जनगणना

 गुरु,सच बताऊं तो जनगणना




ने एक आईना तो दिखा ही दिया कि अमीरी की पहचान सिर्फ बड़े मकानों, बड़ी बड़ी गाड़ियों से नहीं, बल्कि बड़े दिलों से पहचानी जाती है... आलीशान मकानों वाले घर मिले, जहाँ घंटों धूप में खड़े रहने के बाद किसी ने एक गिलास पानी तक नहीं पूछा... और वहीं टूटी हुई मकानों में रहने वालों ने कम से कम ये तो कहा कि भाई साहब, पहले पानी पी लो... फिर काम कर लेना..." सच कहूँ तो उस दिन समझ आया कि इंसान की औकात उसके घर से नहीं, उसके व्यवहार से पता चलती है कि वाकई में अमीरीयत क्या होती है ।कल एक सज्जन जो खुद को तथाकथित अमीर समझ रहे थे , लास्ट प्रश्न जिसमें फोन नंबर बताना था केवल, भाई साहब नम्बर बताने से पहले दूसरे व्यक्ति,जो की उनके घर काम करता था 15 मिनट तक डांटते रहे और मैं उनके फोन नम्बर का इन्तजार करता रहा‌। तभी मैंने भगवान से प्रार्थना कि प्रभू अमीर उन्हें ही बनाओ जो‌ चु्््या और बकलोल ना हो ,पर मैं नाराज़ नहीं हुआ क्योंकि ट्रेनिंग में बताया गया है खीस दिखाकर मुस्कुराते रहना हैं।😀😀

कुछ लोगों के घर बहुत बड़े थे, लेकिन दिल छोटे निकले और कुछ के पास खुद खाने को कम था पर अपनापन ज्यादा था।शायद यह जनगणना सिर्फ आंकड़े नहीं गिनवा रही बल्कि ये इंसानों की इंसानियत भी दिखा रही है ।कयोंकि कई बार छोटे मकान वालों ने वो अपनापन दिया, जो बड़े-बड़े महलों में कभी नहीं मिला शायद इन्हीं के कारण यह लाइन सत्य हो रही।


लोग तो एक ही कमरे में रहते हैं,

बाकी कमरों में बस उनका गुरूर रहता है।"

              ‌ जान एलिया

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