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Showing posts from 2023

विधि_का_विधान_निश्चित_है

   ✍️ महाभारत युद्ध में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु जिस समय वीरगति को प्राप्त हुए, उनकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थी। उनके गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ...जो महाभारत युद्ध के बाद हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठे....जन्मेजय राजा परीक्षित के पुत्र थे।  एक दिन जन्मेजय ने वेदव्यास से कुतर्क किया। जहां आप थे ,भगवान श्रीकृष्ण थे, भीष्म, द्रोणाचार्य, धर्मराज युधिष्ठिर, जैसे महान लोग उपस्थित थे। फिर भी आप महाभारत के युद्ध को होने से नहीं रोक पाए और देखते-देखते अपार जन धन की हानि हो गई। यदि मैं उस समय रहा होता तो, अपने पुरुषार्थ से इस विनाश को होने से बचा लेता। अहंकार से भरे जन्मेजय के शब्द थे, फिर भी व्यास जी शांत रहे...उन्होंने कहा, पुत्र अपने पूर्वजों की क्षमता पर शंका न करो।  यह विधि द्वारा निश्चित था,जो बदला नहीं जा सकता था, यदि ऐसा हो सकता तो श्रीकृष्ण में ही इतना सामर्थ्य था कि वे युद्ध को रोक सकते थे। जन्मेजय अपनी बात पर अड़ा रहा। बोला मैं इस सिद्धांत को नहीं मानता.... आप मेरे जीवन की होने वाली किसी होनी को बताइए।....मैं उसे रोककर प्रमाणित कर दूंगा कि विधि का विधान निश्चित नहीं ह...

गुरू

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 एक धर्मसभा का कहीं आयोजन हुआ था. शहर से दूर के इलाके में. वहां विभिन्न धर्मों और धर्मों के विभिन्न पंथों और संप्रदायों के प्रचारक अपने शिष्यों के साथ आए थे. . व्याख्यान चल रहे थे. सभी अपने-अपने पंथ को श्रेष्ठ बताते और यह दावा करते कि केवल उनके संप्रदाय में दीक्षित होकर ही मानवमात्र का कल्याण हो सकता है. उनका मार्ग ही कल्याण का मार्ग है और सर्वश्रेष्ठ है. . सभास्थल के समीप ही एक दलदल थी. कोई व्यक्ति धोखे से उसमें गिर गया. दलदल में धंसने लगा तो उसने सहायता के लिए पुकारा. पुकार सनकर विभिन्न धर्मों और पंथों के प्रचारक आदि पहुंचे. . वह आदमी संकट में था लेकिन कोई सहायता को नहीं जा रहा था. कोई उपदेश देने लगता कि संसार भी ऐसा ही दलदल है अगर सही राह दिखाने वाले गुरू न हुआ तो इंसान ऐसे ही तड़पता रहता है. . कोई दर्शन बघारने लगा तो कोई लोक-परलोक पर भाषण करने लगा. कुछ लोग आयोजकों को भी कोसने लगे कि उन्हें दलदल के पास बाड़े लगवाने चाहिए थे. . एक आदमी के प्राण संकट में थे और चारों तरफ से ज्ञान की वर्षा हो रही थी. वहां से लकड़ियों का बड़ा सा गठ्ठर सिर पर लादे दो लकड़हारे गुजर रहे थे. शोर सुनकर वे...

