कुछ अपने दिल की
पहले संपन्नन नही थे ।
लेकिन देशभक्त थे।
ताक़तवर नही थे।
पर किसी से डरते नही थे।
विकसित नही थे।
अपनी एक पहचान रखते थे।
आज सम्पन्न हैं।
लेकिन डरते हैं।
विकसित है।
पर अपनी खुद कि
सोच नही रखते।
अपने लोगों की
नज़रों की परवाह नही है ।
पर दुनिया की नज़रों की
काफ़ी अहमियत है।
देशभक्ति को
नफ़ा नुक़सान में तौलते हैं ।
क्या पहले अच्चछे थे ।
या अब अच्चछे हैं।
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