खुशी


 ज़िन्दगी ऐसी ही है, कोई एक फूल से बेइंतहा खुश है । कोई बेइंतहा फूलों के बीच मायूस है । यह तो हम रोज़ देखते हैं । कोई अपनी मामूली सी तनख्वाह में सादी सी ज़िन्दगी में दिल खोलकर खुश रह लेता है । कोई बहुत बड़े पैकेज,आलीशान घर और क्लास की ज़िन्दगी के बाद भी बुझा बुझा रहता है ।


किसी को कोई पलट कर पलक उठाकर भी देख ले,तो वह पूरा दिन खुश रहता है । कोई है कि दिन रात साथ रहने पर भी खुश नही । तो यह खुशी है क्या,किस बाज़ार की चीज़ है । इसकी क़ीमत क्या है । कौन है जो खुशी को बनाता है । इसके कारीगर किस देस में रहते हैं । इसका पता मालूम करते करते जिंदगियां ख़त्म हो गईं ।


मैं भी सोचता हूँ कि यह खुशी है क्या चीज़ । जो भयंकर तपिश में मुस्कुरा देती है । अक्सर बहते हुए आंसुओ के साथ होंठों पर छपाक से कभी बिखर जाती है । कभी तो होंठ,आंख और चेहरे की जिल्द भी पता नही देती मगर लोग अंदर ही अंदर खुश होते हैं ।


मेरे लिए खुशी की परिभाषा बता पाना उतना ही मुश्किल है, जितना खुशी की एक वजह को समझ पाना । कोई दहकते अंगारे पर भुट्टा सेकते हुए खुश है तो कोई एसी में नरम बिस्तर पर चाय और तमाम दिलचस्पी के सामान चीज़ों के सामने भी बुझा बुझा है ।


क्या अजीब चीज़ है खुशी । जिसे हासिल है, उसे उसकी क़दर नही । जिसे चाहिए,उसके पास उसकी हर क़ीमत सिफर है ।


एक लड़के को भागकर अपनी प्रेमिका से शादी करने में जो खुशी है । वह ज़माने भर की दौलत खर्च करके की गई शादी से ज़्यादा बड़ी है । खुशी तराज़ू से परे है । तौल,नाप,वज़न से अलग है । इसका पैमाना ही नही है ।


बात बस इतनी है, यह आपके है । दूसरे के अंदर तलाशेंगे, तो भूलभुलैया है । अपने अंदर तलाशेंगे,तो सामने ही रखी है । ठीक वैसे जैसे तस्वीर में दो शय हैं, एक ने अपने अंदर पा ली है तो एक कली में ही पांव थिरक उठे । जो नही पाया है, वह अधखिली कलियों के बाग़ में भी मुरझाया बैठा है...


मुझे मेरी खुशी का पता है, तुम्हे तुम्हारी खुशी का पता मिले, बस इतनी सी दुआ है...

Comments

Popular posts from this blog

मेरे बेटे

"कच्ची नीम की निम्बौरी सावन जल्दी अईयो रे.........''

ऐसे तो नहीं चलेगा न।