Niketan and Yugantika

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 ऊँची शिक्षा, भाग्य और भगवद्भक्ति से कुछ हासिल नहीं होता। अपने व्यवसाय में सफल होने के लिए आपके अंदर कुटिलता पर्याप्त होनी चाहिए। चाहे आप किसी क्षेत्र में हों। बहुत लोग सोचते हैं कि मालिक की चापलूसी से हम हासिल कर लेंगे। नहीं, यह सफल होने सूत्र नहीं है। सफल होने के लिए आपको अपने नाखून पैने करने होंगे।पॉवर बैलेंस करने का सूत्र आपको आना चाहिए।अन्यथा ऊँचे परिवार में पैदा होने, कैम्ब्रिज में पढ़े होने से भी आप सफलता के शिखर पर नहीं पहुँच सकते। सफलता के गुर न कोई सिखा सकता है न कोई चौकड़ी आप को बता सकती है। बस भर्राई हुई आवाज़ में आप भड़ास निकाल सकते हो, रो सकते हो और बड़े आदमी हो तो महफ़िल छोड़ कर जा सकते हो। यह सब मानव सभ्यता की शुरुआत से ही कायरता की निशानी बताया गया है। इसीलिए आप कभी सफल नहीं हो पायेंगे। यह मैंने अपने ख़ुद के अनुभव से पाया और कभी भी शिखर पर नहीं पहुँच सका। मेरा मानना है, कि शिखर पर वही चढ़ते हैं, जो अपने संभावित शत्रुओं का नष्ट करते चलते हैं। सफल होना है तो जीवन पर्यंत अपने दुश्मनों को नष्ट करना सीखो भोलू!

बस यूं ही

कल बड़े लंबे अंतराल के बाद मेरी अपने चाचा जी से बातचीत हुई ,टेलीफोन पर। वह गांव में रहते हैं और मेरी चचेरी बहन और उसका परिवार उनकी देखभाल करते हैं। जैसा कि लगभग हर किसी के साथ होता है ,जीवन के चौथेपन में लोग अपने बचपन और यौवन को ही अधिक याद करते हैं। मेरे चाचा जी ने अपनी किशोरावस्था अवस्था में,जब मेरा बचपन था, तब मुझे बहुत अधिक स्नेह और दुलार दिया है। मेरी बाल क्रीड़ाओं की यादों को वे अक्सर ही मेरे साथ साझा करते हैं, वे सदा से ही अति क्रियाशील, स्नेही और सामाजिक व्यक्ति रहे हैं। बड़ी से बड़ी मुसीबत में मैंने उन्हें कभी उदास, परेशान नहीं देखा है परंतु अब शारीरिक क्षमताओं के घट जाने से गांव में रहते हुए कभी-कभी एकाकी हो उठाते हैं।कल जब उनसे बात हुई तो उन्होंने मेरे अन्य भाई बहनों के दूर चले जाने और संपर्क टूट जाने की पीड़ा को मेरे साथ साझा किया। एक बात जो परिवार के संबंध में उन्होंने बताई वह मेरे दिल को छू गई वही आप सबके साथ सांझा कर रही हूं।  चाचा जी ने कहा कि, परिवार को मुर्गे जैसा मुखिया चाहिए, जो प्रातः काल ही चैतन्य हो और साथ-साथ अपने पूरे परिवार को भी चैतन्य करें। मुर्गेऔर मु...

हंसा उड़ जाएगा सब धरा रह जाएगा

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 चौथे माले पर फ्लैट था कर्ण जी का एम 441, लिफ्ट के एकदम सामने। सीढ़ी से अगर कोई चढ़े तो सबसे पहले उनका ही फ्लैट मिलेगा। मिसेज कर्ण को शिकायत थी कि इसमें पीछे की तरफ बालकनी है जबकि सामने होता तो शाम में चेयर लेकर बैठ भी जाते तो आने जाने वाले लोग, खेलते हुए बच्चे दिखते तो थोड़ा बहुत तो मन लग जाता। पर कर्ण जी का वश चलता, तो सोते- उठते भी अपने ज्योतिषाचार्य जी से पूछ कर हीं। फ्लैट बुक करने के पहले वह स्वामी जी से दरभंगा जाकर मिले थे। कितनी देर गणना करने के बाद स्वामी जी इस घर को अति शुभ बताए थे। वरना तीन बार तो उनकी सलाह की वजह से फ्लैट की बुकिंग कैंसिल किए थे कर्ण जी। उनके पिताजी भी दरभंगा में स्वामी जी के बताए शुभ घड़ी के हिसाब से भूमि पूजन और घर की नींव में पहली ईंट रखवाए थे। घर परिवार खूब फला फूला उनका और उसी अनुपात में ज्योतिषाचार्य जी भी फलते फूलते गए। ये बड़ी सी तोंद निकल आई थी उनकी, इस वजह से पालकी पर चलने लगे थे। आजकल पालकी की जगह इनोवा है। भक्तों की श्रद्धा की वजह से। उनके आधा दर्जन बच्चे काम की बारीकी सीख, उनके व्यापार को ऊंचाई पर ले जा रहे इन दिनों ।   कर्ण जी को थो...

