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Showing posts from 2021

क़िस्से-कहानियों का सताया हुआ लोकतंत्र

हमें बचपन से यह पढ़ाया गया है कि फलाने राजा ने ख़ुश होकर फलाने व्यक्ति को स्वर्ण मुद्राएँ दीं। बस यहीं से हमारे मस्तिष्क को कैप्चर करने का खेल शुरू हो गया। हम कलाकार हैं तो अपनी कला से राजा को ख़ुश करने में लगे रहे। हम विद्वान हुए तो अपनी विद्वत्ता से राजा को ख़ुश करते रहे। हम चतुर हुए तो अपना समस्त चातुर्य राजा को ख़ुश करने में झोंक दिया। बुद्धिमान हुए तो बुद्धिमत्ता राजा को ख़ुश करने में जुट गयी।  मतलब यह कि कला, विद्वत्ता, चातुर्य और बुद्धिमत्ता; राजा से स्वर्ण मुद्राएँ पाने की होड़ में व्यस्त हो गयीं और राजा इन सबको काम पर लगाकर शासन में अपनी मनमानी करके ख़ुश रहा।  इन्हीं कहानियों ने हमें यह भी बताया कि नगर की समस्त सुंदर कन्याओं का अंतिम उद्देश्य यही है कि राजकुमार उनके सौंदर्य पर मोहित हो जावे। इसलिए आज भी सत्ताधीशों के राजकुँवर सुन्दर कन्याओं पर आकृष्ट होकर उनका जीवन धन्य करते पकड़े जाते हैं। इन कहानियों के अनुसार राजा के दो ही काम थे- प्रथम, अपने मंत्रियों से ऊल-जलूल सवाल पूछना और द्वितीय, आखेट करना। इन दोनों से जो समय बचता था, वह रूठी रानी को मनाने में व्यतीत हो जाता था। मंत्र...

जन्म कुंडली

  जब दोनों भाई राजकीय सेवा में चयनित हो गए तो अपने-अपने परिवार सहित सरकारी भवन में रहने चले गए! अब बूढ़े माता-पिता की पूरी जिम्मेदारी वैष्णवी पर आ गई! उसने भी मां-बाप की देखभाल में जी जान लगा दिया! लेकिन इसका परिणाम यह हुआ कि पहले उसके विवाह की चिंता करने वाले मां-बाप अब बिल्कुल उदासीन हो गए!  उसकी उम्र बढ़ने लगी और शादी का जिक्र घटने लगा!  शुरू में ऐसे रिश्ते ढूंढे गए जिसमें मां-बाप साथ रह सके, पर बात बनी नहीं!  धीरे धीरे उम्र इतनी हो गई कि अच्छे रिश्ते आने बंद हो गए! अपनी सहेलियों के जोर देने पर जब वैष्णवी ने स्वयं के स्तर पर रिश्ता ढूंढना शुरू किया तो चालीस-चालीस साल के कुंवारों ने ऐसी-ऐसी बातें कीं, कि उसे उबकाई आने लगी!   माता-पिता तो उदासीन थे ही, अब उसने भी शादी के बारे में सोचना छोड़ दिया!  एक दिन ऑफिस से लौटी तो दरवाजे पर अपना जिक्र सुनकर ठिठक गई!  पापा के खास दोस्त मिश्रा अंकल से पापा कह रहे थे- "क्या बताऊं मिश्रा! मैंने तो कितने ही लड़के ढूंढे, पर वैष्णवी को कोई पसंद ही नहीं आता! अब इतनी पढ़ी लिखी लड़की की शादी उसकी मर्जी के बगैर तो नही...

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The whole world paused this morning.  Do you know why? Because an 8 year old’s tank was empty.  The kids had already started their school day at their desks and I was preparing to leave for work when I noticed my littlest standing in the bathroom wiping his face.  I paused at the door and asked if he was okay. He looked up with tears silently dripping and shook his head. When I questioned if something happened, again he shook his head.  So I sat on the side of the tub and pulled him in my lap. I told him sometimes our heart tanks feel empty and need to be refilled.  He cried into my chest and I held him tight.  I asked if he could feel my love filling him up?  A nod, and tears stopped...  I waited a minute...  ‘Has it reached your toes yet?’  He shook his head no...  ‘Okay dear. We will take as long as you need. Work doesn’t matter right now. School isn’t important either. This right here, is the most important thing today, okay?...

*🪔शुभ दीपावली*🪔

 *इस बार की दीपावली बहुत खास है,, इसलिए नहीं कि मेरे घर में बहुत शानदार महंगा पेंट हुआ या नहीं, इसलिए भी नहीं कि मैंने कोई महंगी कार या ज्वैलरी खरीदी या नहीं, न ही इस बात के लिए खास है कि मुझे बिजिनेस में बहुत बड़ा मुनाफा हुआ या नहीं, या मेरी सैलरी में बहुत वृद्धि हुई या नहीं, इसलिए तो बिल्कुल भी नहीं कि मेरे घर में ढेरों पकवान बने है या नहीं, और इसलिए भी नहीं कि परिवार में सबको नए महंगे कपड़े या घर में खूब सारी सजावट या रात भर महंगी आतिशबाजी हुई या नहीं।।* *इस बार की दीपावली खास है , बहुत ज़्यादा खास,,क्योंकि इस दीपावली को मैं अपने और अपने पूरे परिवार को जीवित, सांस लेता हुआ, हंसता हुआ देख पा रहा हूँ, इस बार की दीपावली इसलिए खास है क्योंकि मुझे भरोसा हुआ कि कुछ ऐसे लोग है जिनको एक आवाज़ देने पर मदद के लिए हमेशा तैयार मिलेंगे, इस बार की दीपावली इसलिए खास है कि प्रभु ने अपनी विशेष कृपा मुझ पर बनाई रखी और मुझे इस बात का अहसास दिलाया कि ज़िन्दगी में ऊपरी चमक दमक, पैसा, प्रॉपर्टी, शानोशौकत बस एक छलावा और इस पर ज़रा सा भी इतराने या घमंड करने की ज़रूरत नही है। इस बार की दीपावली इसलिए खास है क्य...

ऊंच नीच

प्रसाद जी अपने बेटे की रिसेप्शन पार्टी में मुझ पर भड़के हुए थे मैं उनके बेटे की शादी में जो नही गया था । मुझे दो शादी के कार्ड मिले थे एक प्रसाद जी के बेटे के शादी का दूसरा कुमार साहब के बेटे की शादी का । कार्ड देने आये प्रसाद जी बोले , " तन के ठसके से चलो यार बारात में ! लड़के वाले हो लड़के वाले ! रौब पड़ना चाहिए बेचारे लड़की वालों पर ! वो भी क्या याद रखेंगे प्रसाद की बारात की हनक को !"  मुझे बड़ा अजीब लगा सुन कर ! खुद की दो दो बेटियाँ थीं शादी की पर वधूपक्ष के लिए ऐसी सोच ? बस शादी में जाने का मन ही नही हुआ ।  कुमार साहब ने भी कार्ड दिया और स्नेह से मेरा हाथ पकड़ कर बोले " आपको चलना ही है मेरे साथ शुभकार्य है ! घर मे लक्ष्मी लानी है लक्ष्मी ! चार ज़िम्मेदार आदमी होने चाहिये की नहीं मेरे साथ ! सम्मान विधि विधान में यदि मुझसे कोई ऊंच नींच हो गयी तो क्या सोचेंगें वधु के माता पिता ! " 

