ब्रह्म . . .हम लोग युगों से ‘ब्रह्म’ शब्द पढते, सुनते और बोलते आए है ! क्या आपको मालूम है कि ‘ब्रह्म’ शब्द का अर्थ क्या होता है ? यह कैसे बना,...कैसे अस्तित्व में आया..? सबसे पहले बेसिक बात जाननी ज़रूरी है, सो उसके बारे में बताना चाहूँ .ब्रह्म शब्द ‘'वृह'’ धातु से बना है जिसका अर्थ है - वृहत होना, बढ़ना, फैलना, विस्तृत होना। ऋषियों- मुनियों ने कहा - ‘ब्रह्म-पार ब्रह्म’.....जिसका अर्थ है - विस्तृत होना या फैलना अर्थात् जो निस्सीम है ! एक शब्द है – ‘परब्रह्म’ जिसका शाब्दिक अर्थ है 'सर्वोच्च ब्रह्म' - वह ब्रह्म जो सभी वर्णनों और संकल्पनाओं से भी परे है। लगभग सभी धर्मों मे ईश्वर के भिन्न-भिन्न रूपों को महान, सर्वोच्च कहा गया है । जैसे - तकबीर, वाक्यांश "अल्लाहु अकबर" का अर्थ है - "अल्लाह बहुत बडा है" यानी "ईश्वर महानतम है"। .युगों पहले निरंतर खोज में लगे, भारतीय जिज्ञासु, ऋषियों- मुनियों ने अनुसंधान कर जिसे पा...