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क़िस्से-कहानियों का सताया हुआ लोकतंत्र

हमें बचपन से यह पढ़ाया गया है कि फलाने राजा ने ख़ुश होकर फलाने व्यक्ति को स्वर्ण मुद्राएँ दीं। बस यहीं से हमारे मस्तिष्क को कैप्चर करने का खेल शुरू हो गया। हम कलाकार हैं तो अपनी कला से राजा को ख़ुश करने में लगे रहे। हम विद्वान हुए तो अपनी विद्वत्ता से राजा को ख़ुश करते रहे। हम चतुर हुए तो अपना समस्त चातुर्य राजा को ख़ुश करने में झोंक दिया। बुद्धिमान हुए तो बुद्धिमत्ता राजा को ख़ुश करने में जुट गयी।  मतलब यह कि कला, विद्वत्ता, चातुर्य और बुद्धिमत्ता; राजा से स्वर्ण मुद्राएँ पाने की होड़ में व्यस्त हो गयीं और राजा इन सबको काम पर लगाकर शासन में अपनी मनमानी करके ख़ुश रहा।  इन्हीं कहानियों ने हमें यह भी बताया कि नगर की समस्त सुंदर कन्याओं का अंतिम उद्देश्य यही है कि राजकुमार उनके सौंदर्य पर मोहित हो जावे। इसलिए आज भी सत्ताधीशों के राजकुँवर सुन्दर कन्याओं पर आकृष्ट होकर उनका जीवन धन्य करते पकड़े जाते हैं। इन कहानियों के अनुसार राजा के दो ही काम थे- प्रथम, अपने मंत्रियों से ऊल-जलूल सवाल पूछना और द्वितीय, आखेट करना। इन दोनों से जो समय बचता था, वह रूठी रानी को मनाने में व्यतीत हो जाता था। मंत्र...

जन्म कुंडली

  जब दोनों भाई राजकीय सेवा में चयनित हो गए तो अपने-अपने परिवार सहित सरकारी भवन में रहने चले गए! अब बूढ़े माता-पिता की पूरी जिम्मेदारी वैष्णवी पर आ गई! उसने भी मां-बाप की देखभाल में जी जान लगा दिया! लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि पहले उसके विवाह की चिंता करने वाले मां-बाप अब बिल्कुल उदासीन हो गए!  उसकी उम्र बढ़ने लगी और शादी का जिक्र घटने लगा!  शुरू में ऐसे रिश्ते ढूंढे गए जिसमें मां-बाप साथ रह सके, पर बात बनी नहीं!  धीरे धीरे उम्र इतनी हो गई कि अच्छे रिश्ते आने बंद हो गए! अपनी सहेलियों के जोर देने पर जब वैष्णवी ने स्वयं के स्तर पर रिश्ता ढूंढना शुरू किया तो चालीस-चालीस साल के कुंवारों ने ऐसी-ऐसी बातें कीं, कि उसे उबकाई आने लगी!   माता-पिता तो उदासीन थे ही, अब उसने भी शादी के बारे में सोचना छोड़ दिया!  एक दिन ऑफिस से लौटी तो दरवाजे पर अपना जिक्र सुनकर ठिठक गई!  पापा के खास दोस्त मिश्रा अंकल से पापा कह रहे थे- "क्या बताऊं मिश्रा! मैंने तो कितने ही लड़के ढूंढे, पर वैष्णवी को कोई पसंद ही नहीं आता! अब इतनी पढ़ी लिखी लड़की की शादी उसकी मर्जी के बगैर तो नही...

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The whole world paused this morning.  Do you know why? Because an 8 year old’s tank was empty.  The kids had already started their school day at their desks and I was preparing to leave for work when I noticed my littlest standing in the bathroom wiping his face.  I paused at the door and asked if he was okay. He looked up with tears silently dripping and shook his head. When I questioned if something happened, again he shook his head.  So I sat on the side of the tub and pulled him in my lap. I told him sometimes our heart tanks feel empty and need to be refilled.  He cried into my chest and I held him tight.  I asked if he could feel my love filling him up?  A nod, and tears stopped...  I waited a minute...  ‘Has it reached your toes yet?’  He shook his head no...  ‘Okay dear. We will take as long as you need. Work doesn’t matter right now. School isn’t important either. This right here, is the most important thing today, okay?...

*🪔शुभ दीपावली*🪔

 *इस बार की दीपावली बहुत खास है,, इसलिए नहीं कि मेरे घर में बहुत शानदार महंगा पेंट हुआ या नहीं, इसलिए भी नहीं कि मैंने कोई महंगी कार या ज्वैलरी खरीदी या नहीं, न ही इस बात के लिए खास है कि मुझे बिजिनेस में बहुत बड़ा मुनाफा हुआ या नहीं, या मेरी सैलरी में बहुत वृद्धि हुई या नहीं, इसलिए तो बिल्कुल भी नहीं कि मेरे घर में ढेरों पकवान बने है या नहीं, और इसलिए भी नहीं कि परिवार में सबको नए महंगे कपड़े या घर में खूब सारी सजावट या रात भर महंगी आतिशबाजी हुई या नहीं।।* *इस बार की दीपावली खास है , बहुत ज़्यादा खास,,क्योंकि इस दीपावली को मैं अपने और अपने पूरे परिवार को जीवित, सांस लेता हुआ, हंसता हुआ देख पा रहा हूँ, इस बार की दीपावली इसलिए खास है क्योंकि मुझे भरोसा हुआ कि कुछ ऐसे लोग है जिनको एक आवाज़ देने पर मदद के लिए हमेशा तैयार मिलेंगे, इस बार की दीपावली इसलिए खास है कि प्रभु ने अपनी विशेष कृपा मुझ पर बनाई रखी और मुझे इस बात का अहसास दिलाया कि ज़िन्दगी में ऊपरी चमक दमक, पैसा, प्रॉपर्टी, शानोशौकत बस एक छलावा और इस पर ज़रा सा भी इतराने या घमंड करने की ज़रूरत नही है। इस बार की दीपावली इसलिए खास है क्य...

