अम्मा

 

अम्मा इसलिए अम्मा नहीं है,कि उसे दुनियाभर की खटास व कड़वाहटों के चटकारे याद हैं, बल्कि अम्मा इसलिए अम्मा है, क्योंकि किसी फंक्शन में जब हमें अपनी महंगी ड्रेस की फ़िक्र रहती है,तब अम्मा को एकटक पल्लू का ध्यान रहता है, ताकि पल्लू गिरते ही संस्कार धम्म से ज़मीन पर ना बिखर जाएं।

बहुत से फंक्शनों में अम्मा किसी कोने में बैठकर संस्कारों की सांसे सहेजती दिख जाती है।



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