जब औरतें बगावत पर उतर आएंगी
"जब औरतें बगावत पर उतर आएंगी"
जब औरतें बगावत पर उतर आएंगी
वे नहीं चाहेंगी उठकर सुबह से शाम तक
रोजमर्रा के कामों में जुटना ,
नहीं चाहेंगी तुम्हारे चाय और नाश्ते की
फरमाइशें पूरी करना, बच्चों को स्कूल भेजना
तुम्हारा लंच तैयार करना व समय से
तुम्हारे कपड़ों को इश्तरी करना
तुम चिल्लाओगे फिर भी वे अनसुना कर
सोयी रहेंगी ठाठ से बिस्तर पर ।
तुम अब बढ़ जाओगे आगे ,जड़ने उनको तमाचा
पर वे खींच लेंगी अपनी ओर उठते हाथों को छटाक से
और गुस्से से मरोड़ देंगी ,तुम भयभीत होकर पीछे हट जाओगे।
रोते हुए बच्चों को तुम्हे सौंप कर
चल देंगी खुद को संवारने कमरे में ,
देखेंगी पूरी फ़ुरसत से टीवी पर अपना
मनपसंदीदा धारावाहिक ।
धूल खा रही किताबों की अलमारियों से चुनेंगी
अपनी मनपसंदीदा किताब और फूंक मार साफ करेंगी
वर्षों से उस पर जमी धूल को।
चढ़ाएंगी चूल्हे पर एक कप चाय
और बैठ जाएंगी फ़ुरसत से बालकनी में किताब पढ़ने
सालों बाद बिना किसी विघ्न के पढ़ेंगी पूरी एक किताब ,
इसी तरह संगीत प्रेमी औरतें बैठ जाएंगी
अपना मनपसंदीदा संगीत सुनने ।
नृत्य प्रेमी औरतें जी भर कर करेंगी मार्गी नृत्य
व कला प्रेमी औरतें रच देंगी ब्रह्मांड कैनवास पर ।
दुनिया की सभी औरतें फिर सालों बाद जी पाएंगी
अपने भूले बिसरे बचपन को ,
उठाएंगी फोन की डिक्शनरी और फ़ुरसत से बैठ जाएंगी
अपनी सभी पुरानी सहेलियों से ढेरों बातें करने ।
जब औरतें बगावत पर उतर आएंगी
वे निकल जाएंगी शहर से दूर सहेलियों के साथ
महीने भर के लिए आराम से छुट्टी बिताने ,
बीच पर घूमने, समुन्द्र की लहरों से खेलने
वर्फ के गोले बनाकर एक दूसरे पर फैंकेंगी ।
और जो कोई लंपट करेगा जरूरत छेड़खानी की
तो टूट पड़ेंगी उसको सबक सिखाने
बिना किसी की परवाह किए ,
बगावत पर उतर आयी औरतें
भीगेंगी जी भर कर बारिश में ,
लुत्फ उठाएंगी लॉन्ग ड्राइव का ,
लिखेंगी ढेरों कविताएं बिना किसी विघ्न के
और निकल जाएंगी मजबूत इरादे लिए
पर्वतों को अकेले ही नापने ।
इस बीच तुम अपने सभी कामों को छोड़ संभालोगे
बच्चों व अपने माता पिता को , उनके
दर्द करते पैरों में तेल मालिश करोगे
खाने के बीच में ही उठकर कर रहे होंगे बच्चों की पॉटी साफ,
व घर के सभी कार्य ,रखोगे ध्यान सबकी जरूरतों का
थक के चूर होकर करोगे बच्चों को सुलाने की कोशिश ।
तुम झुंझलाना चाहोगे , गुस्सा उतारना चाहोगे औरतों पर
लेकिन वे अब नहीं फंसेंगी तुम्हारी पितृसत्तात्मक नीतियों में।
जब औरतें बगावत पर उतर आएंगी
वे नहीं चाहेंगी उठकर सुबह से शाम तक
रोजमर्रा के कामों में जुटना ,
नहीं चाहेंगी तुम्हारे चाय और नाश्ते की
फरमाइशें पूरी करना, बच्चों को स्कूल भेजना
तुम्हारा लंच तैयार करना व समय से
तुम्हारे कपड़ों को इश्तरी करना
तुम चिल्लाओगे फिर भी वे अनसुना कर
सोयी रहेंगी ठाठ से बिस्तर पर ।
तुम अब बढ़ जाओगे आगे ,जड़ने उनको तमाचा
पर वे खींच लेंगी अपनी ओर उठते हाथों को छटाक से
और गुस्से से मरोड़ देंगी ,तुम भयभीत होकर पीछे हट जाओगे।
रोते हुए बच्चों को तुम्हे सौंप कर
चल देंगी खुद को संवारने कमरे में ,
देखेंगी पूरी फ़ुरसत से टीवी पर अपना
मनपसंदीदा धारावाहिक ।
धूल खा रही किताबों की अलमारियों से चुनेंगी
अपनी मनपसंदीदा किताब और फूंक मार साफ करेंगी
वर्षों से उस पर जमी धूल को।
चढ़ाएंगी चूल्हे पर एक कप चाय
और बैठ जाएंगी फ़ुरसत से बालकनी में किताब पढ़ने
सालों बाद बिना किसी विघ्न के पढ़ेंगी पूरी एक किताब ,
इसी तरह संगीत प्रेमी औरतें बैठ जाएंगी
अपना मनपसंदीदा संगीत सुनने ।
नृत्य प्रेमी औरतें जी भर कर करेंगी मार्गी नृत्य
व कला प्रेमी औरतें रच देंगी ब्रह्मांड कैनवास पर ।
दुनिया की सभी औरतें फिर सालों बाद जी पाएंगी
अपने भूले बिसरे बचपन को ,
उठाएंगी फोन की डिक्शनरी और फ़ुरसत से बैठ जाएंगी
अपनी सभी पुरानी सहेलियों से ढेरों बातें करने ।
जब औरतें बगावत पर उतर आएंगी
वे निकल जाएंगी शहर से दूर सहेलियों के साथ
महीने भर के लिए आराम से छुट्टी बिताने ,
बीच पर घूमने, समुन्द्र की लहरों से खेलने
वर्फ के गोले बनाकर एक दूसरे पर फैंकेंगी ।
और जो कोई लंपट करेगा जरूरत छेड़खानी की
तो टूट पड़ेंगी उसको सबक सिखाने
बिना किसी की परवाह किए ,
बगावत पर उतर आयी औरतें
भीगेंगी जी भर कर बारिश में ,
लुत्फ उठाएंगी लॉन्ग ड्राइव का ,
लिखेंगी ढेरों कविताएं बिना किसी विघ्न के
और निकल जाएंगी मजबूत इरादे लिए
पर्वतों को अकेले ही नापने ।
इस बीच तुम अपने सभी कामों को छोड़ संभालोगे
बच्चों व अपने माता पिता को , उनके
दर्द करते पैरों में तेल मालिश करोगे
खाने के बीच में ही उठकर कर रहे होंगे बच्चों की पॉटी साफ,
व घर के सभी कार्य ,रखोगे ध्यान सबकी जरूरतों का
थक के चूर होकर करोगे बच्चों को सुलाने की कोशिश ।
तुम झुंझलाना चाहोगे , गुस्सा उतारना चाहोगे औरतों पर
लेकिन वे अब नहीं फंसेंगी तुम्हारी पितृसत्तात्मक नीतियों में।
Comments
Post a Comment