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Showing posts from September, 2024

जीवन

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 जीना भूल गए हैं हम.. कई हिस्सों में बंट गए हैं खुद को क्या क्या सिखा रहे हैं। ये रिश्तों की ज़िम्मेदारी साहब हम किश्तों में निभा रहे हैं।। आठों पहर है दौड़ भाग झूले सा झूल गए हैं हम। न जाने क्या पाने में जीना भूल गए हैं हम।। इक गुब्बारे की खातिर हम जब दिन भर रोते थे। ये बात है उस दौर की जब हम बच्चे थे छोटे थे।। अब सब कहते हैं हम बड़े हो गए। अपने पैरों पर खड़े हो गए।। लेकर बस्ता खुद से बड़ा जब से स्कूल गए हैं हम। न जाने क्या पाने में जीना भूल गए हैं हम।। इस भागते हुए जीवन में रफ्तार की राहें ठानी है। मंज़िल का कुछ भी पता नही बस सफर से खींचातानी है।। ये सेल्फी वाली मुस्कान भला कब तक ठहरेगी चेहरों पर। तूफ़ान उठा है मन के भीतर हम तैर रहे हैं लहरों पर।। खाली अंतर्मन की शाम लिए थक कर फूल गए हैं हम। न जाने क्या पाने में जीना भूल गए हैं हम।। वक्त की रफ्तार से हम मनुष्य कदम मिलाने के लिए निरंतर प्रयासरत हैं। ऐसे में जीवन तो चल रहा है किंतु जीवन को जीने की जो अनुभूति है वह कोने में खड़ी बेबस झांक रही है।   अंकित

So what are the odds that you are not sleeping while reading this post?

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 विचार बेहद शक्तिशाली होते हैं। एक बार अवचेतन में कोई विचार उत्पन्न हो जाये, तो भले ही कितना भी सही हो अथवा गलत, व्यक्ति की नियति बदलने की पूरी क्षमता रखता है। क्रिस्टोफर नोलान द्वारा निर्देशित और प्राइम तथा नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध फ़िल्म "Inception" कहानी है - व्यक्ति के स्वप्न के माध्यम से उसके अवचेतन में पहुंच कर उसके विचारों से खेलने की।  . किसी मिलिट्री प्रोग्राम के तहत विकसित की गई सपनों में उतरने की इस तकनीक का कॉब डॉम (लियोनार्दो दिकोप्रियो) बड़ा खिलाड़ी है। उसे साइटो नामक एक बिज़नेस टायकून से एक प्रपोजल आता है, जिसके तहत उसे साइटो के व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी के बेटे (किलियन मर्फी) के अवचेतन में एक विचार इम्प्लांट करना है - जिससे मर्फी अपने पिता की व्यापारिक विरासत को बिखेर दे और साइटो ऊर्जा क्षेत्र का एकलौता बादशाह बन जाये। डॉम को अपने घर जाना है, अपने बच्चों से मिलना है पर उस पर कुछ चार्जेज होने के कारण वह अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सकता। पर इस काम के एवज में साइटो डॉम की सभी परेशानियां हल कर सकता है इसलिए डॉम अपनी टीम के साथ इस असाध्य कार्य के लिए राजी हो जाता है।  . ऐ...

