सावन आने से पहले ही मेरी आंखें सावन बन गई है 


अपने जीवन में जो सपना देखा था 

वो सिर्फ सपना ही बनकर रह गई है 

ऐसा दर्द मिली जिसे मैं साझा न कर सका 

सावन आने से पहले ही मेरी आंखें सावन बन गई है।

छोटे से बड़े और फिर बूढ़े होने के सफर में 

कितने ही रिश्ते नाते तोड़ जाते है हम

मन में उठी तर्क वितर्क ने मुझे घायल कर दिया 

सावन आने से पहले ही मेरी आंखें सावन बन गई है ।

कभी हुआ करती थी वास्तविक मुस्कुराना

वो दिन न जाने अब कहां खो गया 

जीतने की अंधी दौड़ में हार रही है इंसानियत

सावन आने से पहले ही मेरी आंखें सावन बन गई है।

ये जिंदगी तू मुझे बस इतना ही बता दें 

और कितने रंग दिखायेगी जीवन में 

वर्तमान का दौड़ बड़ा विचित्र है 

सावन आने से पहले ही मेरी आंखें सावन बन गई है।

मत करना ऐसी कोई भी आस सज्जनों

जिसे तुम कभी पा न सकों 

मेहनत छोड़ लोग चापलूसी में लगे हुए है 

सावन आने से पहले ही मेरी आंखें सावन बन गई है।

स्वयंभू भगवान बनने की कोशिश में 

आज कितना बदल रहा है इंसान

सभी के दिल में पल रहें है नफरत के बीज

सावन आने से पहले ही मेरी आंखें सावन बन गई है।




Comments

Popular posts from this blog

मेरे बेटे

नया युग(कविता)

"कच्ची नीम की निम्बौरी सावन जल्दी अईयो रे.........''