जीवन की पाठशाला
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की जिंदगी में ना करना /बोलना भी बहुत जरुरी होता है ,हम हमेशा हाँ -हाँ करते /बोलते कई बार अपने संबंधों में स्वयं ही दरार /दूरी पैदा कर लेते हैं ......,
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आँख में गिरा हुआ तिनका -पैर में चुभा हुआ काँटा और रूई में छिपी आग से भी ज्यादा खतरनाक है वो व्यक्ति जो बाहरी तौर पर तो आपका /आपके साथ है पर आंतरिक तौर पर आपके लिए षड़यंत्र रचता रहता है .....,
समय चक्र ने मुझे सिखाया की इंसान की बुद्धि उसकी बातचीत से /इंसानियत उसके व्यवहार से और संस्कार उसकी आँखों से बोलते हैं ना की उसके महंगे कपड़ों -गाडी या बंगले से .....🙏
आखिर में एक ही बात समझ आई की पछतावे से बीता हुआ कल और चिंता से आने वाले कल को बदला नहीं जा सकता इसलिए जो अभी -वर्तमान में है उस पल को जी भर कर जियें ......!
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सबसे आसान है किसी को उपदेश देना -उसमें कमियां निकालना ......लेकिन मुश्किल है उन उपदेशों को स्वयं के लिए अमल में लाना और खुद की कमियों को खोजना ...,
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की कहते हैं की जब समय -हालात इंसान को तोड़ते हैं तो वो कहीं ना कहीं बिगड़(शराब -औरत -अवसाद -गाडी ) जाता है-हम बिगड़ते भी तो कैसे, समय ने तो हमें इस लायक भी ना छोड़ा के बिगड़ने के लिए भी कुछ पैसे बचे हों ....,
समय चक्र ने मुझे सिखाया की किसी को कोई फ़र्क़ नहीं पड़ता की आप किस हाल में जी रहे हैं ...आपको अपने हालातों को खुद ही बदलना पड़ेगा .....🙏
आखिर में एक ही बात समझ आई की कुछ तो ख़ास है ,..नहीं ..,बहुत कुछ ख़ास है- हे ईश्वर -सतगुरु तुझमें जो तू मुझ जैसे को भी अपने से जोड़े रखता है वर्ना इस दुनिया और दुनिया वालों ने तो कोई कसर नहीं छोड़ी थी पंखे पर लटक जाने या पटरी पर लेट जाने में ....तेरी लीला ...तू ही जाने ......
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आप श्रीमद भागवत गीता -श्री रामचरित मानस -श्री कुरान साहिब -श्री गुरु गुरुग्रंथ साहिब -श्री बाइबिल साहिब -वेद -पुराण कुछ भी पढ़ लो -पूजा -पाठ -सजदा -भजन -कीर्तन -सिमरन -व्रत -उपवास कुछ भी कर लो गर आपके मन मस्तिष्क ह्रदय विचार और भावना में काम -क्रोध -मद -लोभ -अहंकार -घृणा -नफरत -ईर्ष्या -द्वेष -चोरी -लालसा सब विधमान हैं तो सब बेकार है ......,इससे बढ़िया तो वो हैं जो ईश्वर का नाम तक नहीं लेते और जो हैं जैसे हैं वो वास्तविक रहते हैं ...,
जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की अगर आपने कुछ भी संभाला नहीं है तो सुधार की इच्छा व्यर्थ है और कुछ बदला नहीं है तो बदलाव की इच्छा भी व्यर्थ है .....,
समय चक्र ने मुझे सिखाया की अपनी तकलीफ -दुःख -परेशानी -दर्द -आंसू किसी के साथ साझा मत करो क्यूंकि यहाँ सब अपने अपने हिसाब से ज्ञान -सलाह देंगे और वो भी तब जब उनका दिल करेगा .....सबसे बढ़िया है की अपने इष्ट -सतगुरु के सामने अपनी अरदास रखो क्यूंकि वो ही सब कर रहा है और आगे भी वो ही करेगा ......,
आखिर में एक ही बात समझ आई की बुरे वक़्त में आप कितनी भी पूजा पाठ जप तप क्रिया सब कर लो ईश्वर देगा तभी /समय परिवर्तित तभी करेगा जब उसे करना है ...... हाँ ये सब आपके अंदर एक आत्मविश्वास -एक उम्मीद -एक रौशनी को जाग्रत करेंगे ....कर्म करते रहो ,-प्रयास करते रहो ...कभी तो उसे भी रहम आएगा ...कभी तो उसकी भी नजरें इनायत होगी .
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