अपने बुजुर्गों का सम्मान करें

 जब मृत्यु का समय निकट आया तो पिता ने अपने एकमात्र पुत्र धर्मपाल को बुलाकर कहा कि,  बेटा मेरे पास धन-संपत्ति नहीं है कि मैं तुम्हें विरासत में दूं। पर मैंने जीवनभर सच्चाई और प्रामाणिकता से काम किया है।  तो मैं तुम्हें आशीर्वाद देता हूं कि, तुम जीवन में बहुत सुखी रहोगे और धूल को भी हाथ लगाओगे तो वह सोना बन जायेगी। बेटे ने सिर झुकाकर पिताजी के पैर छुए। पिता ने सिर पर हाथ रखकर आशीर्वाद दिया और संतोष से अपने प्राण त्याग कर दिए। अब घर का खर्च बेटे धर्मपाल को संभालना था। उसने एक छोटी सी ठेला गाड़ी पर अपना व्यापार शुरू किया।  धीरे धीरे व्यापार बढ़ने लगा। एक छोटी सी दुकान ले ली। व्यापार और बढ़ा। अब नगर के संपन्न लोगों में उसकी गिनती होने लगी। उसको विश्वास था कि यह सब मेरे पिता के आशीर्वाद का ही फल है।  क्योंकि, उन्होंने जीवन में दु:ख उठाया, पर कभी धैर्य नहीं छोड़ा, श्रद्धा नहीं छोड़ी, प्रामाणिकता नहीं छोड़ी इसलिए उनकी वाणी में बल था। और उनके आशीर्वाद फलीभूत हुए। और मैं सुखी हुआ। उसके मुंह से बारबार यह बात निकलती थी।   एक दिन एक मित्र ने पूछा: तुम्हारे पिता में इतना...

स्वाद

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 लघुकथा "ताऊजी...आप तो बैठ जाओ आराम से आपकी प्लेट मैं लगाकर लाती हूँ।" एक विवाह समारोह के भोज में परेशान होते देख नेहा उनकी प्लेट लगाकर ले आई।ताईजी के गुजर जाने के साल भर बाद पहली बार किसी सामाजिक समारोह में शामिल हुए ताऊजी उसे कुछ असहज लग रहे थे। "तुझे पता है ...मुझे क्या खाना है?" ताऊजी हल्के से मुस्कुरा कर बोले। "अरे! कैसी बात करते हैं...बचपन में एक यही तो काम करती थी मै परोसने का...आप भूल गए क्या...मुझे पता है आपको ठंडी पूरियाँ पसंद है ।"  "नहीं बेटा,अब नहीं... ।" "तो क्या अब आपकी पसंद बदल गई है...।" वह उन के पास कुर्सी खींच कर बैठ गई।" “ तुम्हे तो पता है बेटा...परिवार में पंद्रह सोलह सदस्य थे...पूरियाँ होली,दीवाली पर ही बनती थी तब तुम्हारी ताई सबके लिए तो गर्म-गर्म पूरियाँ तलती थी।सबसे बाद में जब मैं और वह खाना खाते तो मैं यही कहता कि मुझे तो ठंडी पसंद है और गर्म उसकी थाली में रख देता...वरना तो वह गर्म कभी खा ही नहीं पाती...।" पत्नी की याद उनकी आँखों में झिलमिला रही थी। "ओह...तभी से चल पड़ा कि आप को ठंडी पूरी ही पसं...

