जीवन की पाठशाला


जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आप अपने बच्चों से भरपूर प्यार करें -उन्हें हर संभव सुख सुविधा सम्पन्नता और अच्छे संस्कार दें पर मेहरबानी करके अपनी ढलती उम्र के साथ अपने आने वाले कल के बारे में भी सोचें क्यूंकि इस कलयुग में दूध देती गाय को सब सहेजते हैं और बाद में या तो उसे जंगल में या थोड़ी बहुत मानवीयता हो तो किसी कोने में स्थान दे दिया जाता है रखवाली के लिए ...........,


जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की जो किरदार एक बाप अपनी औलाद के लिए निभा सकता है ,वो औलाद कभी भी नहीं निभा सकती बल्कि मौका आने पर पढ़ाई लिखाई में खास कर गणित में एकदम कमजोर औलाद भी उसने थोड़े समय आपके विपरीत समय में आपके ऊपर क्या खर्च किया बहुत ही सुलझे हुए गणितज्ञ की तरह आपको समझाती है .....,


समय चक्र ने मुझे सिखाया की तुम्हें चाहेगा वो हकीकत में तुम्हारे सिवा कुछ और नहीं चाहेगा और जो तुम्हारे माध्यम से बहुत कुछ चाहेगा उसके लिए तुम एक साधन मात्र हो .....🙏


आखिर में एक ही बात समझ आई की आपका शरीर /मन या आत्मा कितनी भी घायल क्यों ना हो ,सामने वाले के सामने ख़ास कर दुनियादारी वाले अपनों के सामने अपने आपको एकदम चुस्त दुरुस्त प्रस्तुत करें वर्ना ये तो तैयार ही बैठे हैं अपनी मुठी /जुबान /भाव में बुरा मिश्रित नमक लिए हुए छिड़कने के लिए .....

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