जंजीर

   "कब तक अपने पिता के घर में बैठी रहोगी सौम्या?. अपनी पसंद से ही सही विवाह कर तुम भी अपनी जिंदगी में आगे बढ़ने की कोशिश क्यों नहीं करती!".  आज सौम्या से मिलने आई उसकी बचपन की सहेली और अब दो प्यारे-प्यारे बच्चों की मांँ बन चुकी राधिका ने बातों ही बातों में सौम्या को सलाह दे दी लेकिन सौम्या ने उसे टालना चाहा.. "मेरी छोड़!.तू सुना जीजा जी कैसे हैं?" "वो ठीक है!" राधिका मुस्कुराई। "और बता!. घर में सब कैसे हैं?. तेरी सास पहले की तरह ही बात-बात पर तुझे ताने देती है या अब उनके व्यवहार में कुछ सुधार हुआ है?" सौम्या ने राधिका की खिंचाई की लेकिन राधिका मुस्कुराई.. "वह सब तो पुरानी बातें हैं सौम्या!.अब मेरे सास-ससुर का व्यवहार मेरे प्रति बिल्कुल बदल चुका है मेरे पति के साथ-साथ अब ससुराल के सभी लोग मुझे बहुत प्यार करते हैं और पता है!..इन बच्चों के बिना तो इनके दादा-दादी का मन ही नहीं लगता।" राधिका के चेहरे की ताजगी और चमक उसके सुखी परिवारिक जीवन की गवाही पहले ही खुलकर दे रहा था। "यह तो तुमने बहुत अच्छी बात बताई राधिका!" सौम्या ने अपनी सह...

नासमझ_आज़ादी

“मैंने रित्विक के साथ रहने (लिव-इन) का फैसला कर लिया है,” रिया ने एक एक शब्द पर जोर दिया। वह गुड़गाँव में एक पीजी में रहती थी, वीकएण्ड पर घर आई थी। उसके ये कहते ही घर में जैसे कि भूचाल आ गया था; बस दीवारें नहीं हिलीं थी और छत भी सलामत थी। अभी तक सिर्फ माँ ने ही रित्विक का नाम पहले सुन रखा था, लेकिन उसे भी ज्ञात न था कि रिया उससे प्रेम करती है। रिया ने अभी अभी एमबीए पूरा करके एक कंपनी में सेल्स एडवाइजर की पोस्ट पर जॉयन किया था। रिया की जॉब भी रित्विक ने ही लगवाई थी। वह उसी कंपनी में सेल्स मैनेजर था। “ये कैसे होगा? बिना शादी के तुम नासमझ_आज़ादी_WrongTurnउसके साथ कैसे रह सकती हो? अगर तुम्हें उससे प्रेम है, तो थोड़ा रुको, उसके माता-पिता से हम शादी की बात करते हैं, फिर रहो, कौन रोकता है,” उसके पिता खुले विचारों वाले थे। “रित्विक अभी दो साल तक शादी नहीं कर सकता। पहले उसकी बहन की शादी होगी, इसी साल, फिर हमारी शादी होगी,” रिया को जैसे सारी योजना समझा दी गई थी। “यदि रित्विक को तुमसे प्रेम है, तो वह रुकेगा न, तुम्हारे लिए! या तुम ही मरी जा रही हो, उसके साथ लिव-इन के लिए?” अब बड़े भैय्या बोले। “भ...

वृहन्नला

मुहल्ले में वो दो तीन दिन पहले ही आई थी।लगभग पांच फीट नौ-दस इंच की लंबाई और स्लिम यानी फिट। अब चुकि स्त्री वेश धारण किया था तो स्त्रीलिंग का प्रयोग ही उचित रहेगा। अब ना वो स्त्री थी ना पुरुष तो,स्त्री -पुरुष दोनों निश्चिंत हुए। रेजिडेंट्स को कोई दिक्कत भी नहीं हुई। जिस घर में वो रहने आई थी, वो एक ईमानदार , सख्त और सेवानिवृत्त सेना के ऑफिसर का घर था तो सब यूं भी निश्चिंत से थे।सब को अपने काम से काम, वार्तालाप की संभावना भी कम। मुहल्ले में खुसर - फुसर जायज थी, लेकिन ज्यादा पूछताछ कोई नहीं कर पाती। उस घर के मालिक स्वयं सेवानिृत्ति के बाद गांव जाकर बस गए थे, और केयर टेकर देखभाल करता। कभी कभी घर देखने आते। अतः उनके निर्णय पर किसी को कोई आशंका नहीं थी। लेकिन मुझे हमेशा उत्सुकता रहती, उसके बारे में जानने की। प्रायः हर सुबह नौ बजे साधारण सिफॉन की साड़ी, छोटी मगर सुंदर आंखों में हल्का काजल और बड़ी सी बिंदी जो शायद वो अपने पहचान के लिए लगाती थी;लगाए घर से निकलती। चाल- ढाल से वही लगती जो वो थी।पर उसकी खूबसूरती और फिटनेस में अलग सा आकर्षण था कि मेरे सहित और भी स्त्रियों के मन में एक पल के लिए जरूर...

बड़ों की सेवा करना एक श्रेष्ठ धर्म है।

आज सुगंधा के कदम वापस गाँव की ओर लौटने को आतुर हैं। क्या गाँव की खुशबू उसे अपनी ओर खींच रही है? पच्चीस वर्ष पहले गाँव छोड़ा था उसने, पति सुनील के साथ, बेहतर ज़िंदगी की तलाश में। बच्चों के पालन-पोषण में ज़िंदगी कब इतना आगे निकल गई पता ही नहीं चला!  जब सुनील की एक्सीडेंट में मृत्यु हुई थी तो दोनों बच्चे पढ़ ही रहे थे। सुनील की पेंशन आती थी पर वह बढ़ते बच्चों की ज़रूरतों को पूरा करने के लिए नाकाफ़ी था। घरवालों ने वापस लौटने के लिए कहा पर बच्चों का भविष्य बनाने के लिए वह शहर में ही रुक गई। एक स्कूल में नौकरी मिलने से आर्थिक रूप से काफी सहूलियत हो गई थी। परन्तु ये बातें तो पुरानी हो गई हैं। अब तो दो साल से शिवांगी व शिवम दोनों ही नौकरी कर रहे हैं, एक बंगलौर में, दूजा पुणे। और वह यहाँ मेरठ में अकेले ही रह रही है। सोचा था कि नौकरी व सखियों में मन लग जाएगा परन्तु रोज़ लौटते वक्त खाली घर काट खाने को दौड़ता है। कितना मुश्किल है अकेले रहना! डिप्रेशन सा रहने लगा है उसे! कोई तो हो घर में! बच्चे पास बुलाते हैं, वह छुट्टियों में गई भी थी पर वह दुनिया रास नहीं आई उसे। छोटे शहर की वो... उस भागते-दौड़ते महानग...

