सुनो पुरुषों
एक स्त्री सिर्फ तब तक ही तुम्हारी बनी रहेगी ,
जब तक वो बुरी छोटी बड़ी बातों के लिए तुमसे
रूठ जाया करेगी ,
इसके बाद जब तुम उसे गले लगाओगे
सब भूल कर तुम्हारी हो जाएगी ।
हज़ारों शिकायतें रोज़ करेगी तुमसे लेकिन
जब तुम बस एक कप चाय बनाके पिलाओगे न
सबसे तुम्हारी तारीफ़ कर फूली नही समाएगी ।
बात बात पर तुम्हे उलाहने देगी
लेकिन एक बार तुम्हारे प्यार से देखने भर से
उसे तुमसे और प्यार हो जाएगा,
न जाने उस लड़की को तुमसे कितनी लड़ाई करनी होती है
लेकिन देखो न जब तुम ये कह देते हो बहुत
प्यार है तुमसे आंखों में आंसू भर तुम्हारी बाहों में सिमट जाएगी
तुम्हारे प्रति जो भी उसके मन मे आएगा कह देगी
बेधड़क बिना सोचे क्योंकि वो जानती है तुम सिर्फ उसके हो
लेकिनजब वो देखेगी उसके आंसुओ से
उसके रूठने सेउसकी शिकयतों से
तमाम दी गयी उलहनाओं से
तुम्हे कोई फर्क नही पढ़ता
वो धीरे धीरे रूठना छोड़ देती है
अपने आंसुओं को घोट लेती है भीतर ही
मुस्कुरा कर देने लगती है तुम्हारी हर बात का जवाब
समेट लेती है खुद को स्वयं तक
ओढ़ लेती है खामोशी की एक चादर
और तुम समझते हो सब ठीक हो गया
क्यूँ नही समझ पाते कि वो शांत नही मृतप्राय हो चुकी है
खुद से ही घोंट देती है अपने भावनाओं का गला
और वो स्त्री जो अब तुम्हारे पास है न
वो तुम्हारी नही है...।
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