सच्चाई और ईमानदारी

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 एक बढ़ई किसी गांव में काम करने गया, लेकिन वह अपना हथौड़ा साथ ले जाना भूल गया। उसने गांव के लोहार के पास जाकर कहा, 'मेरे लिए एक अच्छा सा हथौड़ा बना दो। मेरा हथौड़ा घर पर ही छूट गया है।' लोहार ने कहा, 'बना दूंगा पर तुम्हें दो दिन इंतजार करना पड़ेगा। हथौड़े के लिए मुझे अच्छा लोहा चाहिए। वह कल मिलेगा।' दो दिनों में लोहार ने बढ़ई को हथौड़ा बना कर दे दिया। हथौड़ा सचमुच अच्छा था। बढ़ई को उससे काम करने में काफी सहूलियत महसूस हुई। बढ़ई की सिफारिश पर एक दिन एक ठेकेदार लोहार के पास पहुंचा। उसने हथौड़ों का बड़ा ऑर्डर देते हुए यह भी कहा कि 'पहले बनाए हथौड़ों से अच्छा बनाना।' लोहार बोला, 'उनसे अच्छा नहीं बन सकता। जब मैं कोई चीज बनाता हूं तो उसमें अपनी तरफ से कोई कमी नहीं रखता, चाहे कोई भी बनवाए।' धीरे-धीरे लोहार की शोहरत चारों तरफ फैल गई। एक दिन शहर से एक बड़ा व्यापारी आया और लोहार से बोला, 'मैं तुम्हें डेढ़ गुना दाम दूंगा, शर्त यह होगी कि भविष्य में तुम सारे हथौड़े केवल मेरे लिए ही बनाओगे। हथौड़ा बनाकर दूसरों को नहीं बेचोगे।' लोहार ने इनकार कर दिया और कहा, ...

वो पत्नी ही होती हैं जो अपनी किडनी देकर भी आदमी को नया जीवन देती हैं, वो पत्नी ही होती हैं जो हजारो होस्पिटल से कोमा में घोषित आदमी को भी जिन्दा कर देती है.... सिर्फ़ एक औरत के गलत निकलने पर पूरी दुनिया गलत नहीं हो जाती हैं..... हर मिडिल क्लास बच्चों की मां उसका पति चाहे 2000 ही कमाता हो पर वो बाहर खुद को रानी ही बताती है

 चलो इतनी सारी नेगेटिविटी के बीच तुम्हें एक पॉजिटिव चीज बताते हैं... हमारे पड़ोस में एक भईया रहते हैं... आज से लगभग पंद्रह साल पहले उनकी आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं थी... बस किसी तरह गुजर बसर चल रहा था... हमारे पिता जी एवं मोहल्ले के अन्य लोगो के सहयोग से उनका विवाह करवाया गया...  उस समय भईया साइकिल से कपड़े की फेरी कर रहे थे... दिन रात गली मोहल्लों में साइकिल चलाते... कभी रेडीमेड कपड़े बेचते तो कभी आइसक्रीम तो कभी मेले ठेले में रामदाना मूंगफली बेच लिया... किसी एक चीज पर टिके नहीं, मतलब जो काम मिल गया उसे कर लिया...  हालांकि मेहनत बहुत करते थे... लेकिन परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने के लिए काफी नहीं था... उनकी धर्मपत्नी जी भी बहुत ज्यादा पढ़ी लिखी नहीं थी... लेकिन व्यवहार से बहुत ही सुशील एवं सज्जन थी... विवाह के समय वो बारंहवी पास थी और भैया दसवी फेल... फिर भी उनका विवाह हो गया...  इस बीच भईया के दिमाग में पता नहीं कहां से आया उन्होंने भाभी को आगे की शिक्षा पूरी करने के लिए प्रेरित किया... पैसा जेब में फूटी कौड़ी नहीं था... फिर भी कर्जा उधार ले के बीए में एडमिशन कराया...

