मैं और वो

मैं और वो

मैं अपने शहर होता हूँ
वो अपने शहर होती है
मैं आहें यहाँ भरता हूँ
वो पगली वहाँ रोती है
मैं फांके यहाँ करता हूँ
वो भूखी वहाँ होती है
मैं गिनता हूँ यहाँ तारे
वो जागी वहाँ होती है

मैं बन जाता हूँ बादल सा
वो बूंदों सी बरसती हैं
मैं जाड़े की सुबह सा हूँ
वो बनकर ओस गिरती है
मैं हूँ नदी... वो किनारा
वो मेरे साथ चलती है
मेरी हल्की छुअन से वो
बड़ी जल्दी बहलती है

मैं सोंधी चाय कुल्हड़ की
वो बनकर भाप उड़ती है
मैं प्याला खीर का कोई
वो शक्कर जैसी घुलती है
मैं लहसुन की कसक जैसा
वो अदरक सी मचलती है
मैं इक सेंके हुए ब्रेड सा
वो मक्खन सी पिघलती है

मैं ऐसा हूँ ! वो ऐसी है !
मैं कैसा हूँ? वो कैसी है?
मैं कितना उसके जैसा हूँ?
वो कितनी मेरी जैसी है?
मैं पूरा उसके जैसा हूँ
वो पूरी मेरी जैसी है
मैं पूरा उसके जैसा हूँ
वो पूरी मेरी जैसी है


Comments

Popular posts from this blog

मेरे बेटे

"कच्ची नीम की निम्बौरी सावन जल्दी अईयो रे.........''

ऐसे तो नहीं चलेगा न।