मेरे पिता

“मेरे पिता” मेरे जीवन के गुरु है
उनसे ही होता मेरा जीवन शुरू है
वो मेरी ख़ुशियों का आधार है
उनमे ही बसता मेरा पूरा संसार है
जब से मैंने होश सम्भाला है
खुद को मिटाकर उन्होंने मुझे पाला है
अनेको दुःख दर्द को सहते हुए
दुनिया के ताने सुनते हुए
उत्तरदायित्वों की चक्की में पिसते हुए
जीवन में संघर्ष करते हुए
मैंने देखा है फिर भी उन्हें
अपने ग़मों को छुपाकर हँसते हुए
दुनिया के भव सागर में
जीवन के तूफ़ानो में
हँसी ग़मों के तरानो में
उम्मीदों के आशियाने में
मैंने देखा है उन्हें
परिवार की नैया किनारे लगाते हुए
बच्चों की ख़ुशी के लिए
कुल की मर्यादा के लिए
समाज की व्यवस्था के लिए
अपनो से दूर जीने को मजबूर
मैंने देखा है उन्हें
संसार के चक्रव्यूह में
अभिमन्यु सा अकेले लड़ते हुए
खुद के लिए त्याग
परिवार के लिए प्यार
बच्चों को दुलार
जीवन की मझधार
मैंने देखा है उन्हें
तूफ़ानो से लड़ते हुए
समाज में फैले भक्षकों के बीच
वो मेरे जीवन का रक्षक है
अनुभव का सागर है
प्रेम के महासागर है
ख़ुशियों के आगर है
मेरे पिता मेरे जीवन की
   “स्नेह गागर” है

           

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