विरासत

 काश की हमारे लोग इसे समझ पाते....         महेश के घर आते ही बेटे ने बताया कि वर्मा अंकल आर्टिगा गाड़ी ले आये हैं। पत्नी ने चाय का कप पकड़ाया और बोली पूरे 13 लाख की गाड़ी खरीदी और वो भी कैश में। महेश हाँ हूँ करता रहा। आखिर पत्नी का धैर्य जवाब दे गया, हम लोग भी अपनी एक गाड़ी ले लेते हैं, तुम मोटर साईकल से दफ्तर जाते हो क्या अच्छा लगता है कि सभी लोग गाड़ी से आएं और तुम बाइक चलाते हुए वहाँ पहुंचो, कितना खराब लगता है। तुम्हे न लगे पर मुझे तो लगता है।        देखो घर की किश्त और बाल बच्चों के पढ़ाई लिखाई के बाद इतना नही बचता कि गाड़ी लें। फिर आगे भी बहुत खर्चे हैं। महेश धीरे से बोला।       बाकी लोग भी तो कमाते हैं, सभी अपना शौक पूरा करते हैं, तुमसे कम तनखा पाने वाले लोग भी स्कोर्पियो से चलते हैं, तुम जाने कहाँ पैसे फेंक कर आते हो। पत्नी तमतमाई।* अरे भई सारा पैसा तो तुम्हारे हाथ मे ही दे देता हूँ, अब तुम जानो कहाँ खर्च होता है। महेश ने कहा। मैं कुछ नही जानती, तुम गाँव की जमीन बेंच दो ,यही तो समय है जब घूम घाम लें हम भी ज़िंदगी जी लें। मरने क...

ज़िन्दगी ना मिलेगी दोबारा

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 ज़िन्दगी में 8 के पहाड़े की बहुत एहमियत होती है ! इसकी जानकारी सब लोगों को होना चाहिए है !  इसे ज़रूर पढ़ें : 8 x 01 = 08   ...बचपन 8 × 02 = 16   ...जवानी की शुरुआत 8 × 03 = 24   ...शादी की उम्र 8 × 04 = 32   ...बच्चों की ज़िम्मेदारी होना 8 × 05 = 40   ...खुशहाल परिवार 8 × 06 = 48   ...साँसारिक ज़िम्मेदारी और                  स्वास्थ्य के बिगड़ने की शुरुआत 8 × 07 = 56   ...बुढ़ापे की शुरुआत,                  रिटायरमेन्ट की तैयारी और                  वसीयत लिख डालने का समय 8 × 08 = 64   ...रिटायरमेन्ट के बाद कम से कम                 तनाव में रहने का प्रयास और                 सेहत का ख्याल रखना 8 × 09 = 72   ...रोग और स्वास्थ्य सम्बन्धी            ...

कुछ माता-पिता बड़े समझदार होते हैं

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 कुछ माता-पिता बड़े समझदार होते हैं ! वे अपने बच्चों को किसी की भी मंगनी, विवाह, लगन, शवयात्रा, उठावना, तेरहवीं (पगड़ी) जैसे अवसरों पर नहीं भेजते,  इसलिए की उनकी पढ़ाई में बाधा न हो! उनके बच्चे किसी रिश्तेदार के यहां आते-जाते नहीं, न ही किसी का घर आना-जाना पसंद करते हैं। वे हर उस काम से उन्हें से बचाते हैं . .  जहां उनका समय नष्ट होता हो !"  उनके माता-पिता उनके करियर और व्यक्तित्व निर्माण को लेकर बहुत सजग रहते हैं !  वे बच्चे सख्त पाबंदी मे जीते हैं!दिन भर पढ़ाई करते हैं,  महंगी कोचिंग जाते हैं, अनहेल्दी फूड नहीं खाते,  नींद तोड़कर सुबह जल्दी साइकिलिंग या स्विमिंग को जाते हैं, महंगी कारें, गैजेट्स और क्लोदिंग सीख जाते हैं, क्योंकि देर-सवेर उन्हें अमीरों की लाइफ स्टाइल जीना है ! फिर वे बच्चे औसत प्रतिभा के हों या होशियार, उनका अच्छा करियर बन ही जाता है, क्योंकि स्कूल से निकलते ही उन्हें बड़े शहरों के महंगे कॉलेजों में भेज दिया जाता है,जहां जैसे-तैसे उनकी पढ़ाई भी हो जाती है और प्लेसमेंट भी।  अब वह बच्चे बड़े शहरों में रहते हैं और छोटे शहरों को हिकार...

