Yugantika

 लोग नई पौध लाते 

नर्सरी वाले से 

हजार बात पूछते हैं,

पानी कितना ,

खाद कब कब,

मौसम के हिसाब से देना,

धूप नहीं आती है,

इंडोर रखनी है,

बागीचे की मिट्टी रेतीली है , 

गमले की पथरीली है ,

चल तो जाएगी न पौध ?

और एक स्त्री को जब ब्याहकर लाते हैं,

न तो जमीन से उखाड़कर 

देने वाला ज्यादा कुछ सोचता,

न ही अपनी जमीन पर 

लाकर रोपने वाला कुछ पूछता,

जाहिर सी बात है ,

ये भी क्या पूछने वाली बात है ?

उसे बिन धूप, जमीन पकड़ना होगा

खाद मिट्टी न भी हो तो सहना होगा

लगने लगें जड़े जब सूखी

खुद पानी बनकर लगना होगा

मौसम कोई आए जाए 

सदाबहार ही रहना होगा!


भेज दी, ले आए, 

अब वो जाने,

उसका काम जाने!


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