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Showing posts from March, 2021

जीवन की पाठशाला

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की जिंदगी में ना करना /बोलना भी बहुत जरुरी होता है ,हम हमेशा हाँ -हाँ करते /बोलते कई बार अपने संबंधों में स्वयं ही दरार /दूरी पैदा कर लेते हैं ......, जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आँख में गिरा हुआ तिनका -पैर में चुभा हुआ काँटा और रूई में छिपी आग से भी ज्यादा खतरनाक है वो व्यक्ति जो बाहरी तौर पर तो आपका /आपके साथ है पर आंतरिक तौर पर आपके लिए षड़यंत्र रचता रहता है ....., समय चक्र ने मुझे सिखाया की इंसान की बुद्धि उसकी बातचीत से /इंसानियत उसके व्यवहार से और संस्कार उसकी आँखों से बोलते हैं ना की उसके महंगे कपड़ों -गाडी या बंगले से .....🙏 आखिर में एक ही बात समझ आई की पछतावे से बीता हुआ कल और चिंता से आने वाले कल को बदला नहीं जा सकता इसलिए जो अभी -वर्तमान में है उस पल को जी भर कर जियें ......! जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सबसे आसान है किसी को उपदेश देना -उसमें कमियां निकालना ......लेकिन मुश्किल है उन उपदेशों को स्वयं के लिए अमल में लाना और खुद की कमियों को खोजना ..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की कहते हैं की जब समय -हालात इंसान को तोड़ते हैं तो वो कहीं ना कहीं बिगड़(शरा...

जीवन की पाठशाला

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आप अपने बच्चों से भरपूर प्यार करें -उन्हें हर संभव सुख सुविधा सम्पन्नता और अच्छे संस्कार दें पर मेहरबानी करके अपनी ढलती उम्र के साथ अपने आने वाले कल के बारे में भी सोचें क्यूंकि इस कलयुग में दूध देती गाय को सब सहेजते हैं और बाद में या तो उसे जंगल में या थोड़ी बहुत मानवीयता हो तो किसी कोने में स्थान दे दिया जाता है रखवाली के लिए ..........., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की जो किरदार एक बाप अपनी औलाद के लिए निभा सकता है ,वो औलाद कभी भी नहीं निभा सकती बल्कि मौका आने पर पढ़ाई लिखाई में खास कर गणित में एकदम कमजोर औलाद भी उसने थोड़े समय आपके विपरीत समय में आपके ऊपर क्या खर्च किया बहुत ही सुलझे हुए गणितज्ञ की तरह आपको समझाती है ....., समय चक्र ने मुझे सिखाया की तुम्हें चाहेगा वो हकीकत में तुम्हारे सिवा कुछ और नहीं चाहेगा और जो तुम्हारे माध्यम से बहुत कुछ चाहेगा उसके लिए तुम एक साधन मात्र हो .....🙏 आखिर में एक ही बात समझ आई की आपका शरीर /मन या आत्मा कितनी भी घायल क्यों ना हो ,सामने वाले के सामने ख़ास कर दुनियादारी वाले अपनों के सामने अपने आपको एकदम चुस्त दुरुस्त प्रस...

Yugantika

 लोग नई पौध लाते  नर्सरी वाले से  हजार बात पूछते हैं, पानी कितना , खाद कब कब, मौसम के हिसाब से देना, धूप नहीं आती है, इंडोर रखनी है, बागीचे की मिट्टी रेतीली है ,  गमले की पथरीली है , चल तो जाएगी न पौध ? और एक स्त्री को जब ब्याहकर लाते हैं, न तो जमीन से उखाड़कर  देने वाला ज्यादा कुछ सोचता, न ही अपनी जमीन पर  लाकर रोपने वाला कुछ पूछता, जाहिर सी बात है , ये भी क्या पूछने वाली बात है ? उसे बिन धूप, जमीन पकड़ना होगा खाद मिट्टी न भी हो तो सहना होगा लगने लगें जड़े जब सूखी खुद पानी बनकर लगना होगा मौसम कोई आए जाए  सदाबहार ही रहना होगा! भेज दी, ले आए,  अब वो जाने, उसका काम जाने!

