जीवन की पाठशाला
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की जिंदगी में ना करना /बोलना भी बहुत जरुरी होता है ,हम हमेशा हाँ -हाँ करते /बोलते कई बार अपने संबंधों में स्वयं ही दरार /दूरी पैदा कर लेते हैं ......, जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आँख में गिरा हुआ तिनका -पैर में चुभा हुआ काँटा और रूई में छिपी आग से भी ज्यादा खतरनाक है वो व्यक्ति जो बाहरी तौर पर तो आपका /आपके साथ है पर आंतरिक तौर पर आपके लिए षड़यंत्र रचता रहता है ....., समय चक्र ने मुझे सिखाया की इंसान की बुद्धि उसकी बातचीत से /इंसानियत उसके व्यवहार से और संस्कार उसकी आँखों से बोलते हैं ना की उसके महंगे कपड़ों -गाडी या बंगले से .....🙏 आखिर में एक ही बात समझ आई की पछतावे से बीता हुआ कल और चिंता से आने वाले कल को बदला नहीं जा सकता इसलिए जो अभी -वर्तमान में है उस पल को जी भर कर जियें ......! जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सबसे आसान है किसी को उपदेश देना -उसमें कमियां निकालना ......लेकिन मुश्किल है उन उपदेशों को स्वयं के लिए अमल में लाना और खुद की कमियों को खोजना ..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की कहते हैं की जब समय -हालात इंसान को तोड़ते हैं तो वो कहीं ना कहीं बिगड़(शरा...