झकझक

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 कल रात यूँ ही प्राइम स्क्रॉल करते हुए एक फ़िल्म सामने आ गयी - 3000 Years of Longing - निर्देशक के नाम पर नजर पड़ी तो देखा - जार्ज मिलर साहब हैं, जिन्होंने Mad Max - Fury Road जैसी धाकड़ फ़िल्म बनाई थी। बिना सोचे-समझे फ़िल्म को मैंने चला दिया। फ़िल्म एक बार देखने लायक है और बच्चों के लिए नहीं है।  . कहानी में एक स्टोरीटेलर अधेड़ स्त्री "अलिथिया" है, जो किसी कार्यक्रम हेतु इस्तांबुल जाती है। वहाँ से सुवेनियर के तौर पर एक प्राचीन आर्टिफैक्ट खरीदती है, जो वास्तव में जिन्न वाला चिराग होता है। होटल रूम में उस चिराग के टूट जाने पर जिन्न (इदरीस अल्बा) प्रकट होता है, जो अलिथिया की तीन ख्वाहिशें पूरी करना चाहता है।  . अलिथिया उसके हिसाब से बेहद सन्तोषी जीव है। उसे कुछ चाहिए ही नहीं। जिन्न जिद पर है कि इच्छा बताओ क्योंकि पूर्व में चिराग के मालिकों की इच्छा न बता पाने के कारण उसे बड़ी समस्याओं का सामना करना पड़ा है। अलिथिया और जिन्न आपस में सहमत तो नहीं हैं, पर एक चीज दोनों को बेहद पसंद है - किस्से कहानियां सुनना और सुनाना। तो अलिथिया सोच-विचार करने को समय मांगती है। इस बीच जिन्न उसे अपनी कह...

अजीनोमोटो

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अजीनोमोटो को हम इसके रासायनिक  नाम मोनो सोडियम ग्लूटामेट के नाम से भी जानते है !  इसको संक्षिप्त में हम एमएसजी नाम से भी जानते है. .. अजीनोमोटो की कंपनी का मुख्य कार्यालय चोओ,  टोक्यो में स्थित है !  • यह 26 देशों में काम करता है.  इसका इस्तेमाल ज्यादातर चीन की खाद्य पदार्थो में  खाने के स्वाद को बढ़ाने के लिए किया जाता है. ..  👉 पहले हम अधिकांशतः घर पर बने खाने को खाते थे, लेकिन अब लोग चिप्स, पिज्ज़ा और मैगी जैसे खाने को ज्यादा पसंद करने लगे हैं ! जिनमे अजीनोमोटो का इस्तेमाल होता है। इसका इस्तेमाल कई डिब्बाबंद फ़ास्ट फ़ूड सोया सॉस, टोमेटो सॉस, संरक्षित मछली जैसे सभी संरक्षित खाद्य उत्पादों में किया जाता है.    👉अजीनोमोटो को पहली बार 1909 में जापानी जैव रसायनज्ञ किकुनाए इकेडा के द्वारा खोजा गया था। उन्होने इसके स्वाद को मामी के रूप में पहचाना जिसका अर्थ होता है   👉 सुखद स्वाद.  कई जापानी सूप में इसका इस्तेमाल होता है। इसका स्वाद थोडा नमक के जैसा होता है. देखने में यह चमकीले छोटे क्रिस्टल के जैसा होता है। इसमें प्राकृतिक रूप से एमिनो...

