जय श्री कृष्णा !

जितनी चीज़ें कृष्ण जी से छूटी हैं, उतनी तो किसी से नहीं छूटी!
कृष्ण जी से उनकी माँ छूटी, पिता छूटे।
फिर जो नंद-यशोदा मिले,
वो भी छूटे।
संगी-साथी छूटे
राधा छूटी
गोकुल छूटा
फिर मथुरा छूटा।
कृष्ण जी से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा है।
वो आजीवन त्याग ही करते रहे।
हमारी आज की पीढ़ी, जो कुछ भी छूटने पर टूटने लगती है, उसे *कृष्ण* को गुरु बना लेना चाहिए।
जो कृष्ण को समझ लेगा,
वो कभी अवसाद में नहीं जाएगा।
कृष्ण *आनन्द* के देवता हैं।
कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है, यह कृष्ण से अच्छा कोई नहीं सिखा सकता !
जय श्री कृष्णा !

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