आँधी आ ही जाती है

आँधी आ ही जाती है

हल्की-सी आँधी में भी
डालियाँ गिर पड़ती हैं
अक्सर उन्हीं के सिर पर
जिनके हाथों ने
संभाल कर रखा था बीज
और सही समय आने पर
मिट्टी में दिये जाने से
हुआ था वह अंकुरित।

फूटी थी उसकी कोंपलें
तो उन्हीं हाथों ने किया देखभाल
उन्हें सींचा
उन्हें पाला
उन्हें पोसा
नन्हे बीज से
फलदार और छायादार
विशाल वृक्ष बनाया।

पर वह सृजक जब-जब
जाता है उस वृक्ष के नीचे
थोड़े फल और थोड़ी छाया की चाह में
तब-तब पता नहीं क्यों ?
आँधी आ ही जाती है।


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