आत्मनिर्भर

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 सुरेश और सीमा एक निजी कंपनी में काम करते थे। दोनों को ईश्वर की कृपा से दो प्यारे बच्चे मिले थे—बेटी आरू, जो 12 साल की थी, और बेटा चिंटू, जो 9 साल का था। उनका जीवन सामान्य चल रहा था, लेकिन जैसे-जैसे समय बीतता गया, परिवार में थोड़ी दरारें आने लगीं। सुरेश के माता-पिता उनके साथ ही रहते थे। पहले सबकुछ ठीक था, लेकिन धीरे-धीरे, सीमा को सास-ससुर की छोटी-छोटी बातों पर टोका-टोकी परेशान करने लगी। सीमा की सोच थी कि वह खुद पढ़ी-लिखी, आत्मनिर्भर महिला है और उसे किसी की दखलअंदाजी पसंद नहीं। शुरू में उसने ये बातें सुरेश को बताईं, पर सुरेश के माता-पिता उसे हमेशा सही सलाह देने की कोशिश करते। एक दिन सास-ससुर से बहस इतनी बढ़ गई कि सीमा ने अलग घर में रहने का निर्णय लिया। सुरेश के माता-पिता ने भी अपने बेटे को मुश्किल में न डालते हुए कहा, "तुम्हारी खुशी में हमारी खुशी है। अगर तुम अलग रहना चाहते हो तो हम पीछे नहीं हटेंगे।" और इस तरह सुरेश और सीमा अपने नए मकान में शिफ्ट हो गए। अब जब वे अलग रहने लगे, सीमा को शुरू में बहुत अच्छा लगा। उसे लगा कि अब कोई भी उसकी निजी जिंदगी में हस्तक्षेप नहीं करेगा। लेक...
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 मेहमान क्यों नहीं आते ,,, ? एक वक्त था,जब मेहमान दो दो ,तीन तीन महीने घर में रह कर जाते थे, अब वो मेहमान क्यों नहीं आते ,,,! सोच सिकुड़ गई , रिश्ते बिगड़ गए ,लोग खुदगर्ज हो गए,, भाई भाई का नहीं , बहन बहन की नहीं ,,,  क्या इसे तरक्की कहते हैं , मेरी समझ में तो ऐसी तरक्की नहीं आती ।। कहते हैं ___ " मेहमान भगवान होता ,, यह हकीकत है कि मेहमान के साथ घर में बरकत आती है , और मेहमान अपने पैरों के साथ घर की परेशानियां ले जाता है ।" इतना अच्छा होने पर भी लोग मेहमान के आने से परेशान होते हैं । सोच बदलिए और रिश्तों की कद्र कीजिए ,,,,किसी को नहीं पता कौन कब आख़िरी सांस ले ले । किसी के जाने के बाद आंसू बहाने से अच्छा है उससे मिला करिए ,, कुछ खट्टे मीठे ख्याल आपस में बांटा कीजिए ,, हँसा कीजिए ,,, स्वागत कीजिए मेहमान का ,,,,, नही आते तो उन्हें दावत देकर बुलाइए ,,, फिर देखिए ,,,खुशियां ही खुशियां आपके आस पास रहेंगी

पद में क्या रखा है

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 बड़े पद पर जो पहुंच जाते हैं, वे अक्सर विनम्रता दिखाने लगते हैं। तुमने अक्सर देखा होगा--छोटे पद पर लोग ज्यादा उपद्रवी होते हैं। बड़े पद पर लोग कम उपद्रवी हो जाते हैं। क्योंकि अब प्रतिष्ठा हो ही गयी; अब यह मजा भी ले लो साथ में कि हम प्रतिष्ठा से भी मुक्त हैं। हमें यश का कोई लेना-देना नहीं है। तुमने देखा, पुलिस वाला ज्यादा झंझट खड़ी करता है। इंस्पेक्टर थोड़ी कम। पुलिस कमिश्नर और थोड़ी कम। जितने बड़े पद पर होता है आदमी, उतनी कम झंझट करता है। मैंने सुना है : एक अंधा भिखारी राह पर बैठा है। रात है। और राजा और उसके कुछ साथी राह भूल गए है। वे शिकार करने गए थे। उस गांव से गुजर रहे हैं। कोई और तो नहीं है, वह अंधा बैठा है झाड़ के नीचे; अपना एकतारा बजा रहा है। और अंधे के पास उसका एक शिष्य बैठा है। वह उससे एकतारा सीखता है, वह भी संन्यास की मंगल-वेला भिखारी है। दोनों भिखारी हैं। राजा आया और उसने कहा : सूरदास जी! फलां-फलां गांव का रास्ता कहा से जाएगा? फिर वजीर आया और उसने कहा : अंधे! फलां-फलां गांव का रास्ता कहां से जाता है? अंधे ने दोनों को रास्ता बता दिया। पीछे से सिपाही आया; उसने एक रपट लगायी अंधे...