बस यूँ ही

दो साल पहले ही शादी हुई है मेरी , यूँ तो सब ठीक है पर एक दिन मेरा ध्यान गया कि मेरी पत्नी धारा कपड़े सुखाने के लिए तार पर डालते समय अधोवस्त्र भी ऐसे ही खुले में फैला दिया करती है । मुझे याद आया कि जब माँ कपड़े सुखाया करतीं थीं तो कभी भी उनके सुखाए अधोवस्त्र यूँ दिखाई नहीं देते थे । क्यों ? मन सोचने लगा तो समझ आया कि वे हमेशा किसी कपड़े के नीचे उन्हें डाला करतीं थीं ताकि वे सबकी नज़र में ना आएँ । माँ की मदद करने के दौरान जब हम दोनों भाई किसी भी अधोवस्त्र को खुले में डाल देते थे तो माँ उन्हें हमेशा दूसरे कपड़े से ढँक देतीं थीं । मैंने धारा से कहा कि तुम अधोवस्त्र किसी भी जगह क्यों फैला देती हो ?  उसने भी बेहद सरलता से उत्तर दिया इसमें हर्ज क्या है ? अधोवस्त्र हैं तो दिखेंगे ही !  ‘ पर दिखाने की ज़रूरत भी क्या  है ? ‘ मैं ने पूछा  ‘ और छिपाने की ?’ उसने सवाल किया । मेरे पास कोई जवाब नहीं था पर फिर भी मैंने उसे बताया कि माँ चूँकि अधोवस्त्र ढँक कर रखतीं थीं तो हमारी आँखें उन्हें यूँ देखने की अभ्यस्त नहीं हैं । इसके बाद मैंने सोचा कि अब मुझे ही समय के साथ , धारा के साथ ही ...

8 lessons from the professional world that I wish I knew when I'd just graduated (Nikyugi)

  1. Learn to say no - To night outs, to some professional opportunities and occasionally to certain relationships. Saying ""Yes"" to everything will land you in places you wish to be rescued from.   2. Say yes to good energy - Whether its people or activities, look for the places where you feel a RISE in energy once your interaction with the place is over. Your energy levels are directly linked to your INSTINCT. Your instinct will shape up your career path for you if you let it. A drop in energy after an activity/meeting is a warning sign from your instinct.   3. Network is networth - Cliched but true. Learn to LEARN from everyone you meet. Even the bad ones. Keep the good ones close and work hard enough to become a ""good one"" yourself. Your network will grow in size and quality at the same pace that your achievement list grows. Work on both games!   4. Stay fit - No career exists without its ups & downs. Ups are easy to handle. Downs will...

इंसान

 पापा पापा मुझे चोट लग गई खून आ रहा है 5 साल के बच्चे के मुँह से सुन ना था की पापा सब कुछ छोड़ छाड़ कर गोदी में उठा उठा कर 1 किलो मीटर की दुरी पर क्लिंनिक तक भाग भाग कर ही पहुँच गए दुकान केस काउंटर सब नोकर के भरोसे छोड़ आये सीधा डाक्टर के केबिन में दाखिल होते हए डॉक्टर को बोले देखिये देखिये डॉक्टर मेरे बेटे को क्या हो गया डॉक्टर साहब ने देखते हुए कहा अरे जैन साहब घबराने की कोई बात है मामूली चोट हे ड्रेसिंग कर दी है ठीक हो जायेगा डॉक्टर साहब कुछ पेन किलर लिख देते दर्द कम होजाता अच्छी से अच्छी दवाईया लिख देते ताकि जल्दी ठीक हो जाये गांव भर जाये *डाक्टर* अरे जैन साहब क्यों इतने चिंतित हो रहे हो कुछ नही हुआ है 3-4दिन में ठीक हो जायेगा पर डॉक्टर साहब इसको रात को नींद तो आजायेगी न  *डॉक्टर* अरे हा भाई हा निश्चिन्त रहो   बच्चे को लेकर लौटे तो नोकर बोला सेड़जी आपका ब्रांडेड महंगा शर्ट  खराब हो गया खून लग गया अब ये दाग नही निकलेंगे *जैन साहब* कोई नी  ऐसे शर्ट बहुत आएंगे जायेंगे मेरे बेटे का खून बह गया वो चिंता खाये जा रही है कमजोर नही हो जाये तू जा एक काम थोड़े सूखे मे...

हरिशंकर परसाई जी की स्मृतियों को सादर नमन

1. निन्दा में विटामिन और प्रोटीन होते हैं. निन्दा खून साफ करती है, पाचन क्रिया ठीक करती है, बल और स्फूर्ति देती है. निन्दा से मांसपेशियां पुष्ट होती हैं. निन्दा पायरिया का तो सफल इलाज है. सन्तों को परनिन्दा की मनाही है, इसलिये वे स्वनिन्दा करके स्वास्थ्य अच्छा रखते हैं. 2. जूते खा गए! अजब मुहावरा है? जूते तो मारे जाते हैं। वे खाये कैसे जाते हैं? लेकिन भारतवासी इतना भुक्खड़ है कि जूते भी खा जाता है। 3. अश्लील पुस्तकें कभी जलाई नहीं गईं। वे अब  अधिक व्यवस्थित ढंग से पढ़ी जा रही हैं। 4. इस देश के बुद्धिजीवी शेर हैं, पर वे सियारों की बरात में बैंड बजाते हैं. 5. जो कौम भूखी मारे जाने पर सिनेमा में जाकर बैठ जाये, वह अपने दिन कैसे बदलेगी! 6. अच्छी आत्मा फोल्डिंग कुर्सी की तरह होनी चाहिये. जरूरत पडी तब फैलाकर बैठ गये, नहीं तो मोडकर कोने से टिका दिया. 7. अद्भुत सहनशीलता और भयावह तटस्थता है इस देश के आदमी में. कोई उसे पीटकर पैसे छीन ले तो वह दान का मंत्र पढने लगता है. 8. अमरीकी शासक हमले को सभ्यता का प्रसार कहते हैं. बम बरसते हैं तो मरने वाले सोचते है, सभ्यता बरस रही है. 9. चीनी नेता लडकों के ...

मैं न होता तो क्या होता...!!

 *एक बार कागज़ का एक टुकड़ा हवा के वेग से उड़ा और पर्वत के शिखर पर जा पहुँचा।पर्वत ने उसका आत्मीय स्वागत किया और कहा-भाई ! यहाँ कैसे पधारे ?* *कागज़ ने कहा-अपने दम पर।जैसे ही कागज़ ने अकड़ कर कहा अपने दम पर और तभी हवा का एक दूसरा झोंका आया और कागज़ को उड़ा ले गया।*  *अगले ही पल वह कागज़ नाली में गिरकर गल-सड़ गया। जो दशा एक कागज़ की है वही दशा हमारी है।*  *पुण्य की अनुकूल वायु का वेग आता है तो हमें शिखर पर पहुँचा देता है और पाप का झोंका आता है तो रसातल पर पहुँचा देता है।* *किसका मान ? किसका गुमान ? सन्त कहते हैं कि जीवन की सच्चाई को समझो। संसार के सारे संयोग हमारे अधीन नहीं हैं। कर्म के अधीन हैं और कर्म कब कैसी करवट बदल ले, कोई भरोसा नहीं। इसलिए कर्मों के अधीन परिस्थितियों का कैसा गुमान ?*  *बीज की यात्रा वृक्ष तक है,*   *नदी की यात्रा सागर तक है,*   *और...*  *मनुष्य की यात्रा परमात्मा तक..*  *संसार में जो कुछ भी हो रहा है वह सब ईश्वरीय विधान है,....*   हम और आप तो केवल निमित्त मात्र हैं,  इसीलिये कभी भी यह भ्रम न पालें कि... मै...