भ्रम

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 एक बार एक टीवी इंटरव्यू में अभिनेता धर्मेंद्र से पूछा गया कि आपको क़भी भी फिल्म अमर अकबर एंथनी छोड़ने का अफसोस होता है क्योंकि वो एक सुपर डुपर हिट फिल्म बन गई थी ?  धर्मेंद्र ने जवाब में मुस्कुराते हुए कहा कि अगर मैंने वो फ़िल्म कर भी ली होती तो अपने जीवन में और क्या बन गया होता, जो अभी नहीं हूं ! ऐसा ही सवाल एक्टर पीयूष मिश्रा से एक इंटरव्यू में पूछा गया कि सुना है सूरज बड़जात्या आपको मैंने प्यार किया में हीरो लेना चाहते थे, आपने मना कर दिया और रोल सलमान खान को मिल गया और वो कहां से कहां पहुंच गए, कभी आपको इसका अफसोस होता है?   पीयूष का जवाब बहुत शानदार था ...उन्होंने कहा तब कर लिया होता तो शायद अब जो कर रहा हूं, वो ना कर पाता, इसलिए अभी ज्यादा खुश हूं.  दोनों जवाब में एक बात कॉमन है कि हर काम, हर खिताब, हर पुरस्कार आप नहीं ले सकते. सब आप ही समेट लें इसका लालच मत कीजिए । जीवन में सभी को किसी न किसी बात का दुख रहेगा ही क्योंकि....जिंदगी की कोई अंतिम मंजिल नहीं होती... इसलिए किसी आखिरी जीत या अंतिम लक्ष्य के लिए जीना भ्रम है....। जीवन एक खेल है, बस फर्क है कि इसमे...

गौरैया

“इतनी दूर जाना ज़रूरी है क्या? और फिर कितना तो खर्चा हो जाएगा। पापा पे इतना बोझ डालना ठीक नहीं है। पहले ही पढ़ाई के खर्चे पे रिश्तेदार सुना देते हैं कि इतने में तो शादी हो जाती।”  “तो ये सब तो ऐप्लिकेशन डालने के पहले सोचना था ना? और स्कॉलरशिप मिल तो रही है। खर्चा तो पहले से कम ही है। और इतनी चिंता है, तो वहाँ रोज़मर्रा के खर्चे कम कर लेना।” शांत भाव से कपड़े समेटती माँ ने कहा।  “वो तो खैर मैं कुछ नौकरी भी कर लूँगी। लेकिन इतना दूर!! सब लोग क्या बोलेंगे।” मैं अभी भी आशंकित थी।  “डर लग रहा है?” माँ अब मुस्कुरा रही थी।  “मेरी छोड़ो! तुम्हें नहीं लग रहा? इतनी दूर जा के बिगड़ गई मैं तो? और फिर सारी माएँ तो बच्चों को पास रखना चाहती हैं। सुना नहीं था मिश्रा आंटी क्या कह रही थीं चौहान आंटी के बारे में? कि एक भी बच्चा पास नहीं है! क्या मतलब ऐसी औलाद का!”  अब तक माँ के कपड़े भी समेटे जा चुके थे, और चेहरे पे आई सलवटें भी। मेरे सामने बैठ के बहुत धीर गम्भीर शब्दों में माँ ने कहा, “ध्यान से सुनो! सौ लोगों और हज़ार परिस्थितियों पे शक करने से आसान है एक इंसान पे यक़ीन करना। और म...

TYPES OF PEOPLE

 THE 3 TYPES OF PEOPLE IN YOUR LIFE..  1. The Leaf people 2. The Branch people 3. The Root people LEAF PEOPLE: These are people who come into your life just for a season. You can't depend on them because they are weak. They only come to take what they want, but if the wind comes they will leave. You need to be careful of these people because they love you when things are okay, but when the wind comes they will leave you 🥺 BRANCH PEOPLE: They are strong, but you need to be careful with them too. They break away when life becomes tough and they can't handle too much weight. They may stay with you in some seasons, but they will go when it becomes harder 😢 ROOT PEOPLE: These people are very important because they don't do things to be seen. They are supportive even if you go through a difficult time they will water you and they are not moved by your position they just love you like that ... It's not all people you meet or are your friends, that will stay with you. Only th...