मुसाफ़िर

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 ऊपर वाले ने मुसाफ़िर भेजे। मुसाफ़िरों ने सराय को ठौर मान लिया । ऊपर वाले ने मंच पर कठपुतलियाँ उतारी। कठपुतलियों ने गति को अपनी ताकत माना । भूल गई कि डोर खींचते ही कभी भी खेल खत्म किया जा सकता है ।  ऊपर वाले ने मल्लाहों को दरिया में उतारा । मल्लाह भूल गए कश्ती का लंगर किसी और के हाथ है ।  गजब ये है कि हर रोज कठपुतलियाँ डोर टूटती देख रही है , मल्लाह कश्ती डूबती देख रहे है , मुसाफ़िर सरायखाने से लोगों को जाते देख रहे मगर वे भूल जाते है कि किसी भी समय उनके खेल समाप्ति की घण्टी बज सकती है । हम सब एक दूसरे से हँसकर मिलते है ,बातें करते है ,पिक्स खिंचवाते है। मगर ये बात कोई नही जान पाता है कि भीड़ में किसी के भीतर कितना अकेलापन है । किस बेमनी से कोई कितना झूठा मुस्कुरा रहा है । ईश्वर की दी जिंदगी में दर्द, बिछोह , सपनों और रिश्तों के टूटने का दर्द जीवन के आखरी दिनों तक हमें मिलता रहेगा ।  सबके जीवन में बुरा समय आता है ...बीत भी जाता है.। नई खुशियों पर लोग फिर से धीरे धीरे मुस्काना सीखते है । जिंदगी है.. आगे बढ़ेगी ही । लंबे चले उस बुरे समय की मोबाइल की गैलरी में अपनी ही कि...

क्यों कुबूल है ?

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  सातारा के जंगलों के एक वीरान खंडहर की अंधेरी , तूफानी ,तेज़ बारिश और कड़कड़ाती बिजली से थर्राती रात, जिसमें मस्तानी की जिंदगी कुछ ऐसे ठहर गई है कि भोर की कोई सूरत दूर तक नज़र नहीं आ रही है. ऐसे में निराश दासी मस्तानी से निवेदन करती हुई कहती है कि "लगता नहीं कि तूफान थमेगा .चलिए वापिस चलते हैं बुंदेलखंड और वैसे भी यहां आकर हमें क्या मिला है? पूना गए तो नाचने वालियों के बीच रखा| सातारा में महल के बदले नदी पार यहां रखा है, इस खंडहर में डर लगता है बाई सा , आपने जिनकी कटार से ब्याह किया है वो तो इस रिवाज़ से अंजान हैं और अगर उन्होंने ये रिश्ता कुबूल करने से इंकार कर दिया तो?" मस्तानी इस सवाल पर ज़रा भी विचलित नहीं होती क्योंकि उसे अपने प्रेम की ताकत पर विश्वास है. उसी विश्वास के चलते वे स्वयं ही से शर्त लगा कर कहती हैं कि "हम भी तो देखें अपने इश्क का असर !" और मस्तानी की खुशनसीबी तो देखिए कि तभी अचानक वे शर्त जीत भी जाती हैं जब उन्हें अपने इसी इश्क का असर सामने से आते पेशवा बाजीराव के रूप में दिखाई देता है जब वे इस अंधेरी ,तूफानी रात में उफनती नदी को अपने हौसलों से म...

बिजनेस हो या नौकरी

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  सफल वही हो सकता है,जो प्रोफेशनल हो, इमोशनल व्यक्ति अमूमन असफल हो जाता है अथवा उसे धोखा खाकर पछताना पड़ता है। धंधे अथवा नौकरी में रिश्ते/दोस्ती और व्यवहार/लेन-देन का परस्पर घालमेल कदापि नहीं करना चाहिए अर्थात् रिश्ता/दोस्ती अपनी जगह है, और व्यवहार/लेन-देन अपनी जगह।  मैं इस मामले में अपने एक वरिष्ठ मित्र को अपना आदर्श मानता हूॅं, जो हमेशा कहता है कि चाहे कोई कितना भी घनिष्ठ हो,उसके साथ काम शुरू करने से पहले वेतन तय करो और महीना पूरा होते ही अधिकतम पाॅंच दिन के अंदर मजदूरी ले लो,वरना छठे दिन यह कह दो कि रिचार्ज ख़त्म हो गया है और बिना रिचार्ज मशीन काम नहीं करती। हालाॅंकि विश्वास पर दुनिया टिकी है और अपणायत में एक- दूसरे का विश्वास भी करना पड़ता है,मगर यह भी एक निश्चित सीमा तक ही उचित है, वरना कई बार वक्त के साथ हालात कुछ इस कदर बदलते हैं कि नीयत और रिश्तों के मायने दोनों ही बदल जाते हैं,तब अहसास होता है कि काश! इतना विश्वास न किया होता। समझदारी तो इसी में है कि दोस्ती/ रिश्ते को बरकरार रखते हुए भी लेन-देन/व्यवहार के मामले में स्टैंड क्लीयर रखना चाहिए और यही दोनों पक्षों के हित...

