माँ तो माँ होती है
माँ
---
माँ ने किताबे नही पढ़ी थी ,
माँ कभी स्कूल नही गई थी,
उसके बच्चे पढ़े ,इसकी फिक्र थी
बैठ जाती थी मेरे साथ ,
कहकर कि " बैठ किताब खोल ,
पढ़कर सुना कुछ मुझे "
मैं भी ,उसे झांसा देता था --,
बातो में उलझाए रखता था
पता नही क्या क्या बकता था ,
वो भोली खुश होती थी ,
मुझे बहुत प्यार करती थी
माँ , मेये बात तो थी --
बैठक मेरे साथ सुबह शाम थी
धीरे धीरे पढ़ाई में भी रुचि -
होने लगी थी
और एक दिन वो आया कि -
समय से सुबह ,शाम, स्वयं ही
पढ़ने लगा था
माँ के कहने पर -- कोई भी कथा,
उन्हें पढ़ पढ़ कर सुनाने लगा था
रामायण ,महाभारत के अंश -,
उन्हें बहुत भाते थे
माँ , समय समय पर अब ,
उन कथाओं से ही हमें ,
समझाने लगी थी
हमने तो पढ़कर केवल ,
माँ को कथा सुनाई थी
वो तो हमें बात बात पर ,
कभी राम ,और उनके परिवार की
रावण की बुराई की ,
हनुमान की कथा ---
हमे ही सुनानी लगी थी
माँ की कही कथा मुझे ,
बहुत भाती थी
सच मे हमने तो माँ को ,
केवल पढ़कर सुनाई थी ,
माँ ने तो , हमें सही राह पर-
चलने की राह दिखाई थी
माँ पर बहुत कुछ है कहने को,
आज बस इतना ही ,
माँ ही मेरी पहली अध्यापिका थी ,
जिसने सिखाया ,पढ़ना ही नही --
पढ़े हुए को " गुणना " भी
सच , माँ तो माँ होती है
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माँ ने किताबे नही पढ़ी थी ,
माँ कभी स्कूल नही गई थी,
उसके बच्चे पढ़े ,इसकी फिक्र थी
बैठ जाती थी मेरे साथ ,
कहकर कि " बैठ किताब खोल ,
पढ़कर सुना कुछ मुझे "
मैं भी ,उसे झांसा देता था --,
बातो में उलझाए रखता था
पता नही क्या क्या बकता था ,
वो भोली खुश होती थी ,
मुझे बहुत प्यार करती थी
माँ , मेये बात तो थी --
बैठक मेरे साथ सुबह शाम थी
धीरे धीरे पढ़ाई में भी रुचि -
होने लगी थी
और एक दिन वो आया कि -
समय से सुबह ,शाम, स्वयं ही
पढ़ने लगा था
माँ के कहने पर -- कोई भी कथा,
उन्हें पढ़ पढ़ कर सुनाने लगा था
रामायण ,महाभारत के अंश -,
उन्हें बहुत भाते थे
माँ , समय समय पर अब ,
उन कथाओं से ही हमें ,
समझाने लगी थी
हमने तो पढ़कर केवल ,
माँ को कथा सुनाई थी
वो तो हमें बात बात पर ,
कभी राम ,और उनके परिवार की
रावण की बुराई की ,
हनुमान की कथा ---
हमे ही सुनानी लगी थी
माँ की कही कथा मुझे ,
बहुत भाती थी
सच मे हमने तो माँ को ,
केवल पढ़कर सुनाई थी ,
माँ ने तो , हमें सही राह पर-
चलने की राह दिखाई थी
माँ पर बहुत कुछ है कहने को,
आज बस इतना ही ,
माँ ही मेरी पहली अध्यापिका थी ,
जिसने सिखाया ,पढ़ना ही नही --
पढ़े हुए को " गुणना " भी
सच , माँ तो माँ होती है
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