बैटर ऑप्शन

 अभी कुछ दिन पहले मैं दिल्ली किसी काम से गया था,रात का खाना खाने के लिए एक ढाबे पर गया। एक वेटर आया और मैंने उससे कहा  हाफ दाल 3 रोटी 1 प्लेट सलाद एक कटोरी सफेद मक्खन ....और आखिर में खीर "आपका क्या नाम है ? " मैंने सामने खड़े नवयुवक से पूछा।  "हमारा नाम आकास है।" उसने फट से जवाब दिया।  यहां के ढाबों पर अधिकतर कर्मचारी बिहारी हैं।  नवयुवक का आका"श" को आका"स" कहना मुझे खला नहीं।  लड़का टिप टॉप था। सधी हुई कद काठी। तेल से चुपड़े कंघी किए हुए बाल।  सबसे बड़ी बात उसके जूते चमक रहे थे। लग रहा था की पालिश किए गए हैं।  कुछ ही समय बाद वह वापिस आया। बोला ....." सर। डोंट माइंड। एक बैटर ऑप्शन है।"  मैं एक क्षण ....... अवाक रह गया।  डोंट माइंड .......बैटर ऑप्शन......मेरे समाने ढाबे का एक वेटर खड़ा था या किसी मैनेजमेंट इंस्टिट्यूट से एम बी ए मेनेजर खड़ा था।  शक्ल देख कर तो लग ना रहा था की ऊन्ने अंग्रेजी का ए भी आता होगा।  मैं हतप्रभ था।  " क्या बैटर ऑप्शन है सर।" मैंने व्यंगतामक लहजे में पूछा।  लडके ने मेन्यू कार्ड उठाया। बोला .......

इस मजदूरी का हिसाब भगवान रखते हैं

  अस्पताल में एक कोरोना पेशेंट का केस आया ।मरीज बेहद सीरियस था । अस्पताल के मालिक डॉक्टर ने तत्काल खुद जाकर आईसीयू में केस की जांच की।   डॉक्टर बाहर आया और अपने स्टाफ को कहा कि इस व्यक्ति को किसी प्रकार की कमी या तकलीफ ना हो और उससे इलाज व दवा के पैसे न लेने के लिए भी कहा । मरीज तकरीबन 15 दिन तक मरीज अस्पताल में रहा।  जब बिल्कुल ठीक हो गया और उसको डिस्चार्ज करने का दिन आया तो उस मरीज का तकरीबन ढाई लाख रुपये का बिल अस्पताल के मालिक और डॉक्टर की टेबल पर आया। डॉक्टर ने अपने अकाउंट मैनेजर को बुला करके कहा ... "इस व्यक्ति से एक पैसा भी नहीं लेना है। ऐसा करो कि तुम उस मरीज को लेकर मेरे चेंबर में आओ। "मरीज व्हीलचेयर पर चेंबर में लाया गया। डॉक्टर ने मरीज से पूछा - "भाई ! क्या आप मुझे पहचानते हो?" मरीज ने कहा "लगता तो है कि मैंने आपको कहीं देखा है।" डॉक्टर ने कहा ..."याद करो, अंदाजन दो साल पहले सूर्यास्त के समय शहर से दूर उस जंगल में तुमने एक गाड़ी ठीक की थी। उस रोज मैं परिवार सहित पिकनिक मनाकर लौट रहा था कि अचानक कार में से धुआं निकलने लगा और गाड़ी बंद हो गई। ...