हम छोटे शहरों के छोटे लोग

 हम छोटे शहरों के छोटे लोग कभी बड़े नहीं होते ! राशन, बिजली , पानी, मोबाइल के बिल चाहे जितने बड़े हो जाएं हम बड़े नहीं होते ! हो जाएं अनगिनत  मल्टीस्टोरी फ्लैट्स फूड कोर्ट में दुकानें कितनी ही गाड़ियां बड़ी हो जाएं, हमारी प्रापर्टीज़ लेकिन हम बड़े नहीं होते ! हम नहीं खेलते बिलियर्डस,स्नूकर  नहीं जाते पब डिस्को, करते नहीं छुट्टियों में  बड़े बड़े वर्ल्ड टूर हमें पसंद होता है बतियाना  तब भी अम्मा के छोटे ,भिंचे से अस्तव्यस्त कमरे में , खाते हैं हम मूंगफली  और छोटे चाचा के हाथों पिसी  लहसुन नमक मिर्च की चटनी  देखते हैं एलबम छुटकी की शादी की  और ढूंढते हैं खुद को ब्लैक एंड व्हाईट किसी  छोटी सी ग्रुप फोटो में ! हम छोटे से शहरों के छोटे लोग बड़े होने, दिखने और रहने में  अंतर करना जानते हैं ! हम डैस्टिनेशन वैडिंग नहीं करते, हम डैस्टिनेशन लिविंग करते हैं! हम छोटे शहरों के छोटे लोग  न्यूटैला का छुईमुई डिब्बा नहीं  घर के निकले देसी घी से भरा चीनी मिट्टी का बड़ा सा मर्तबान होते हैं! हम छोटे शहरों के छोटे लोग कभी बड़े नहीं होते!

we wake up, well in-time.

I woke up today, having dreamt early morning at 4 AM. I was in one of the biggest Mall of India - DLF Mall - looking to buy a pair of socks and a neck tie. As I walked in, I noticed a sweater with a price tag of Rs. 9000. Next to the sweater were a pair of Jeans for Rs. 10,000 The socks were Rs. 8000 ! And Tie for estonishing Rs. 16,000 ! I went looking for a salesperson and found one in the watch Dept He was showing a man a Rs. 225/- Rolex watch. I looked in the glass case and there was a 4 carat diamond ring also on sales for Rs.95/- Shocked I asked the salesperson "How could a Rolex watch sell for Rs.225/- ? and a cheap pair of socks sell for Rs. 8000/-"? He said "Someone slid into the store last night and changed the price tag on everything ". "Everyone is confused , people are acting like they have lost their sense of value". “They are willing to pay lots of money for things of little value ,and very little money for things of great value " ...

समर्पण

  "बचपन और युवा काल की स्मृतियां हमेशा मधुर ही लगती हैं, चाहे उस समय वह कष्टप्रद लगी हों। इंग्लिश में इसके लिए 'नॉस्टैल्जिया' शब्द का प्रयोग करते हैं। और अब तो यह शब्द हमारे शब्दकोष में ही जुड़ गया है।  अब तो नाॅस्टाल्जिया एक बहुत बड़ा मार्केट भी बन गया है। अब छोटे-छोटे शहरों के बैकग्राउंड पर फिल्में बनती हैं, टीवी सीरियल बनते हैं, कहानी लिखी जाती हैं और यह पाठकों को, दर्शकों को पसंद भी आती हैं। क्योंकि मधुर स्मृतियां सभी को पसंद हैं। अपने बचपन में,अपने युवावस्था में जाकर, चाहे वह मानसिक ही हो, लोगों को बड़ा सुकून मिलता है। जीवन का यह जो हिस्सा है, जो अर्जन के पहले तक का होता है, बड़ा सुखद होता है। सभी कहते हैं कि वह समय मस्ती भरा था। वह समय किसी भी दबाव से रहित था, दुश्मनी और झगड़े जैसी भावना से रिक्त था, इसीलिए यह समय दिल और दिमाग को बहुत सुकून देता है और इस को बार बार याद करने को दिल चाहता है।  लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस समय-काल में बताया गया जीवन इतना तनाव रहित और इतना सुखद क्यों था? और अब वह सुख कहां चला गया?  वह सुख अभी भी हमारे अंदर है। उस सुख का रसास्व...

समानता की सृष्टि

" मुझे शरीर बनना है।"  भगवान चौक गए।  "यह तुम क्या कह रही हो, आत्मा? तुम आत्मा हो। तुम्हारा प्रयोजन भिन्न है। शरीर का वह कार्य नहीं है। क्यों बनना चाहती हो तुम शरीर?  "शरीर स्वतंत्र निर्णय ले सकता है, प्रभु।" आत्मा गंभीर थी, "आत्मा तो शरीर पर निर्भर है। शरीर ही कर्म करता है, फल पाता है। शरीर जो चाहे वह करता है। आत्मा तो शरीर की दासी है। मात्र उसके क्रियाकलापों का लेखा-जोखा करती रहती है। आत्मा का कोई स्वयं अस्तित्व नहीं है प्रभु। आत्मा का कोई कर्म ही नहीं है, फिर आत्मा पर कोई क्यों ध्यान दे? सभी तो शरीर और इसके सौंदर्य का वर्णन ही करते हैं।"  भगवान ने समझाने की चेष्टा की।  " तुम शरीर के उन कार्यकलापों से अपनी  तुलना कर रही हो जो स्थूल जगत और उसकी प्रतिक्रिया से संबंधित हैं? क्या वे प्रतिक्रियाएं ही किसी की क्षमता का परिचायक है?  तुम जगत से दूर रहकर शरीर को प्राण देती हो, ऊर्जा देती हो, कार्य करने के लिए शरीर को गति देती हो। तुम्हारे बगैर शरीर गति नहीं कर सकता। और वैसे भी तुम्हारा स्थूल जगत से क्या संबंध? तुम तो शरीर और मेरे बीच का सेतु हो। तुम आत्...