अब और मत झुकना

*पीठ में बहुत दर्द था* डाॅक्टर ने कहा अब और  मत झुकना  अब और अधिक झुकने की गुंजाइश नहीं रही झुकते-झुकते  तुम्हारी रीढ़ की हड्डी में  गैप आ गया है  सुनते ही हँसी और रोना  एक साथ आ गया... ज़िंदगी में पहली बार  किसी के मुँह से  सुन रही थी ये शब्द  "मत झुकना..." बचपन से तो  घर के बड़े, बूढ़ों   माता-पिता और समाज से यही सुनती आई है, "झुकी रहना..." नारी के  झुके रहने से ही बनी रहती है गृहस्थी... नारी के  झुके रहने से ही बने रहते हैं संबंध नारी के  झुके रहने से ही बना रहता है प्रेम...प्यार...घर...परिवार झुकती गई, झुकते रही, झुकी रही, भूल ही गई... उसकी कहीं कोई  रीढ़ भी है... और ये आज कोई  कह रहा है "झुकना मत..." परेशान-सी सोच रही है कि क्या सच में  लगातार झुकने से  रीढ़ की हड्डी  अपनी जगह से खिसक जाती है ? और उनमें कहीं गैप, कहीं ख़ालीपन आ जाता है ? सोच रही है... बचपन से आज तक क्या क्या खिसक गया उसके जीवन से कहाँ कहाँ ख़ालीपन आ गया उसके अस्तित्व में  कहाँ कहाँ गैप आ गया उसके अंतरतम में  ...

अब मुझे भी जाना है

 मृत सागर की तरह अब मुझे भी हो जाना है,, जिस तरह उसकी गहराई में,, उतर न पाता कोई लहरे उसे तैरा देती हैं, डूबने नहीं देती,, और बाहर की ओर धकेल देतीं हैं,,, उसी तरह मुझे समाहित नहीं करना कुछ भी भीतर मेरे,, मुझे भी उदासीन हो जाना है .. जिस तरह उसमें घनत्व की अधिकता है,, उसी तरह मुझे भी बुन लेना है अपनी अन्तरात्मा को सघनता से कि कोई न पहुच पाए वहां तक,, न कोई आघात,न कोई औषधि.. जिस तरह उसमें लवणता  सबसे ज्यादा है,, उसी तरह मुझे भी  मिठास छोड़कर खारा हो जाना है..।

मुनीम_साहब

हमारे यहाँ एक मुनीम साहब थे, जोड़ घटाने में अत्यंत निपुण। बाबूजी उनको समाधानी कहते थे, ऐसा नही है कि वे हर समस्या का समाधान करना जानते थे, लेकिन उनसे मिलकर समस्याग्रस्त व्यक्ति शांति का अनुभव करता था।  इसका कारण मात्र इतना था कि यदि किसी व्यक्ति ने अपनी किसी समस्या का ज़िक्र उनसे किया तो मुनीम साब तुरंत बताते की वे स्वयं उस समस्या से बहुत लम्बे समय से जूझ रहे हैं। यदि कोई उनके पास रोता हुआ पहुँचता तो मुनीम साहब उसकी बात सुनते-सुनते उससे भी अधिक ज़ोर से रोने लगते थे, मुनीम साहब को रोता देखकर वो व्यक्ति अपना रोना भूलकर उनको चुप करने में व्यस्त हो जाता था।  एक दिन मैंने जिज्ञासावश उनसे पूछा की वे ऐसा क्यों करते हैं ?  मुनीम साहब बोले- आदमी को समाधान से ज़्यादा तसल्ली, दूसरे की समस्या से मिलती है। अधिकतर लोगों को अपने दर्द की दवाई नहीं बल्कि हमदर्द चाहिए होता है, हमदर्दी दिखाने से उस पीड़ित व्यक्ति को लगता है की वो अकेला नहीं है जो कष्ट से जूझ रहा है, सम पीड़ा का भाव उसको चिंतामुक्त करते हुए आनंद से भर देता है। मैंने कहा- लेकिन इससे उनकी समस्या तो समाप्त नहीं होती, वो तो जैसी...

पिता_पुत्र की जोड़ी

  अगर कभी गौर किया हो तो पाएंगे पिता-पुत्र की जोड़ी बड़े कमाल की जोड़ी होती है | दुनिया के किसी भी सम्बन्ध में, अगर सबसे कम बोल-चाल है, तो वो है पिता-पुत्र की जोड़ी। एक समय तक दोनों अंजान होते हैं,  एक दूसरे के बढ़ते शरीरों की उम्र से, फिर धीरे से अहसास होता है, हमेशा के लिए बिछड़ने का । जब लड़का, अपनी जवानी पार कर,  अगले पड़ाव पर चढ़ता है, तो यहाँ,  इशारों से बाते होने लगती हैं,  या फिर, इनके बीच मध्यस्थ का दायित्व निभाती है माँ । पिता अक्सर पुत्र की माँ से कहता है,  जा, "उससे कह देना" और, पुत्र अक्सर अपनी माँ से कहता है, "पापा से पूछ लो ना" इन्हीं दोनों धुरियों के बीच,  घूमती रहती है माँ ।  जब एक,  कहीं होता है,  तो दूसरा,  वहां नहीं होने की,  कोशिश करता है, शायद,  पिता-पुत्र नज़दीकी से डरते हैं । जबकि,  वो डर नज़दीकी का नहीं है,  डर है,  उसके बाद बिछड़ने का ।  मैंने तो हमेशा देखा है भारतीय पिता ने शायद ही किसी बेटे को,  कभी कहा हो,  कि बेटा,  मैं तुमसे बेइंतहा प्यार करता हूँ । पिता के अनंत रौद्र ...

बुढ़ापा

   बुढ़ापा सबको आना है  मुझे आना है आपको आना है  बुढ़ापा जीवन का अंतिम पड़ाव है  यहां से पाप-पुण्य का पड़ाव है  आप बुजुर्गो की सेवा करते हो  आप स्वर्ग में जाते हो  आप बुजुर्गो की सेवा नहीं करते  आप नरक में जाते हो  यहीं से पाप पुण्य का पड़ाव है  बुढ़ापा जीवन बचपन से मिलता जुलता है  अपनों से रूठना बातों-बातों में चिढ़ाना  गुस्सा करना हठी होने लड़ना और झगड़ना ये बुढ़ापा का स्वभाव है जो हम सब में आता है  आज कई पीढ़ी समझते हैं  हमें बुढ़ापा नहीं आयेगा  हम अमर ही रहेंगे यूं ही रहेगें  हम कभी उनकी तरह नहीं बनेंगे  ऐसे में वे अपने बुजुर्गों को  दर किनार कर रहे हैं और वे  एकांत वासी बनने में मजबूर हो रहे है  आईये उन्हें समझें और उनके साथ रहें  उनका ही दिया आज सब कुछ हमारे लिए हैं  आईये उनको महसूस होनें ना दें वे बुजुर्ग है  उनके दोस्त बन कर उनके अनुभव को सीखें  आईये उन्हें समझें और उनके साथ रहे 

