और उसकी नींद?



"माँ माफ कर देना आँख नही खुल पाई।"सृष्टि ने सास के पैर छूकर डरते हुए कहा।
"नयी बात कौन सी है इसमें?तुम्हारी तो आदत हो गई है देर से उठने की।"सास ने मुँह बनाते हुए कहा।
"आलर्म लगाया था माँ पर..।"
"पर नींद आ गई यही ना!तुम्हें पता है घर में मेहमान हैं तुम्हारे यह लक्षण ठीक है क्या?घर की बहू समय पर न उठे न समय पर पूजा करे तो घर में समृद्धि आयेगी क्या?"सास ने गुस्से से सृष्टि को कहा।
"वैभव कहाँ है सृष्टि?"पीछे ने किसी ने पुकार कर कहा।
"वह सो रहे हैं मौसीजी।"मौसी को प्रणाम करते हुए वह बोली।
"आठ बज रहे हैं कितनी देर सोता है यह लड़का?"मौसी ने दोबारा पूछा।

"अरे दीदी!थक जाता है दिनभर।सोने दो।उठ जायेगा नौ बजे तक।इतने बजे ही उठता है।फिर तो दिनभर दुकान पर खपता ही रहता है बेचारा।"सृष्टि की सास ने जवाब दिया।
"और सृष्टि!वह नही थकती?दिनभर घर के काम। वह कौन सा आराम करती है दिन में।"हँसते हुए मौसी ने कहा।
"रातभर आराम ही तो करती है।"सास ने बुरा सा मुँह बनाकर कहा।
"तुम्हारा बेटा करने देता होगा आराम?कभी सृष्टि की आँखों को ध्यान से देखा है!तुम्हें उसकी आँखों में नींद दिखाई नहीं देती?"मौसी ने कहा।

"क्या जिज्जी आप भी..हम भी तो सास के उठने से पहले उठ जाते थे।हमारी कौन सा नींद पूरी होती थी।"

"तो अपनी नींद का बदला बहू से ले रही हो?"



"यह क्या

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