विधि_का_विधान_निश्चित_है
✍️ महाभारत युद्ध में अर्जुन पुत्र अभिमन्यु जिस समय वीरगति को प्राप्त हुए, उनकी पत्नी उत्तरा गर्भवती थी। उनके गर्भ से राजा परीक्षित का जन्म हुआ...जो महाभारत युद्ध के बाद हस्तिनापुर की गद्दी पर बैठे....जन्मेजय राजा परीक्षित के पुत्र थे। एक दिन जन्मेजय ने वेदव्यास से कुतर्क किया। जहां आप थे ,भगवान श्रीकृष्ण थे, भीष्म, द्रोणाचार्य, धर्मराज युधिष्ठिर, जैसे महान लोग उपस्थित थे। फिर भी आप महाभारत के युद्ध को होने से नहीं रोक पाए और देखते-देखते अपार जन धन की हानि हो गई। यदि मैं उस समय रहा होता तो, अपने पुरुषार्थ से इस विनाश को होने से बचा लेता। अहंकार से भरे जन्मेजय के शब्द थे, फिर भी व्यास जी शांत रहे...उन्होंने कहा, पुत्र अपने पूर्वजों की क्षमता पर शंका न करो। यह विधि द्वारा निश्चित था,जो बदला नहीं जा सकता था, यदि ऐसा हो सकता तो श्रीकृष्ण में ही इतना सामर्थ्य था कि वे युद्ध को रोक सकते थे। जन्मेजय अपनी बात पर अड़ा रहा। बोला मैं इस सिद्धांत को नहीं मानता.... आप मेरे जीवन की होने वाली किसी होनी को बताइए।....मैं उसे रोककर प्रमाणित कर दूंगा कि विधि का विधान निश्चित नहीं ह...