मिडल क्लास लौंडे

 मिडल क्लास लौंडे बेचारे... पढ़ना कुछ और चाहते हैं , पढ़ाया कुछ और जाता है , बन कुछ और जाते हैं ! पसन्द किसी और को करते हैं, प्यार किसी और का मिलता है शादी किसी और से हो जाती है ! चाय बना लेते हैं, कर्ज़ लेने और देने में जरा सी भी देरी नही करते ! रिश्तेदारों को शहर घुमाने की जिम्मेदारी यही निभाते हैं ! 4जी फोन लेने में इन्हें साल भर लगता है ! गैस भरवाने की जिम्मेदारी , सुबह दूध और शाम की सब्जी लाने जैसा कठिन और दर्दनाक काम भी यही करते हैं ! खुद की प्रेमिका की शादी में 'नागिन डांस' करने का गौरव केवलः इन्हें ही प्राप्त है ! आइसक्रीम की टेस्ट से इन्हें शादी में हुए खर्चों का अंदाजा लग जाता है ! लुसेंट इनकी जिंदगी में उस गर्लफ्रेंड की तरह होती है जो साथ तो रहती है लेकिन समझ कभी नही आती ! रीजनिंग के प्रश्न चुटकी में हल कर देने वाले ये मिडल क्लास लौंडे खुद की जिंदगी की समस्याओं में उलझे रह जाते हैं ! घर और अपनी 'जान' से किसी लायक बनने का वादा करके निकले ये मिडल क्लास लौंडे जब तक लायक हो के घर लौटते हैं तब तक उनकी जान 'दो चार जानो' की 'जननी' बन चुकी होती है ! पापा...

अपने होते हुए फरेबों की चिंता न करो दोस्त ।।

 ।। ए मेरे दोस्त ।। किसी को ज्यादा दिल से न लगाओ दोस्त । किसी को हद से ज्यादा पसंद न करो दोस्त ।। अपने ही पीठ पीछे खंजर खोंपते हैं यहां । किसी पर आंख बंद कर भरोसा न करो दोस्त ।। बीच रास्ते में हाथ छोड़ तमाशा देखते हैं । सभी को अपना मान खुशी न मनाओ दोस्त ।। चीनी को चींटी जैसे चिपक जाते हैं लोग । जानबूझकर खंडहर में न गिर जाओ दोस्त ।। अपने स्वार्थ के लिए हाथ बढ़ाते हैं लोग । सोच समझकर लोगों से हाथ मिलाओ दोस्त ।। अपने आप पर विश्वास रखना सदा ही यहां । जो छोड़ चले जाते हैं उन्हें मत पुकारो दोस्त ।। जो तेरे अपने हैं सदा साथ निभाते हैं यहां । अपने होते हुए फरेबों की चिंता न करो दोस्त ।।  

याद आ रहे है वो रिश्तें

 मेरी दुनिया टिकी है जिन स्तम्भों पर   याद आ रहे है वो रिश्तें       जो वक्त निकाल ,     लम्बा सफर तय कर       आते थे मिलने /      आँगन से विदा बखत        पलट पलट कर        हाथ हिलाते थे  ओझल होने तक / इंतज़ार करते थे शिद्दत से याद आ रहे है वो रिश्तें ..... ज़ेहन में कौंध रहे है अज़ीज चेहरे जो देर तक गले लग   नम कर देते थे सारे जज़्बात / जो करने को हैरान सुनाते थे  मनगढ़ंत किस्से ../ बनाने महफ़िल की लज्ज़त सुनाते थे लतीफ़े ढेरों  और कर देते थे नीम दोपहरिया गुलकंद / खुशी में दिल से होते थे शामिल  मुश्किल में बहलाते थे तसल्लियाँ दे वो स्तंभ याद आते है.... ये दुनिया मजबूत खगोलीय नियमों  पर नही टिकी , ना ही चक्कर लगाती है ग्रहों के जादुई खिंचाव से दुनिया तो टिकी है / उन लोगो से जिन्हें भरोसा है कि कुछ लोगों को उनसे बेहद प्यार है / फेरे लगाती है उन रिश्तों के जो उजालों को सराहते है / दुनिया टिकी उन लोगों के भरोसे जो नुकसान उठा कर भी भरोसा नही तोड़ते / म...

दुनिया थोड़ी सुंदर लगती रहे

 पिता कभी नहीं कहते  मेरे पास पैसे नहीं हैं माँ ने कभी नहीं कहा मेरी तबियत खराब है  मैंने कभी नहीं कहा आज खाने में नमक कम है शायद सच ना बोलने से  दुनिया थोड़ी सुंदर बनी रहती है कविता कभी किसी से नहीं कहती पृथ्वी वासनाओं का सुंदर विस्तार है मन कभी अपने गुण नहीं बताता आत्मा कभी नहीं कहती  मोक्ष मन को मिली भिक्षा है उसकी उपलब्धि नहीं फूल कभी नहीं बताते  उनके चेहरे पर खिला रंग  उनका लहू है जो तितलियों के काटने से बहा है किसान कभी नहीं बताते  खेती करना उनकी मज़बूरी है और किसी दिन मज़बूर होकर छोड़ देंगे खेती सुंदर इमारतें कभी नहीं बताती  उन्होंने पीया है मजदूरों का गाया गीत  और कोई मोल नहीं दिया उसका पानी कभी नहीं बताता  उसकी नमी  पहाड़ों के हृदय से लिया गया उधार है  सड़कें कभी नहीं बताती इन पर चलकर बस हम यात्रा नहीं करते पृथ्वी भी पहुँचती रहती है कहीं  हमारे साथ चल कर बहुत दूर आ गई है पृथ्वी अब लौटना चाहती है मगर लौट नहीं सकती  लोग इसे सभ्यता का विकास कहते हैं  हमारी देह  अनंत यात्राओं का वृतांत है हमारी आंखे...

कल और आज

   कल मैं, "मैं" था , आज भी मैं ,मैं ही हूँ, लेकिन कल और आज में , आकाश ,जमीन का अंतर आ गया । कल तक मैं सेवारत था , आज मैं सेवानिवृत हो गया । कल तक जिस कुर्सी पर बैठ कर   साधिकार शासन करता था , आज , उसी कुर्सी के लिए, मैं ,अनधिकृत हो गया । कल तक मैं आदरणीय ,सम्मानीय, पूज्य , माननीय आदि आदरसूचक , शब्दो से संबोधित किया जाता था , आज वही सामान्य हो गया ।   मैं जबतक सेवारत था ,  दिन के सामान प्रकाशित , ज्योतित और आलोकित था , आज मेरा एक तरह से , अवसान हो गया । प्रज्ज्वलित स्वरूप , एकाएक मंद हो गया । मैं सही अर्थ में ,मैं , नही रह गया और वो हो गया । इसी प्रकार तन में , जबतक सांसें रहती हैं , मैं नाम से पुकारा जाता हूँ , और सांसें बंद होने के बाद , मैं मैं नही रह जाता हूँ , लाश या बॉडी हो जाता हूँ । त्याज्य , अस्पर्शीय जो जाता हूँ । या तो जला दिया जाता हूँ , या मिट्टी के नीचे दबा दिया जाता हूँ । स्वर्गीय ,दिवंगत आदि हो जाता हूँ । लगभग यही स्थिति , पदस्थापित और स्थान्तरित पदाधिकारियों की होती है ।  जबतक जिलाधिकारी ,एस पी , अपने पदों...

