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भारत माता की जय (जयहिन्द)

1990 के आसपास की बात है। जो भी प्रतिभावान बच्चे अच्छे Engineering, Medical, Law, Accounts या अन्य किसी भी Field से अपनी पढ़ाई पूरी करते, विदेशी कम्पनियाँ तुरन्त Toppers को भर्ती करके विदेश ले जाती। ये दौर बहुत ज्यादा Competition का दौर था। प्रतिभा पलायन (Brain Drain) एक राष्ट्रीय समस्या और ज्वलंत मुद्दा बन चुका था। TV, अख़बारों, रेडियो, सभाओं, संगोष्ठी और Debates में छाया हुआ मुद्दा। राष्ट्र में रहकर युवा भले ही राष्ट्र की सेवा ना कर पा रहे थे, किन्तु भारत की विश्वगुरु की पहचान फिर से ज़िन्दा हो रही थी। संसार स्तब्ध था और धीरे-धीरे विश्व के सभी सम्मानित संस्थानों पर भारतीय युवा Doctors, Engineers, Professors, Scientists, CEO आदि-आदि के रूप में कब्जा जमाते जा रहे थे। आपके जितने भी जानकार विदेशों में Set हैं, उनमें से ज़्यादातर की Graduation 1990 से 2005 के बीच पूरी हुई होगी। आप खुद देख लीजिये। फिर से विश्व ने भारत के साथ छल किया। UNO के माध्यम से पैसे फेंककर भारत में No Detention Policy लागू करवाई और Universalisation of Elementary Education के नाम पर भारतीय शिक्षा की बुनियादी ...

Government

Akbar: What is the biggest achievement of the Modi Government Birbal? Birbal: Jahapanah, the biggest achievement of the government is the change in attitude they have brought upon the population in general... Until 2016 people felt and believed they had nothing and wanted a lot more from the government. Today people have realised they do have a lot and must somehow protect it from the government!! 😜

DID YOU KNOW ?

DID YOU KNOW ? Prabhas got 6000 marriage proposals after Bahubali.. Not because he is Handsome, Not he is a good Fighter, Not for the way he loved Rani Devasena & Not for his ability to control Elephants.. But only because he could say, "माँ, तुम  गलत हो . मेरी पत्नी  सही है !!! " 😂😂

Man

मन को छूने वाली बात =============== एक शहर में एक प्रसिद्ध बनारसी विद्वान् "ज्योतिषी" का आगमन हुआ..!!  माना जाता है कि उनकी वाणी में सरस्वती विराजमान है और वे जो भी बताते है वह 100% सच ही होता है। . 501/- रुपये देते हुए "शर्मा जी" ने अपना दाहिना हाथ आगे बढ़ाते हुए ज्योतिषी को कहा.., "महाराज,  मेरी मृत्यु कब, कहॉ और किन परिस्थितियों में होगी?"  . ज्योतिषी ने शर्मा जी की हस्त रेखाऐं देखीं, चेहरे और माथे को अपलक निहारते रहे।   स्लेट पर कुछ अंक लिख कर जोड़ते–घटाते रहे। बहुत देर बाद वे गंभीर स्वर में बोले..,   "शर्मा जी, आपकी भाग्य रेखाएँ कहती है कि जितनी आयु आपके पिता को प्राप्त होगी उतनी ही आयु आप भी पाएँगे।   जिन परिस्थितियों में और जहाँ आपके पिता की मृत्यु होगी, उसी स्थान पर और उसी तरह, आपकी भी मृत्यु होगी।"  . यह सुन कर "शर्मा जी" भयभीत हो उठे और चल पडे ......  .  . .  . एक घण्टे बाद ...  .  .  "शर्मा जी" वृद्धाश्रम से अपने वृद्ध पिता को साथ लेकर घर लौट रहे थ...

सद्चिंतन

आज का सद्चिंतन मित्रो ! तुम व्यर्थ में दूसरों के अनर्थकारी संदेशों को ग्रहण कर लेते हो। तुम वह सच मान बैठते हो, जो दूसरे कहते हैं। तुम स्वयं अपने आप को दुःखी करते हो और कहते हो कि दूसरे लोग हमें चैन नहीं लेने देते। तुम स्वयं ही दुःख का कारण हो, स्वयं ही अपने शत्रु हो। जो किसी ने कुछ बक दिया, तुमने मान लिया यही कारण है कि तुम उद्विग्न रहते हो। सच्चा मनुष्य एक बार उत्तम संकल्प करने के लिए यह नहीं देखता कि लोग क्या कह रहे हैं। वह अपनी धुन का पक्का होता है। सुकरात के सामने जहर का प्याला रखा गया, पर उसकी राय को कोई न बदल सका। बंदा बैरागी को भेड़ों की खाल पहना कर काले मुँह गली-गली फिराया गया, किंतु उसने दूसरों की राय न मानी। दूसरे के इशारों पर नाचना, दूसरों के सहारे पर निर्भर रहना, दूसरों की झूठी टीका-टिप्पणी से उद्विग्न होना, मानसिक दुर्बलता है। जब तक मनुष्य स्वयं अपना स्वामी नहीं बन जाता, तब तक उसका संपूर्ण विकास नहीं हो सकता। दूसरों का अनुकरण करने से मनुष्य अपनी मौलिकता से हाथ धो बैठता है। स्वयं विचार करना सीखो। दूसरों के बहकावे में न आओ। कर्त्तव्य-पथ पर बढ़ते हुए, दूसरे क्या करत...

शब्द ।

शब्द पहचान बने मेरी तो अच्छा है , चेहरे का क्या है ये तो मेरे साथ चला जायेगा ।

FATHER

पुरानी पेंट रफू करा कर पहनते जाते है, Branded नई shirt देने पे आँखे दिखाते है टूटे चश्मे से ही अख़बार पढने का लुत्फ़ उठाते है, Topaz के ब्लेड से दाढ़ी बनाते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है …. कपड़े का पुराना थैला लिये दूर की मंडी तक जाते है, बहुत मोल-भाव करके फल-सब्जी लाते है आटा नही खरीदते, गेहूँ पिसवाते है.. पिताजी आज भी पैसे बचाते है… स्टेशन से घर पैदल ही आते है रिक्सा लेने से कतराते है सेहत का हवाला देते जाते है ... बढती महंगाई पे चिंता जताते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है ..... पूरी गर्मी पंखे में बिताते है,......... सर्दियां आने पर रजाई में दुबक जाते है AC/Heater को सेहत का दुश्मन बताते है, लाइट खुली छूटने पे नाराज हो जाते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है माँ के हाथ के खाने में रमते जाते है, बाहर खाने में आनाकानी मचाते है साफ़-सफाई का हवाला देते जाते है,मिर्च, मसाले और तेल से घबराते है पिताजी आज भी पैसे बचाते है… गुजरे कल के किस्से सुनाते है,........... कैसे ये सब जोड़ा गर्व से बताते है........ पुराने दिनों की याद दिलाते है, ........... बचत की अहमियत समझ...