प्रेम_में_डूबे_हुए_मासूम_से_लड़के
हाँ_ये_सच_है
सभी लड़के एक जैसे नहीं होते ।
कुछ होते हैं बहुत ही प्यारे
हर किसी से हँस कर मिलने बाले
छोटी छोटी बात पर मदद करने के लिए तैयार
उन्हे भाता है रफ़ी साहब के गानें (बहारों फूल बरसाओ )
उन्हें नहीं अच्छा लगता है यो यो हनी सिंह
उन्हें लुभाती हैं आशा पारेख की अदाएं
पलकें झपकाना जया भादुरी के गुड्डी मूवी का वो किरदार
एक अल्हर सी लड़की का
उन्हें नहीं पसंद आता नंगेपन की नुमाईश
उनकी अपनी ही दूनियाँ होती है
सचमुच कुछ लड़के होते हैं बहुत मासूम शर्मीला सा दुनियाभर के छ्ल प्रपंच से दूर ....
उन्हें पसंद आती हैं दुपट्टा के कोने को मोड़ती हुई
सकुचाई हुई लड़कियाँ
#और
एसे में अगर उसे प्रेम हो जाय तो क्या कहने
हो जाता है राजेश खन्ना की तरह अकेले में बावरा-फ़क़ीरा सा
वो जीने लगता है सिक्सटीज-सैवेंटीज की मूवी को
उसे मजनू नहीं कन्हैया बनना अच्छा लगता है
वो रखने लगता है ख्याल अपनी प्रेमिका का
अपनी जान से ज्यादा चाहने लगता है उसे बचाना चाहता है दुनियां की नजरों से
उसकी सभी परेशानियां लगने लगती है अपनी
#बड़ी_अभागन_होती_है_वैसी_लड़की
जो छोड़ आती है उस प्रेमी को अन्तिम के कटु अनुभव के साथ (वजह चाहे जो भी हो अलग होने की )
#फिर_भी
वो लड़का जबरदस्ती नहीं करता
उसे रूसवा भी नहीं करता तेजाब फेंकने नही जाता उसके चेहड़े पर
वो सम्मान करता है उस फैसले की
वो सहज ही मान जाता है अपनी नीयत को
और समेत लेता है खुद को खुद में जाहिर भी नहीं करता अपना दर्द
इस बीच कयी चीज जो उसके भीतर टूटती है
#दिल #विस्वास #भरोषा #और_उसका_आत्मविस्वास
जो बदल देता है उसका नजरिया दुनियाँ को देखने का
फिर कोई मायने नहीं रखता ये प्रेम
क्युकि वो मानता है कि प्रेम तो बस एक बार ही किया जाता है न....
हाँ फिर एक शहद जैसा स्वाभाव बाला शक्स कम हो जाता है इस कड़वी दुनियां मे
वो अधूरा प्रेम उसका स्वाभाव बदल जाता है ...!
#जैसे
कोई निकाल ले गया हो कोई सीपियों से मोती!
जैसे जराऊ अंगूठी का खो गया हो नगीना!
जैसे हरसिंगार के फूल झर गए हो सारे !
जैसे तेल के बिना फरफरा रही हो बाती!
जैसे मोड़ा जा चुका हो कोई उपन्यास पढ़े जाने के बाद।
Comments
Post a Comment