अपनी अपनी दृष्टि👁️

  *   एक भिक्षुणी संन्यासीनी स्त्री एक रात एक गांव में भटकती हुई पहूंची । रास्ता भटक गयी थी और जिस गांव में पहूचंना चाहती थी वहां न पहूचंकर, दूसरे गाँव पहूच गयी। उसने जाकर एक घर का दरवाजा खटखटाया, आधी रात थी दरवाजा खुला लेकिन उस गांव के लोग दुसरे धर्म को मानते थे और वह भिक्षुणी दूसरे धर्म की थी। उस दरवाजे के मालिक ने दरवाजा बंद कर लिया और कहा- देवी यह द्वार तुम्हारे लिये नहीं है। हम इस धर्म को नहीं मानते हैं तुम कहीं और खोज कर लो और उसने चलते वक्त यह भी कहा की इस गांव में शायद ही कोई दरवाजा तुम्हारें लिए खुले। क्योंकि इस गांव के लोग दूसरे ही धर्म को मानते है। और हम तुम्हारे धर्म के दुश्मन है। आप तो जानते ही हैं कि धर्म-धर्म आपस में बडे क्षत्रु है।  एक गांव का अलग धर्म हैं, दूसरे गांव का अलग धर्म है। एक धर्म वाले को दसूरे धर्म वाले के यहां कोई जगह नहीं, कोई आशा नहीं, कोई प्रेम नहीं, द्वार बंद हो जाते है। द्वार बंद हो गये उस गांव में। उसने दो-चार दरवाजे खटखटाये लेकिन दरवाजे बंद हो गये, सर्दी की रात है। अधंरी रात है वह अकेली स्त्री है , वह कहां जायेगी ? लेकिन धार्मिक लोग इस ...

परीक्षा के बाद विद्यार्थी की स्थिति

                          सोच रहा है छात्र बेचारा ,   क्या होगा परिणाम हमारा ?   परीक्षा तो मैंने मन से दी थी ,   लेकिन पढ़ाई कुछ न की थी ।।             कुछ पेपर से प्रश्न ही लिख दिए ,             कुछ के उत्तर ठीक लिख दिए ।             कुछ के ताक _ झाँक के ,             कुछ के उत्तर पूछ _ पाछ के ।।  थोड़ी सी मेहनत की होती ,  चमक उठता किस्मत का सितारा ।  सोच रहा है छात्र बेचारा ,  क्या होगा परिणा हमारा ?             स्कूल पहुँच कर रोज सवेरे ,             कक्षाओं के लेते फेरे ।             दिन भर देखे हँसते चेहरे ,             कहते सभी दोसात हो मेरे ।।  आठों कालांश व्यतीत हो गए ,  लेकिन उसमे...

गायत्री निवास।।*🌹🧘‍♀️(क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति)

 आज अंतर्राष्ट्रीय नारी दिवस पर नारी को समर्पित दिल को छू लेने वाली एक सत्य कथा /वृतांत/ घटना : थोड़ी लंबी है पर दिल से पढ़िए! अगर अंदर तक आपको उद्वेलित करती है तो आपकी मानवीय संवेदनायें अभी जिन्दा है, और कोशिश कीजिए की ये संवेदनाएं उम्र भर जिन्दा रहे....., जो दिल को तसल्ली दे वो साज उठा लाओ  दम घुटने से पहले ही आवाज उठा लाओ  आंखों में समंदर है,आशाओं  का पानी है! जिन्दगी और कुछ भी नहीं-तेरी मेरी कहानी है.... *क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति, एक मार्मिक कहानी जो किसी ने भेजी थी, मुझे लगा कि इसे प्रचारित किया जाना भारतीय संस्कृति को बचाये रखनें के लिए आवश्यक हैं ...* *पढ़े और अपनी प्रतिक्रिया दें....* 🙏🏼        *🌹🌲🌷॥गायत्री निवास।।*🌹🧘‍♀️ *बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई।* *सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी।* *शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें थोड़ी दूर एक पेड़ की ओट में खड़ी बुढ़िया पर ठह...