काना फ़ुसी
कुछ लिखकर मिटा देना
कुछ कहकर मुकर जाना
ज़माने की ये रिवायत
बड़ी तकलीफ़ देती हैं
कुछ अपनो का साथ
कुछ ग़ैरों की बात
कुछ बदलते हालत
बड़े तकलीफ़ देते हैं
कुछ अनकही बातें
कुछ दर्द भरी रातें
कुछ ग़मों की मुलाक़ातें
बड़ी तकलीफ़ देती हैं
कुछ स्वार्थी रिश्ते
जीवन भर जिनमे पिसते
लोगों के सुनते ताने
बड़ी तकलीफ़ देते हैं
दुनिया की काना फ़ुसी
मन होता जिससे दुखी
मिट जाती जीवन की ख़ुशी
बड़ी तकलीफ़ देती हैं
कुछ कहकर मुकर जाना
ज़माने की ये रिवायत
बड़ी तकलीफ़ देती हैं
कुछ अपनो का साथ
कुछ ग़ैरों की बात
कुछ बदलते हालत
बड़े तकलीफ़ देते हैं
कुछ अनकही बातें
कुछ दर्द भरी रातें
कुछ ग़मों की मुलाक़ातें
बड़ी तकलीफ़ देती हैं
कुछ स्वार्थी रिश्ते
जीवन भर जिनमे पिसते
लोगों के सुनते ताने
बड़ी तकलीफ़ देते हैं
दुनिया की काना फ़ुसी
मन होता जिससे दुखी
मिट जाती जीवन की ख़ुशी
बड़ी तकलीफ़ देती हैं
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