। तमाम परिवारों की पुश्तैनी दुश्मनियाँ तीसरी या चौथी पीढ़ी में जाकर खत्म हो जाती हैं। नई पीढ़ी को अक्सर ठीक-ठीक पता भी नहीं होता कि उनके दादा या परदादा किस बात पर एक-दूसरे के दुश्मन थे। और शायद यही अच्छा है। क्योंकि अगर हर पीढ़ी अपने हिस्से का पुराना हिसाब लेकर बैठ जाए, तो कोई परिवार कभी शांति से नहीं जी पाएगा। देश भी कुछ ऐसा ही होता है। हमारे देश का बँटवारा इस भूगोल पर रहने वाले लोगों के लिए सिर्फ नक्शे की एक लकीर नहीं था। वह एक बहुत गहरा घाव था। लाखों लोग अपने घर, जमीन, रिश्ते और अपनी पूरी पिछली जिंदगी छोड़कर इधर से उधर हुए। बहुतों ने अपने लोगों को खोया। बहुतों ने हिंसा देखी। उस पीड़ा की गहराई को शब्दों में समेटना मुश्किल है। लेकिन समय का काम शायद यही है कि वह सबसे गहरे घाव पर भी धीरे-धीरे नई त्वचा उगा देता है। बँटवारे का विनाश झेलने वाले परिवारों की अब चौथी, पाँचवीं पी...

इसीलिए न पूंजीवाद बेहतर है न साम्यवाद। बेहतर है समाजवाद जो उपरोक्त दोनों में से किसी को बेलगाम नही होने देता

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 तो असल बात यह है: आज अगर आप ब्राह्मण-बनिया गठजोड़ की आलोचना करें, तो तुरंत आपको "कम्युनिस्ट" करार दिया जाता है। वे इसे नफ़रत से "लेफ्ट विंग" (वामपंथी) कहते हैं। इसका मतलब यह निकलता है कि हिंदू धर्म का मतलब ही पूंजीवाद है। यह एक चालाक चाल है, लेकिन यह गलत है!!!! आइए हिंदू पौराणिक कथाओं के दो सबसे उलझे हुए किरदारों—इंद्र और बलि—के ज़रिए बुनियादी बातों को समझते हैं। इंद्र दक्षिणपंथियों (RW) के पसंदीदा हैं, और बलि वामपंथियों (LW) के। और दोनों ही गलत वजहों से। इंद्र, जो चीज़ों को जमा करने (hoarding) के शौकीन थे। उन्होंने सबकी मदद से क्षीर सागर (दूध का सागर) मथा, लेकिन अच्छी चीज़ें खुद स्वर्ग में रख लीं। सारी दौलत हड़प ली, किसी के साथ कुछ नहीं बांटा, फिर भी ज़िंदगी दुखी रही। क्यों? क्योंकि स्वर्ग ही नरक को जन्म देता है। जब सारा खाना आपके पास हो, तो बाकी दुनिया भूखी मरती है। इसे 'मत्स्य न्याय' कहते हैं—बड़ी मछली छोटी मछली को खा जाती है। संस्कृत में पूंजीवाद के लिए पहले से ही एक शब्द था, और वह कभी भी तारीफ भरा शब्द नहीं था। मज़ेदार बात यह है कि असल में कोई इंद्र की...