ऊंच नीच

प्रसाद जी अपने बेटे की रिसेप्शन पार्टी में मुझ पर भड़के हुए थे मैं उनके बेटे की शादी में जो नही गया था । मुझे दो शादी के कार्ड मिले थे एक प्रसाद जी के बेटे के शादी का दूसरा कुमार साहब के बेटे की शादी का । कार्ड देने आये प्रसाद जी बोले , " तन के ठसके से चलो यार बारात में ! लड़के वाले हो लड़के वाले ! रौब पड़ना चाहिए बेचारे लड़की वालों पर ! वो भी क्या याद रखेंगे प्रसाद की बारात की हनक को !"  मुझे बड़ा अजीब लगा सुन कर ! खुद की दो दो बेटियाँ थीं शादी की पर वधूपक्ष के लिए ऐसी सोच ? बस शादी में जाने का मन ही नही हुआ ।  कुमार साहब ने भी कार्ड दिया और स्नेह से मेरा हाथ पकड़ कर बोले " आपको चलना ही है मेरे साथ शुभकार्य है ! घर मे लक्ष्मी लानी है लक्ष्मी ! चार ज़िम्मेदार आदमी होने चाहिये की नहीं मेरे साथ ! सम्मान विधि विधान में यदि मुझसे कोई ऊंच नींच हो गयी तो क्या सोचेंगें वधु के माता पिता ! " 

जंजीर

   "कब तक अपने पिता के घर में बैठी रहोगी सौम्या?. अपनी पसंद से ही सही विवाह कर तुम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश क्यों नहीं करती!".  आज सौम्या से मिलने आई उसकी बचपन की सहेली और अब दो प्यारे-प्यारे बच्चों की मांँ बन चुकी राधिका ने बातों ही बातों में सौम्या को सलाह दे दी लेकिन सौम्या ने उसे टालना चाहा.. "मेरी छोड़!.तू सुना जीजा जी कैसे हैं?" "वो ठीक है!" राधिका मुस्कुराई। "और बता!. घर में सब कैसे हैं?. तेरी सास पहले की तरह ही बात-बात पर तुझे ताने देती है या अब उनके व्यवहार में कुछ सुधार हुआ है?" सौम्या ने राधिका की खिंचाई की लेकिन राधिका मुस्कुराई.. "वह सब तो पुरानी बातें हैं सौम्या!.अब मेरे सास-ससुर का व्यवहार मेरे प्रति बिल्कुल बदल चुका है मेरे पति के साथ-साथ अब ससुराल के सभी लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं और पता है!..इन बच्चों के बिना तो इनके दादा-दादी का मन ही नहीं लगता।" राधिका के चेहरे की ताजगी और चमक उसके सुखी परिवारिक जीवन की गवाही पहले ही खुलकर दे रहा था। "यह तो तुमने बहुत अच्छी बात बताई राधिका!" सौम्या ने अपनी सह...

नासमझ_आज़ादी

“मैंने रित्विक के साथ रहने (लिव-इन) का फैसला कर लिया है,” रिया ने एक एक शब्द पर जोर दिया। वह गुड़गाँव में एक पीजी में रहती थी, वीकएण्ड पर घर आई थी। उसके ये कहते ही घर में जैसे कि भूचाल आ गया था; बस दीवारें नहीं हिलीं थी और छत भी सलामत थी। अभी तक सिर्फ माँ ने ही रित्विक का नाम पहले सुन रखा था, लेकिन उसे भी ज्ञात न था कि रिया उससे प्रेम करती है। रिया ने अभी अभी एमबीए पूरा करके एक कंपनी में सेल्स एडवाइजर की पोस्ट पर जॉयन किया था। रिया की जॉब भी रित्विक ने ही लगवाई थी। वह उसी कंपनी में सेल्स मैनेजर था। “ये कैसे होगा? बिना शादी के तुम नासमझ_आज़ादी_WrongTurnउसके साथ कैसे रह सकती हो? अगर तुम्हें उससे प्रेम है, तो थोड़ा रुको, उसके माता-पिता से हम शादी की बात करते हैं, फिर रहो, कौन रोकता है,” उसके पिता खुले विचारों वाले थे। “रित्विक अभी दो साल तक शादी नहीं कर सकता। पहले उसकी बहन की शादी होगी, इसी साल, फिर हमारी शादी होगी,” रिया को जैसे सारी योजना समझा दी गई थी। “यदि रित्विक को तुमसे प्रेम है, तो वह रुकेगा न, तुम्हारे लिए! या तुम ही मरी जा रही हो, उसके साथ लिव-इन के लिए?” अब बड़े भैय्या बोले। “भ...