सरलता से प्रभु मिलते हैं

बहुत साल पहले की बात है। एक आलसी लेकिन भोलाभाला युवक था आनंद।  . दिन भर कोई काम नहीं करता बस खाता ही रहता और सोए रहता। घर वालों ने कहा चलो जाओ निकलो घर से, कोई काम धाम करते नहीं हो बस पड़े रहते हो।  . वह घर से निकल कर यूं ही भटकते हुए एक आश्रम पहुंचा। वहां उसने देखा कि एक गुरुजी हैं उनके शिष्य कोई काम नहीं करते बस मंदिर की पूजा करते हैं। . उसने मन में सोचा यह बढ़िया है कोई काम धाम नहीं बस पूजा ही तो करना है। गुरुजी के पास जाकर पूछा, क्या मैं यहां रह सकता हूं, गुरुजी बोले हां, हां क्यों नहीं ? . लेकिन मैं कोई काम नहीं कर सकता हूं . गुरुजी : कोई काम नहीं करना है बस पूजा करना होगी . आनंद : ठीक है वह तो मैं कर लूंगा ... . अब आनंद महाराज आश्रम में रहने लगे। ना कोई काम ना कोई धाम बस सारा दिन खाते रहो और प्रभु मक्ति में भजन गाते रहो। . महीना भर हो गया फिर एक दिन आई एकादशी। उसने रसोई में जाकर देखा खाने की कोई तैयारी नहीं। उसने गुरुजी से पूछा आज खाना नहीं बनेगा क्या . गुरुजी ने कहा नहीं आज तो एकादशी है तुम्हारा भी उपवास है । . उसने कहा नहीं अगर हमने उपवास कर लिया तो कल का दिन ही नहीं द...

मार्कशीट

 ।बच्चों पर हमेशा आदर्श संतान बनने का दबाव होता है । काश इस बात पर भी जोर दिया जाता कि आदर्श "माता-पिता" कैसे बने तो हम बेहतर नागरिकों से घिरे होते । माता पिता बड़ी चतुराई से कहते है कि हमने बच्चें पर पढ़ाई का कोई दबाव नही बनाया । यदि आप बच्चों के साथ हर समय उसके सिलेबस, टीचर्स, क्लास के काम्पटीटर बच्चों, उनकी ट्यूशन में किये इन्वेस्टमेंट , टेस्ट के टॉपर बच्चें के परसेंटेज, सलेक्शन लिस्ट पर बात करते हो तो ये भी प्रकार का स्मार्ट साइकोलॉजिकल प्रेशर है । कोई भी माता पिता  बच्चें को मारपीट कर प्रेशर नही बनाते । "तुम लोगों को हमने इतनी फेसिलिटी दी है । हमारे समय पढ़ाई पर इतना खर्च ही नही किया गया । हम कंजूसी से रहकर तुम्हारी इतनी महंगी फीस पटा रहे है । बस तुम फ़ला टेस्ट क्लियर कर लो तो सब सही हो जाएगा।" पेरेंट्स के लिए बच्चों की मेंटल हेल्थ कोई इश्यू ही नही है । माना कि नम्बरों के दबाव की मानसिक यंत्रणा से गुजरने वाला हर बच्चा सोसाइड नही करता मगर उसमें इतनी हीनता बोध आ ही जाती है कि वो खुद के अस्तित्व का आकलन नम्बर से ही करता है । नम्बर के आधार पर खुद को कमतर मान लेने वाला ...

For yugantika

 दिल्ली की एक महिला हैं । कभी किसी जमाने में Typical Housewife हुआ करती थीं । फिर जब बच्चे बड़े हो गए और घर की रोजमर्रा की जिम्मेवारियों से कुछ फुरसत हुईं तो उन्होंने जिंदगी में Gear change किया । उनके बिजनीस मैन पति ने उनके 40th बड्डे पे उनको एक नई नकोर Royal Enfield Meteor 350CC गिफ्ट की ...... और बोले ...... जा सिमरन, जी ले अपनी जिंदगी । सिमरन ने उस Bike पे Ride करना शुरू किया । शुरू में लोकल Riding clubs में मर्दों के साथ One day Rides, Breakfast Rides पे जाना शुरू किया । फिर लंबी Rides पे जाने लगीं । Riding शुरू करने के एक साल के भीतर उन्होंने Solo K2K2K किया । K2K मने कश्मीर to कन्याकुमारी  तो अपनी सिमरन पहले दिल्ली से कश्मीर गई वहां से कन्याकुमारी करके वापस दिल्ली आई । एक अकेली भारतीय घरेलू महिला के लिए ये 7000km की ride अचंभित करने वाली है । उसके बाद अगले दो सालों में अपनी सिमरन ने अपनी उस Bike पे पूरा India नाप दिया है । जहां ग्रुप मिल जाए वहां ग्रुप , नही तो Solo Ride करती हैं। Social media पे काफी एक्टिव हैं । रोजाना अपनी Rides की pics , posts , Reels , Shorts अपनी ...