एनी फ्रैंक

यह कविता एनी फ्रैंक ने द्वितीय विश्व युद्ध के दौरान लिखी थी, इतने मुश्किल भरे दौर में भी वह खुशमिजाज होकर लेखन कार्य किया करती थी,
इस कविता में बहुत ही आसानी से एनी ने एक किशोरावस्था लड़की के जीवन की जटिलताओं के बारे में बताया है।

हम सब में सबसे कम उम्र पर
नहीं रही अब छोटी
जिंदगी हो सकती दूभर
हमारे पास है काम
तुम्हे सिखाने पढ़ाने का नहीं है आराम
हमारे पास तजुर्बा है सीखो हमसे
हम ये सब पहले कर चुके है तुमसे .....

हमे है जानकारियां तमाम
सदियों से चल रहा ऐसा ही काम,
अपनी कमिया नहीं दिखती किसी को
दूसरों की कमियां लगती बड़ी सबको

ऐसी हालत में कमियां निकालना है आसान
मां बाप के लिए है काफी मुश्किल काम
निष्पक्षता, दयालुता से पेश आना तुम्हारे साथ
मीन मेख निकालने की आदत छोड़ना है मुश्किल
जब तुम बूढ़े लोगों के साथ हो
तब करना बस इतना
चुप चाप बस उनकी बड़बड़ाहट को झेलना
कड़वी कितनी भी हो ये गोली बस इसको गटकना

इससे अमन, चैन रहता है सदा बना
यहां गुजरे ये महीने नहीं गए बेकार
वक़्त बर्बाद करना नहीं तुम्हारा स्वभाव,
तुम दिन भर करती पढ़ाई ढेर सारी
ताकि दिमाग में न रहे उब भरी

ज्यादा मुश्किल सवाल जिन्हें
झेलना है मुश्किल
क्या पहनना होगा मुझे
हे ईश्वर
निकर नहीं मेरे पास
मेरे कपड़े है तंग , बनियान हो गई छोटी
ये तो नहीं ढंग
जूते हो गए छोटे उन्हें पहनना है कठिन
मेरी तकलीफें बढ़ रही दिन- ब-दिन

- Anne frank

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