चाचा चौधरी
‘शतरंज चैंपियन गैरी कास्पारोव एक कंप्यूटर से हार गए’
नब्बे के दशक की यह एक बड़ी खबर थी। इसका एक अर्थ यह था कि कंप्यूटर इतने शक्तिशाली हो गए कि मनुष्य के दिमाग पर विजय पाने लगे। आइबीएम कंपनी के कंप्यूटर ‘डीप ब्लू’ ने जब पहली बार 1996 में यह मैच खेला, तो पहले ही खेल में उन्हें मात दी। लेकिन उसके बाद हुए पाँच खेलों में चार कास्पारोव जीत गए।
अगले वर्ष ‘डीप ब्लू’ पूरी तैयारी के साथ आयी। न्यूयार्क के इस आयोजन पर पूरी दुनिया की नज़र थी। यह क़यास लग रहे थे कि कास्पारोव को हराना कंप्यूटर के बस नहीं। पहला मैच कास्पारोव आसानी से जीत गए, तो यह क़यास पक्का होने लगा। लेकिन अगले ही मैच में कास्पारोव को हार मिली। उसके बाद के तीन मैच ड्रॉ रहे। खेल अभी 2.5-2.5 की बराबरी पर था। छठा मैच निर्णायक था। कास्पारोव अब थक चुके थे। उन्हें यह लगने लगा था कि मशीन वाकई ठीक-ठीक ताक़तवर बन चुकी है। आखिर इस तनाव भरे खेल में कास्पारोव हार गए।
हालाँकि यह कंप्यूटर आम कंप्यूटरों से कई कदम आगे था। वरना साधारण कंप्यूटर को तो मेरे जैसे लोग भी अक्सर मात कर दिया करते थे। कास्पारोव को हराने के लिए दर्जनों कंप्यूटर की अक्षौहिणी सेना भेजनी पड़ी। डीप ब्लू कंप्यूटर में 32 कंप्यूटर प्रोसेसरों की ताक़त थी। यह एक तरह का सुपर-कंप्यूटर था।
आखिर ऐसा क्या है मनुष्य के दिमाग में, जो इसे हराने के लिए कई कंप्यूटर लगाने पड़े? दिमागी संरचना की थोड़ी बहुत जानकारी तो मुझे है, लेकिन कंप्यूटर की समझ के लिए मैंने एक मित्र से बात की। यूँ भी ऐसी बातचीत में अपना ज्ञान किनारे रखना ही समझदारी है।
“आम कंप्यूटर में एक केंद्रीय प्रक्रमण एकक या सीपीयू होता है। यही कंप्यूटर का दिमाग है। आप कोई इनपुट देते हैं, यह उसे प्रोसेस कर आउटपुट देता है।”, उन्होंने कहा
“हाँ! लेकिन कंप्यूटर की गति तो दिमाग से तेज़ है। यह कठिन गणनाएँ नैनो-सेकंड में कर लेता है, जो हमारा दिमाग नहीं कर पाता”
“यह गणनाएँ मनुष्य के दिमाग की क्षमता के समक्ष कुछ नहीं। मनुष्य तो छोड़िए बिल्ली का दिमाग भी कंप्यूटर से आगे है।”
“ऐसा आप कैसे कह सकते हैं?”
“मनुष्य का दिमाग कई चीजें एक साथ प्रोसेस कर सकता है। हमारे दिमाग के अंदर सैकड़ों ही नहीं, लाखों प्रोसेसर हैं। इनमें से कई एक साथ चल सकते हैं।”
“एक उदाहरण दें”
“उदाहरण तो घर-घर में हैं। एक महिला रसोई में खाना पकाते हुए पड़ोस की महिला से बात कर रही हैं। रेडियो पर बजता गीत सुन रही हैं। दूसरे कमरे में टेलीविजन चल रहा है। इस मध्य वह खिड़की से देखती हैं कि बादल घुमड़ने लगे हैं। वह छत पर सूख रहे कपड़े घर लाने के लिए आवाज देती हैं। इस मध्य एक बच्चा रोता हुआ आ जाता है…”
“यानी उनका दिमाग कई चीजें एक साथ प्रोसेस करता जा रहा है, जो आपके हिसाब से कंप्यूटर करने में समर्थ नहीं है?”
“एक कंप्यूटर को यह सब एक साथ करने के लिए कई प्रोसेसर, कई तरह के इनपुट और कई गुणा अधिक मेमरी लगेगी, जो उन महिला ने वर्षों के अनुभव से अर्जित किया है”
“यानी हमारे छोटे से दिमाग में एक कंप्यूटर से भी अधिक स्मृति है?”
“यह बात आप बेहतर जानते होंगे कि दिमाग की स्मृति किस तरह काम करती है”
“हाँ! कई पहलू हैं। मसलन दिमाग की अरबों तंत्र कोशिकाओं का लचीलापन, उनका आपसी मकड़जाल आदि”
“बिल्कुल। यह लचीलापन और इतना सघन तंत्र-जाल कंप्यूटर के लिए बुनना बहुत कठिन है”
“फिर कास्पारोव कैसे हारे?”
“यह कुछ ऐसी ही कोशिश थी, जिसमें कई प्रोससर एक साथ लगाए गए। यह समानांतर प्रक्रमण यानी पैरेलल प्रोसेसिंग कहलाती है। कुछ-कुछ मनुष्य की ही तरह एक साथ कई संभावनाओं का आकलन। लेकिन इसके बावजूद कास्पारोव को यह हर खेल में मात नहीं दे सकी…हाँ! मनुष्य थक जाता है, किसी कारण अपना ध्यान खो देता है, और मस्तिष्क का सम्यक उपयोग नहीं कर पाता। कंप्यूटर के साथ ऐसी मजबूरियाँ कम हैं।”
“क्या भारत के पास भी ऐसा कोई सुपर-कंप्यूटर है?”
“भारत के पास तो उस वक्त भी था, जब गैरी कास्पारोव अमरीकी कंप्यूटर से शतरंज खेल रहे थे। अब तो खैर कई हैं।”
“अरे हाँ! मैं तो भूल ही गया। जब अमरीकी राष्ट्रपति रोनाल्ड रीगन ने भारत को लगभग बेइज्जत कर दिया था, और भारत ने….”
“देखा? दिमाग की सिलवटों में कई ऐसी पढ़ी-सुनी स्मृतियाँ दबी होती है, जो ज़रूरत पड़ने पर एक कहानी रूप में निकल आती हैं। (हँस कर) अब तो आप मानेंगे कि सिर्फ़ चाचा चौधरी
का नहीं, हम सभी का दिमाग कंप्यूटर से तेज चलता है।”

Comments
Post a Comment