इस तरह करता हूं मैं प्रेम
मैं इस तरह
करता हूं तुमसे प्रेम
जैसे चिड़िया करती है
तिनका-तिनका जोड़ कर
अपने घोंसले से
या फिर बालों को
संवारती हुई मां
अपनी बेटी से
और जैसे माली करता है
अपने उगाए पौधों पर
खिलते हुए फूलों से।
तुम्हारे तपते चेहरे पर
सुनहरी हो गई मुस्कान
से करता हूं मैं प्रेम
क्योंकि यह
पृथ्वी के प्रथम युगल में
संवाद की कूट भाषा है।
मैं इस तरह
करता हूं तुमसे प्रेम
जैसे चूमते हैं युगल
एक दूसरे में डूब कर,
उस चुंबन का अहसास करोगी
तो जान जाओगी कि
मैंने चूमा है हर बार
सिर्फ तुुम्हारी रूह को
फिर समझ लोगी कि
मैंने क्या कहा है
आसमान में इंद्रधनुष बनाती
तुम्हारी सपनीली आंखों से
जहां निरंतर
जलती है एक लौ
जो गरीबों के चूल्हे को
सुलगाती है सुबह-शाम
जिसकी आंच पर
रोटियां ही नहीं
धीरे धीरे पकता है प्रेम भी
उन श्रमिक युगलों के लिए
जो बनाते हैं -
हमारे लिए धरती पर आशियाना
और खुद रह जाते हैं बेघर।
ज्वालामुखी की आग समेटे
तुम्हारी इन आंखों से
करता हूं प्रेम
जो रूढ़ियों और मरती परंपराओं
की लौह शृंखलाओं को
गला देना चाहती हैं और
खोल देना चाहती हैं
मनुष्यता की मुक्ति का मार्ग
ताकि हर इंसान
मृत्यु के लिए नहीं
प्रेम के लिए खर्च कर दे
अपना पूरा जन्म।
हमारे बीच यह प्रेम
मानवीय संवेदना को
बचाने का यज्ञ है
जिसमें दी है मैंने
देह की आहुति,
मैं इस तरह करता हूं
तुमसे प्रेम कि
मृत्यु के बाद भी
रहूं मन की स्लेट पर,
बहता रहूं तुम्हारी आंखों से
अक्षर-अक्षर।

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