चाचा चौधरी

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 ‘शतरंज चैंपियन गैरी कास्पारोव एक कंप्यूटर से हार गए’ नब्बे के दशक की यह एक बड़ी खबर थी। इसका एक अर्थ यह था कि कंप्यूटर इतने शक्तिशाली हो गए कि मनुष्य के दिमाग पर विजय पाने लगे। आइबीएम कंपनी के कंप्यूटर ‘डीप ब्लू’ ने जब पहली बार 1996 में यह मैच खेला, तो पहले ही खेल में उन्हें मात दी। लेकिन उसके बाद हुए पाँच खेलों में चार कास्पारोव जीत गए।  अगले वर्ष ‘डीप ब्लू’ पूरी तैयारी के साथ आयी। न्यूयार्क के इस आयोजन पर पूरी दुनिया की नज़र थी। यह क़यास लग रहे थे कि कास्पारोव को हराना कंप्यूटर के बस नहीं। पहला मैच कास्पारोव आसानी से जीत गए, तो यह क़यास पक्का होने लगा। लेकिन अगले ही मैच में कास्पारोव को हार मिली। उसके बाद के तीन मैच ड्रॉ रहे। खेल अभी 2.5-2.5 की बराबरी पर था। छठा मैच निर्णायक था। कास्पारोव अब थक चुके थे। उन्हें यह लगने लगा था कि मशीन वाकई ठीक-ठीक ताक़तवर बन चुकी है। आखिर इस तनाव भरे खेल में कास्पारोव हार गए।  हालाँकि यह कंप्यूटर आम कंप्यूटरों से कई कदम आगे था। वरना साधारण कंप्यूटर को तो मेरे जैसे लोग भी अक्सर मात कर दिया करते थे। कास्पारोव को हराने के लिए दर्जनों कंप्यू...

सनातन कथा

 गैलीलियो ने कहा था कि न कोई सूर्यास्त होता है, न कोई सूर्योदय। धारणा यह थी कि सूरज चक्कर लगाता है पृथ्वी के। और गैलीलियो ने कहा कि पृथ्वी चक्कर लगाती है सूरज के। बात ही बदल दी। सारी दुनिया मानती थी एक बात और गैलीलियो ने लिखी दूसरी ही बात। महा निंदा हुई। कैथलिक पोप ने उसे रोम बुलाया और कहा, तुम माफी मांग लो। वह बूढ़ा हो चुका था--पचहत्तर साल का हो चुका था। बीमार था, बिस्तर से उसे घसीट कर लाया गया और कहा कि तुम क्षमा मांग लो, अन्यथा मरने के लिए तैयार हो जाओ। गैलीलियो बड़ा समझदार आदमी रहा होगा। बहुत कम लोगों ने उसकी समझदारी की प्रशंसा की है। लोग समझते हैं वह कायर था, क्योंकि उसने क्षमा मांग ली। मैं ऐसा नहीं समझता, क्योंकि क्षमा उसने इस ढंग से मांगी कि वह कायरता नहीं बताती। वह उस आदमी की समझदारी बताती है। और वह उस आदमी की इतनी गहरी समझदारी बताती है कि पोप और उनका पूरा का पूरा मंडल जो निर्णायक बना बैठा था, उसकी मूर्खता सिद्ध होती है। गैलीलियो ने कहा कि आप कहें तो अभी क्षमा मांग लूं। मुझे क्या अड़चन है! अरे, मुझे लेना-देना क्या! मैं लिख दूंगा अपनी किताब में कि पृथ्वी चक्कर नहीं लगाती, सूरज ...