यह समझदारियां किस काम की

यह समझदारियां
किस काम की,
जो जीनें न दें ..
जब प्यास हो,
और आस हो,
पानी तक जो पीने न दें ।।

किसी के होने पे भी,
सवाल हों,
न होने पे भी,
बवाल हों,
जो औरों का बुरा चाहते,
घमंडी से ख्याल हों ।।

यह जो रेत आंखों पे जमी,
झटको या जिंझोड दो ।।
खुद क्या हो सोचते,
औरों की तुम छोड़ दो ..
गर तुमको मैं जचता नहीं,
बेशक अभी से तोड़ दो ..

मैं हूँ क्या, मुझको पता,
तुम्हारा खुद संभालो तुम,
वक़्त के साँचे सब ढला,
खुद को भी तोह ढालो तुम,
अपने कहाँ कहाँ तक बिखरें,
पहले उनको जरा बचालो तुम ।।


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