So what are the odds that you are not sleeping while reading this post?
विचार बेहद शक्तिशाली होते हैं। एक बार अवचेतन में कोई विचार उत्पन्न हो जाये, तो भले ही कितना भी सही हो अथवा गलत, व्यक्ति की नियति बदलने की पूरी क्षमता रखता है। क्रिस्टोफर नोलान द्वारा निर्देशित और प्राइम तथा नेटफ्लिक्स पर उपलब्ध फ़िल्म "Inception" कहानी है - व्यक्ति के स्वप्न के माध्यम से उसके अवचेतन में पहुंच कर उसके विचारों से खेलने की।
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किसी मिलिट्री प्रोग्राम के तहत विकसित की गई सपनों में उतरने की इस तकनीक का कॉब डॉम (लियोनार्दो दिकोप्रियो) बड़ा खिलाड़ी है। उसे साइटो नामक एक बिज़नेस टायकून से एक प्रपोजल आता है, जिसके तहत उसे साइटो के व्यापारिक प्रतिद्वंद्वी के बेटे (किलियन मर्फी) के अवचेतन में एक विचार इम्प्लांट करना है - जिससे मर्फी अपने पिता की व्यापारिक विरासत को बिखेर दे और साइटो ऊर्जा क्षेत्र का एकलौता बादशाह बन जाये। डॉम को अपने घर जाना है, अपने बच्चों से मिलना है पर उस पर कुछ चार्जेज होने के कारण वह अमेरिका में प्रवेश नहीं कर सकता। पर इस काम के एवज में साइटो डॉम की सभी परेशानियां हल कर सकता है इसलिए डॉम अपनी टीम के साथ इस असाध्य कार्य के लिए राजी हो जाता है।
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ऐसी परिस्थितियां बनाई जाती हैं कि अपने पिता के फ्यूनरल में शामिल होने के लिए मर्फी को अपने प्राइवेट प्लेन की बजाय साइटो की एयरलाइन्स में सफर करना पड़े। इस प्लेन में उसे सेडेटिव की सहायता से सुला कर सपनों के सफर का आगाज होता है। हर सपने में मर्फी को ढूंढ कर उसे फिर से सुलाया जाएगा - अर्थात स्वप्न में स्वप्न के तीन स्तर होंगे। स्वप्न का समय वास्तविक संसार से धीमे चलता है। फ्लाइट के कुल दस घण्टे पहले लेवल के स्वप्न पर एक हफ्ता, दूसरे स्वप्न में 6 महीने और तीसरे स्वप्न में 10 साल के बराबर होंगे। अर्थात डॉम और उसकी टीम को मर्फी को भिन्न परिस्थितियों में फंसा कर मैन्युपुलेशन के जरिये उसके अवचेतन में कंपनी तोड़ने का विचार आरोपित करने का भरपूर समय मिलेगा।
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नॉर्मली ऐसे सपनों में किसी के जीवन का अंत हो जाये, तो वास्तविक दुनिया में उसकी आंख खुल जाती है। पर इस मिशन में इस्तेमाल किया गया सेडेटिव इतना तगड़ा है कि स्वप्न में किसी की सांस रुक जाने पर वह जागने की बजाय "लिम्बो" नामक एक रहस्यमयी स्वप्न जगत में पहुंच जाएगा, जहां जा कर वास्तविकता अथवा स्वप्न में भेद करना इतना मुश्किल है कि वहां गया इंसान स्वयं अपनी इहलीला समाप्त करके वापस जागने की कोशिश भी करे - यह संभावना शून्य है। अर्थात मिशन के दौरान जान खोने वाला व्यक्ति दशकों तक अथवा अनंत तक भी लिम्बो में भटकने के लिए मजबूर हो जाएगा।
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कई बाधाओं को पार करके अन्ततः डॉम अपना मिशन पूरा करता है। फिर मिशन के दौरान जान गंवा कर लिम्बो में पहुंच कर दशकों बिता कर बूढ़े हो चुके साइटो को ढूंढ कर वापस लाता है। अंततः फ्लाइट पर उसकी आंख खुलती है। साइटो उसके चार्ज हटाने का अपना वादा पूरा करता है। फ्लाइट से उतर कर डॉम अपने पिता के साथ घर पहुंचता है और अपने बच्चों से मिलता है।
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इस पूरी फ़िल्म में हर व्यक्ति के निरंतर कई स्वप्नों में रहने के कारण असली और सपने की दुनिया में भेद करने के लिए प्रत्येक व्यक्ति एक टोटेम निर्धारित करता है। डॉम का टोटेम एक घूमता हुआ लट्टू होता है। जो घुमाने के बाद गिर जाए, अर्थात - डॉम वास्तविक संसार में है। पर लट्टू घूमता ही रहे - अर्थात डॉम स्वप्न में ही है।
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अपने बच्चों को आवाज देने के बाद डॉम न जाने क्या सोच कर टेबल पर इस लट्टू को घुमाता है। फिर अपने बच्चों से मिलने की जल्दबाजी में इस लट्टू को टेबल पर छोड़ कर ही बच्चों के पास चला जाता है। पीछे हम दर्शक इस लट्टू को घूमते हुए देखते रहते हैं। और फ़िल्म खत्म हो जाती है - लट्टू गिरा या नहीं - यह दर्शकों को कभी पता नहीं चलता।
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इस भ्रामक एंडिंग के कारण इन्सेप्शन फैंस अक्सर यह दिमाग लगाते रहते हैं कि क्या वाकई डॉम का मिशन पूरा हो गया? या वो अभी भी सपने में ही है? अथवा यह फ़िल्म कभी घटित ही नहीं हुई और शुरू से ही हम डॉम के स्वप्न में ही जी रहे थे? जब नोलान से यह पूछा गया तो उनका उत्तर था - अंतिम दृश्य का संदेश यह है कि - अब डॉम को सोने या जागने से फर्क नहीं पड़ता।
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बहरहाल, डॉम सो रहा है अथवा नहीं - इससे कहीं ज्यादा हमें खुद से यह पूछना चाहिए कि - क्या गारंटी है कि इस समय आप जाग ही रहे हैं?
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स्वप्न और वास्तविकता में भेद करना तो बड़ा दुष्कर कार्य है। क्या हो, जिस दिन देह छूटे और नेत्र इस संसार से विदाई लें - तब पता चले कि अभी तक तो हम सो रहे थे।
निद्रा टूट कर वास्तविकता तो अब शुरू हुई है।

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