प्रेमिका मरती नही है सिर्फ दफन हो जाया करती है प्रेमी की गुमनाम चिट्ठियों में जिन्हें लिखा जाता है सफेद रंग की स्याही से,या फिर रह जाती है उसके कमरे में पड़ी किसी किताब के पन्ने में, वो किताब जो सदियों पहले जला दी गयी थी, वो नजर आती है सिगरेट के उड़ते धुंए में और गुम हो जाती है किसी के पैरों तले दब कर उसी आधी सिगरेट की तरह,उसके हाथों की मेहंदी का रंग पीला पड़ चुका होता है वो दूर से देखती है उसकी मोहोब्बत को किसी आवारा के गले लगते हुए, वो चाहती है ज़ोर से चीखना , वो तड़पती है खुद को प्रेमी की बाहों में भरकर सो जाना चाहती है, प्रेमिका कभी मरती नही बस खो जाया करती है चार दीवारी अंधेरो में जहाँ सिर्फ उसके प्रेमी की सांसो की ही आवाज होती है जहां उसका जिस्म आहिस्ते आहिस्ते रूह से दूर हो जाएगा, जहाँ इस दुनिया के कानून काम न आएंगे और जहाँ एक बार फिर दो लबो का मिलन होगा, ठीक उस जगह प्रेमी तोड़ चुका होगा अपना दम और वो दोनों एक लाल चादर में लिपटे जिंदगी की तमाम रातें गुजार देंगे , जहाँ जन्म होगा एक नए इश्क़ का जो लिखेगा चिट्ठियां , और दफन कर देगा एक बार फिर से प्रेमिका को जो जिंदा है ।