देश जरूर काम आया

 मैं आने वाली  नस्लों के लिए  ये साफ लिख रहा हूँ कि जरूरत के दौर में  सरकार काम  नहीं आयी किसी के- पर  देश जरूर काम आया- हर गालों के आँसू  अजनबी कांधों पर गिरे- कटे हुए जंगल में  हम सब  एक दूसरे की छाँव में खड़े हुए। बुझते वक़्त में हर घर ने दूसरे घर  के लिए चूल्हा जलाया। मेरे बच्चों- सरकार नहीं आयी काम- देश जरूर काम आया।।

बूढ्ढे बुढ्ढी की नोंक-झोंक

इन 60-65 साल के अंकल आंटी का झगड़ा ही ख़त्म नहीं होता... एक बार के लिए मैंने सोचा अंकल और आंटी से बात करूं क्यों लड़ते हैं हरवक़्त, आख़िर बात क्या है...  . फिर सोचा मुझे क्या, मैं तो यहाँ मात्र दो दिन के लिए ही तो आया हूँ... मगर थोड़ी देर बाद आंटी की जोर-जोर से बड़बड़ाने की आवाज़ें आयीं तो मुझसे रहा नहीं गया... ग्राउंड फ्लोर पर गया मैं, तो देखा अंकल हाथ में वाइपर और पोंछा लिए खड़े थे... मुझे देखकर मुस्कराये और फिर फर्श की सफाई में लग गए... अंदर किचन से आंटी के बड़बड़ाने की आवाज़ें अब भी रही थीं... कितनी बार मना किया है... फर्श की धुलाई मत करो... पर नहीं मानता बुड्ढा... मैंने पूछा "अंकल क्यों करते हैं आप फर्श की धुलाई?, जब आंटी मना करती हैं तो"... अंकल बोले " बेटा! फर्श धोने का शौक मुझे नहीं इसे है। मैं तो इसीलिए करता हूं ताकि इसे न करना पड़े।"...  "ये सुबह उठकर ही फर्श धोने लगेगी इसलिए इसके उठने से पहले ही मैं धो देता हूं" . क्या!... मुझे बड़ा आश्चर्य हुआ। अंदर जाकर देखा आंटी किचन में थीं। "अब इस उम्र में बुढ़ऊ की हड्डी पसली कुछ हो गई तो क्या होगा? मुझ...

बेटियों का विवाह

 बेटियों का विवाह तय होते ही मातापिता जब तक महज एक अदद डबल बैड, ड्रैसिंग टेबल और सेफ-अलमारी की सोच से निकलकर बाहर नहीं आएंगें , और अपनी बेटी रूपी पौध को ससुराल की मिट्टी में रोपने से पहले उस मिट्टी की उर्वरकता , खाद, पानी , हवा और धूप के साथ साथ माली की कार्य-कुशलता, संवेदनशीलता, गतिशीलता, आत्मनिर्भरता , सहनशीलता , आत्मकेंद्रिता की जाँच पड़ताल करना शुरु नहीं करेंगें तब तक विवाह नामक संस्था अपनी विश्वसनीयता को लेकर संदेह के घेरे में ही रहेगी ! वरना, कुछ नहीं बदलेगा, दूल्हे की मैरून शेरवानी, दुल्हन का लाल लहंगा, बैंड पर "मेरे यार की शादी है" की धुन "बहारों फूल बरसाओ" ट्रैक बजाकर , आने वाले पतझड़ की आहट दबा , बेटियों के हृदय में सचमुच की बहार का भ्रम पैदा करता फिल्मी गीत, विवाह की रस्मों एवं मंत्रोच्चारण को  जैसे तैसे निपटाकर चैन की साँस लेते  'सो काल्ड मनमीत्स!' विवाह तय होते ही किसी भी मायके और ससुराल ने,  कभी सोचा है बेटियों को किताबों की अलमारी देने की ? कभी सोचा है उसको पेंटिंग के लिए कैनवस और ब्रश देने की ? कभी सोचा उसे डायरियाँ और खूबसूरत कलम देने की ? क...

माँ का पल्लू

    मुझे नहीं लगता, कि आज के बच्चे            यह जानते हों , कि            पल्लू क्या होता है ?         इसका कारण यह है, कि            आजकल की माताएं         अब साड़ी नहीं पहनती हैं।      *पल्लू*       बीते समय की बातें हो चुकी हैं।      माँ के पल्लू का सिद्धाँत ... माँ को  गरिमामयी छवि प्रदान करने के लिए था।    इसके साथ ही ... यह गरम बर्तन को     चूल्हा से हटाते समय गरम बर्तन को        पकड़ने के काम भी आता था।          पल्लू की बात ही निराली थी.            पल्लू पर तो बहुत कुछ               लिखा जा सकता है।   पल्लू ... बच्चों का पसीना, आँसू पोंछने,     गंदे कान, मुँह की सफाई के लिए भी            इस्तेमाल किया...

महत्वपूर्ण सीख(Renu)

एक युवा युगल के पड़ोस में एक वरिष्ठ नागरिक युगल रहते थे , जिनमे पति की आयु लगभग अस्सी वर्ष थी , और पत्नी की आयु उनसे लगभग पांच वर्ष कम थी। युवा युगल उन वरिष्ठ युगल से बहुत अधिक लगाव रखते थे , और उन्हें दादा दादी की तरह सम्मान देते थे। इसलिए हर रविवार को वो उनके घर उनके स्वास्थ्य आदि की जानकारी लेने और कॉफी पीने जाते थे। युवा युगल ने देखा कि हर बार दादी जी जब कॉफ़ी बनाने रसोईघर में जाती थी तो कॉफ़ी की शीशी के ढक्कन को दादा जी से खुलवाती थी . इस बात का संज्ञान लेकर युवा पुरुष ने एक ढक्कन खोलने के यंत्र को लाकर दादी जी को उपहार स्वरूप दिया ताकि उन्हें कॉफी की शीशी के ढक्कन को खोलने की सुविधा हो सके। उस युवा पुरुष ने ये उपहार देते वक्त इस बात की सावधानी बरती की दादा जी को इस उपहार का पता न चले ! उस यंत्र के प्रयोग की विधि भी दादी जी को अच्छी तरह समझा दी। उसके अगले रविवार जब वो युवा युगल उन वरिष्ठ नागरिक के घर गया तो वो ये देख के आश्चर्य में रह गया कि दादी जी उस दिन भी कॉफी की शीशी के ढक्कन को खुलवाने के लिए दादा जी के पास लायी !  युवा युगल ये सोचने लगे कि शायद दादी जी उस यंत्र का प्रयोग क...

