"कच्ची नीम की निम्बौरी सावन जल्दी अईयो रे.........''
सावन मनभावन हम सभी के जीवन में मनभावन सावन से जुड़ी कुछ खट्टी-मीठी यादें ,कुछ किस्से-कहानियाँ जरुर होते हैं । किसी दोस्त,परिवार या प्यार के साथ बीता कोई बरसात का दिन और कुछ नही तो बचपन में अपने शरारती मनभावन सावन दोस्तों के साथ मिलकर झमाझम बरसात में की गई ढेर सारी शैतानियाँ,इन्हें तो कोई भुला ही नही सकता ।ये टिप टिप करती बूँदें जाने क्या -क्या भूला बिसरा याद दिलाती हैं ! यादों का शहद घुला होता है इन बूंदों में ...! ये बूँदें बहुत कुछ कहती है गुनगुनाती है पर चौतरफा शोर से घिरे हुए हम इन्हे अनसुना कर देते है । ये और-और की तृष्णा औरों से ज्यादा जोड़ने की चाहत और बाहर -भीतर के शोर से घिरे हम जब अपनी ही आवाज़ को अनसुना कर देते है तो भला बूँदों की आवाज़ को कैसे सुनेंगे !! वरना कौन ऐसा है जिसे झमाझम बारिश को देख बचपन की शैतानियां याद ना आती हो ! बूंदों के हथेलियाँ को छूते ही यादों के सन्दूक खुद व खुद खुल जाते हैं । आज सावन को खिड़की से देखते हुए जब छन -छन करती बूँदों के सुर में पत्तों को थिरकते देखा तो अहसास हुआ कि जीवन की आपाधापी में जाने कब इतने व्यस्त...

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