जीवन की पाठशाला

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की जिंदगी में ना करना /बोलना भी बहुत जरुरी होता है ,हम हमेशा हाँ -हाँ करते /बोलते कई बार अपने संबंधों में स्वयं ही दरार /दूरी पैदा कर लेते हैं ......, जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आँख में गिरा हुआ तिनका -पैर में चुभा हुआ काँटा और रूई में छिपी आग से भी ज्यादा खतरनाक है वो व्यक्ति जो बाहरी तौर पर तो आपका /आपके साथ है पर आंतरिक तौर पर आपके लिए षड़यंत्र रचता रहता है ....., समय चक्र ने मुझे सिखाया की इंसान की बुद्धि उसकी बातचीत से /इंसानियत उसके व्यवहार से और संस्कार उसकी आँखों से बोलते हैं ना की उसके महंगे कपड़ों -गाडी या बंगले से .....🙏 आखिर में एक ही बात समझ आई की पछतावे से बीता हुआ कल और चिंता से आने वाले कल को बदला नहीं जा सकता इसलिए जो अभी -वर्तमान में है उस पल को जी भर कर जियें ......! जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की सबसे आसान है किसी को उपदेश देना -उसमें कमियां निकालना ......लेकिन मुश्किल है उन उपदेशों को स्वयं के लिए अमल में लाना और खुद की कमियों को खोजना ..., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की कहते हैं की जब समय -हालात इंसान को तोड़ते हैं तो वो कहीं ना कहीं बिगड़(शरा...

जीवन की पाठशाला

जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की आप अपने बच्चों से भरपूर प्यार करें -उन्हें हर संभव सुख सुविधा सम्पन्नता और अच्छे संस्कार दें पर मेहरबानी करके अपनी ढलती उम्र के साथ अपने आने वाले कल के बारे में भी सोचें क्यूंकि इस कलयुग में दूध देती गाय को सब सहेजते हैं और बाद में या तो उसे जंगल में या थोड़ी बहुत मानवीयता हो तो किसी कोने में स्थान दे दिया जाता है रखवाली के लिए ..........., जीवन चक्र ने मुझे सिखाया की जो किरदार एक बाप अपनी औलाद के लिए निभा सकता है ,वो औलाद कभी भी नहीं निभा सकती बल्कि मौका आने पर पढ़ाई लिखाई में खास कर गणित में एकदम कमजोर औलाद भी उसने थोड़े समय आपके विपरीत समय में आपके ऊपर क्या खर्च किया बहुत ही सुलझे हुए गणितज्ञ की तरह आपको समझाती है ....., समय चक्र ने मुझे सिखाया की तुम्हें चाहेगा वो हकीकत में तुम्हारे सिवा कुछ और नहीं चाहेगा और जो तुम्हारे माध्यम से बहुत कुछ चाहेगा उसके लिए तुम एक साधन मात्र हो .....🙏 आखिर में एक ही बात समझ आई की आपका शरीर /मन या आत्मा कितनी भी घायल क्यों ना हो ,सामने वाले के सामने ख़ास कर दुनियादारी वाले अपनों के सामने अपने आपको एकदम चुस्त दुरुस्त प्रस...

Yugantika

 लोग नई पौध लाते  नर्सरी वाले से  हजार बात पूछते हैं, पानी कितना , खाद कब कब, मौसम के हिसाब से देना, धूप नहीं आती है, इंडोर रखनी है, बागीचे की मिट्टी रेतीली है ,  गमले की पथरीली है , चल तो जाएगी न पौध ? और एक स्त्री को जब ब्याहकर लाते हैं, न तो जमीन से उखाड़कर  देने वाला ज्यादा कुछ सोचता, न ही अपनी जमीन पर  लाकर रोपने वाला कुछ पूछता, जाहिर सी बात है , ये भी क्या पूछने वाली बात है ? उसे बिन धूप, जमीन पकड़ना होगा खाद मिट्टी न भी हो तो सहना होगा लगने लगें जड़े जब सूखी खुद पानी बनकर लगना होगा मौसम कोई आए जाए  सदाबहार ही रहना होगा! भेज दी, ले आए,  अब वो जाने, उसका काम जाने!

हम छोटे शहरों के छोटे लोग

 हम छोटे शहरों के छोटे लोग कभी बड़े नहीं होते ! राशन, बिजली , पानी, मोबाइल के बिल चाहे जितने बड़े हो जाएं हम बड़े नहीं होते ! हो जाएं अनगिनत  मल्टीस्टोरी फ्लैट्स फूड कोर्ट में दुकानें कितनी ही गाड़ियां बड़ी हो जाएं, हमारी प्रापर्टीज़ लेकिन हम बड़े नहीं होते ! हम नहीं खेलते बिलियर्डस,स्नूकर  नहीं जाते पब डिस्को, करते नहीं छुट्टियों में  बड़े बड़े वर्ल्ड टूर हमें पसंद होता है बतियाना  तब भी अम्मा के छोटे ,भिंचे से अस्तव्यस्त कमरे में , खाते हैं हम मूंगफली  और छोटे चाचा के हाथों पिसी  लहसुन नमक मिर्च की चटनी  देखते हैं एलबम छुटकी की शादी की  और ढूंढते हैं खुद को ब्लैक एंड व्हाईट किसी  छोटी सी ग्रुप फोटो में ! हम छोटे से शहरों के छोटे लोग बड़े होने, दिखने और रहने में  अंतर करना जानते हैं ! हम डैस्टिनेशन वैडिंग नहीं करते, हम डैस्टिनेशन लिविंग करते हैं! हम छोटे शहरों के छोटे लोग  न्यूटैला का छुईमुई डिब्बा नहीं  घर के निकले देसी घी से भरा चीनी मिट्टी का बड़ा सा मर्तबान होते हैं! हम छोटे शहरों के छोटे लोग कभी बड़े नहीं होते!

we wake up, well in-time.

I woke up today, having dreamt early morning at 4 AM. I was in one of the biggest Mall of India - DLF Mall - looking to buy a pair of socks and a neck tie. As I walked in, I noticed a sweater with a price tag of Rs. 9000. Next to the sweater were a pair of Jeans for Rs. 10,000 The socks were Rs. 8000 ! And Tie for estonishing Rs. 16,000 ! I went looking for a salesperson and found one in the watch Dept He was showing a man a Rs. 225/- Rolex watch. I looked in the glass case and there was a 4 carat diamond ring also on sales for Rs.95/- Shocked I asked the salesperson "How could a Rolex watch sell for Rs.225/- ? and a cheap pair of socks sell for Rs. 8000/-"? He said "Someone slid into the store last night and changed the price tag on everything ". "Everyone is confused , people are acting like they have lost their sense of value". “They are willing to pay lots of money for things of little value ,and very little money for things of great value " ...

समर्पण

  "बचपन और युवा काल की स्मृतियां हमेशा मधुर ही लगती हैं, चाहे उस समय वह कष्टप्रद लगी हों। इंग्लिश में इसके लिए 'नॉस्टैल्जिया' शब्द का प्रयोग करते हैं। और अब तो यह शब्द हमारे शब्दकोष में ही जुड़ गया है।  अब तो नाॅस्टाल्जिया एक बहुत बड़ा मार्केट भी बन गया है। अब छोटे-छोटे शहरों के बैकग्राउंड पर फिल्में बनती हैं, टीवी सीरियल बनते हैं, कहानी लिखी जाती हैं और यह पाठकों को, दर्शकों को पसंद भी आती हैं। क्योंकि मधुर स्मृतियां सभी को पसंद हैं। अपने बचपन में,अपने युवावस्था में जाकर, चाहे वह मानसिक ही हो, लोगों को बड़ा सुकून मिलता है। जीवन का यह जो हिस्सा है, जो अर्जन के पहले तक का होता है, बड़ा सुखद होता है। सभी कहते हैं कि वह समय मस्ती भरा था। वह समय किसी भी दबाव से रहित था, दुश्मनी और झगड़े जैसी भावना से रिक्त था, इसीलिए यह समय दिल और दिमाग को बहुत सुकून देता है और इस को बार बार याद करने को दिल चाहता है।  लेकिन क्या आपने कभी सोचा है कि उस समय-काल में बताया गया जीवन इतना तनाव रहित और इतना सुखद क्यों था? और अब वह सुख कहां चला गया?  वह सुख अभी भी हमारे अंदर है। उस सुख का रसास्व...

समानता की सृष्टि

" मुझे शरीर बनना है।"  भगवान चौक गए।  "यह तुम क्या कह रही हो, आत्मा? तुम आत्मा हो। तुम्हारा प्रयोजन भिन्न है। शरीर का वह कार्य नहीं है। क्यों बनना चाहती हो तुम शरीर?  "शरीर स्वतंत्र निर्णय ले सकता है, प्रभु।" आत्मा गंभीर थी, "आत्मा तो शरीर पर निर्भर है। शरीर ही कर्म करता है, फल पाता है। शरीर जो चाहे वह करता है। आत्मा तो शरीर की दासी है। मात्र उसके क्रियाकलापों का लेखा-जोखा करती रहती है। आत्मा का कोई स्वयं अस्तित्व नहीं है प्रभु। आत्मा का कोई कर्म ही नहीं है, फिर आत्मा पर कोई क्यों ध्यान दे? सभी तो शरीर और इसके सौंदर्य का वर्णन ही करते हैं।"  भगवान ने समझाने की चेष्टा की।  " तुम शरीर के उन कार्यकलापों से अपनी  तुलना कर रही हो जो स्थूल जगत और उसकी प्रतिक्रिया से संबंधित हैं? क्या वे प्रतिक्रियाएं ही किसी की क्षमता का परिचायक है?  तुम जगत से दूर रहकर शरीर को प्राण देती हो, ऊर्जा देती हो, कार्य करने के लिए शरीर को गति देती हो। तुम्हारे बगैर शरीर गति नहीं कर सकता। और वैसे भी तुम्हारा स्थूल जगत से क्या संबंध? तुम तो शरीर और मेरे बीच का सेतु हो। तुम आत्...

अपनी अपनी दृष्टि👁️

  *   एक भिक्षुणी संन्यासीनी स्त्री एक रात एक गांव में भटकती हुई पहूंची । रास्ता भटक गयी थी और जिस गांव में पहूचंना चाहती थी वहां न पहूचंकर, दूसरे गाँव पहूच गयी। उसने जाकर एक घर का दरवाजा खटखटाया, आधी रात थी दरवाजा खुला लेकिन उस गांव के लोग दुसरे धर्म को मानते थे और वह भिक्षुणी दूसरे धर्म की थी। उस दरवाजे के मालिक ने दरवाजा बंद कर लिया और कहा- देवी यह द्वार तुम्हारे लिये नहीं है। हम इस धर्म को नहीं मानते हैं तुम कहीं और खोज कर लो और उसने चलते वक्त यह भी कहा की इस गांव में शायद ही कोई दरवाजा तुम्हारें लिए खुले। क्योंकि इस गांव के लोग दूसरे ही धर्म को मानते है। और हम तुम्हारे धर्म के दुश्मन है। आप तो जानते ही हैं कि धर्म-धर्म आपस में बडे क्षत्रु है।  एक गांव का अलग धर्म हैं, दूसरे गांव का अलग धर्म है। एक धर्म वाले को दसूरे धर्म वाले के यहां कोई जगह नहीं, कोई आशा नहीं, कोई प्रेम नहीं, द्वार बंद हो जाते है। द्वार बंद हो गये उस गांव में। उसने दो-चार दरवाजे खटखटाये लेकिन दरवाजे बंद हो गये, सर्दी की रात है। अधंरी रात है वह अकेली स्त्री है , वह कहां जायेगी ? लेकिन धार्मिक लोग इस ...

परीक्षा के बाद विद्यार्थी की स्थिति

                          सोच रहा है छात्र बेचारा ,   क्या होगा परिणाम हमारा ?   परीक्षा तो मैंने मन से दी थी ,   लेकिन पढ़ाई कुछ न की थी ।।             कुछ पेपर से प्रश्न ही लिख दिए ,             कुछ के उत्तर ठीक लिख दिए ।             कुछ के ताक _ झाँक के ,             कुछ के उत्तर पूछ _ पाछ के ।।  थोड़ी सी मेहनत की होती ,  चमक उठता किस्मत का सितारा ।  सोच रहा है छात्र बेचारा ,  क्या होगा परिणा हमारा ?             स्कूल पहुँच कर रोज सवेरे ,             कक्षाओं के लेते फेरे ।             दिन भर देखे हँसते चेहरे ,             कहते सभी दोसात हो मेरे ।।  आठों कालांश व्यतीत हो गए ,  लेकिन उसमे...

गायत्री निवास।।*🌹🧘‍♀️(क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति)

 आज अंतर्राष्ट्रीय नारी दिवस पर नारी को समर्पित दिल को छू लेने वाली एक सत्य कथा /वृतांत/ घटना : थोड़ी लंबी है पर दिल से पढ़िए! अगर अंदर तक आपको उद्वेलित करती है तो आपकी मानवीय संवेदनायें अभी जिन्दा है, और कोशिश कीजिए की ये संवेदनाएं उम्र भर जिन्दा रहे....., जो दिल को तसल्ली दे वो साज उठा लाओ  दम घुटने से पहले ही आवाज उठा लाओ  आंखों में समंदर है,आशाओं  का पानी है! जिन्दगी और कुछ भी नहीं-तेरी मेरी कहानी है.... *क्यूं जरूरी है घर में बड़े बुजुर्गों की उपस्थिति, एक मार्मिक कहानी जो किसी ने भेजी थी, मुझे लगा कि इसे प्रचारित किया जाना भारतीय संस्कृति को बचाये रखनें के लिए आवश्यक हैं ...* *पढ़े और अपनी प्रतिक्रिया दें....* 🙏🏼        *🌹🌲🌷॥गायत्री निवास।।*🌹🧘‍♀️ *बच्चों को स्कूल बस में बैठाकर वापस आ शालू खिन्न मन से टैरेस पर जाकर बैठ गई।* *सुहावना मौसम, हल्के बादल और पक्षियों का मधुर गान कुछ भी उसके मन को वह सुकून नहीं दे पा रहे थे, जो वो अपने पिछले शहर के घर में छोड़ आई थी।* *शालू की इधर-उधर दौड़ती सरसरी नज़रें थोड़ी दूर एक पेड़ की ओट में खड़ी बुढ़िया पर ठह...